गूगल के बज़ अप्लिकेशन से गूगल को जितना लाभ नहीं हुआ उतनी हानि हुई है. बज़ ट्विटर के जैसी एक अप्लिकेशन है जो जीमेल के साथ जुड़ जाती है और उसके बाद प्रयोक्ता जीमेल पर ही अपने स्टेटस अपडेट कर सकता है, टिप्पणी दे सकता है और वह सबकुछ कर सकता है जो ट्विटर पर होता है. Read more... टिप्पणी करें


जल्द ही टेलिपैथी पर आधार रखकर कार्य करने वाले कम्प्यूटर एक वास्तविकता होंगे. ये कम्प्यूटर प्रयोक्ता के दिमाग की हलचल को महसूस कर उस हिसाब से कार्य कर सकेंगे. प्रयोक्ता को सिर्फ निर्देशों को दिमाग में पढना होगा और कम्प्यूटर उस हिसाब से कार्य करने लग जाएंगे. इस तरह के टेलिपैथी कम्प्यूटर कभी दूर की कौड़ी लगते थे लेकिन अब नहीं.
क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपका कोई मित्र आपकी कोई किताब ले गया हो और लौटाना भूल गया हो? हो सकता है कि आप स्वयं किसी को किताब या अन्य कोई चीज देकर भूल गए हों. कभी कभार देर सवेर उधार दी गई चीजें याद आ भी जाती है, लेकिन बहुत बार दोनों पक्षों द्वारा भुला दी जाती हैं.
यदि आप अपने ईमेल खाते का पासवर्ड भूल जाएँ तो नया पासवर्ड बनाने के लिए आपसे सुरक्षा प्रश्न पूछा जाता है. जीमेल की बात करें तो यह सवाल "Your mother's maiden name" या फिर "Your frequent flyer number" हो सकता है. लेकिन इस तरह के सुरक्षा सवाल हैकरों के लिए "कैकवॉक" होते हैं.
एक सात साल की बच्ची ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर केम्पिंग कर रही है. फिर वह वहाँ से उड़ान भरती है और जावा द्वीप तक जाते हुए बीच रास्ते में स्कूबा डाइविंग का मजा लेती है. समुद्र में उसे बड़े आकार की मछलियाँ दिखती है. उनसे खेलते हुए वह आगे बढती है और जावा द्वीप पहुँचती है जहाँ डॉल्फिन मछलियाँ स्वागत के लिए तैयार खड़ी हैं. 