गूगल द्वारा प्रकाशित आँकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि दुनिया भर के वेबपन्नों में से यूनिकोड आधारित पन्ने अब 50% का आँकड़ा छूने ही वाले हैं. आज से 18 महिने पहले गूगल ब्लॉग के द्वारा सूचित किया गया था कि यूनिकोड आधारित वेबपन्नों ने अन्य एनकोडिंग वाले [जैसे कि ASCII, Latin-1 या Windows 1252] आधारित वेबपन्नों की संख्या को पछाड़ दिया है. और अब तो यह फासला बहुत बड़ा हो गया है.
गूगल द्वारा प्रकाशित यह ग्राफ गूगल के आंतरिक डेटा, पन्नों की इंडेक्सिंग पर आधारित है. इसलिए स्वयं गूगल स्वीकार करता है कि इसमें कुछ त्रुटियाँ हो सकती है परंतु वह बहुत बड़ी नहीं होगी. इससे कम से कम यह तो पता चलता है कि आज अधिसंख्य लोग यूनिकोड करेक्टर एनकोडिंग का इस्तेमाल करने लग गए हैं.
क्या है यूनिकोड?
वेब पन्ने कई तरह के करेक्टर [अक्षर] एनकोडिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे कि ASCII, Latin-1, Windows 1252 या फिर Unicode. अधिकतर करेक्टर एनकोडिंग मात्र कुछेक भाषाओं को ही समर्थन दे सकती है, परंतु यूनिकोड एनकोडिंग हजारों वैश्विक भाषाओ को समर्थन देती है, जैसे कि लगभग सभी भारतीय भाषाएँ, जुलु, अरबी, चीनी आदि.
यूनिकोड एनकोडिंग के माध्यम से बनाए गए पन्नों पर प्रयुक्त लिपि को पढने के लिए प्रयोक्ता को किसी भी प्रकार के फोंट डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं रहती और इससे अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में भी कम्प्यूटिंग काफी सरल हो जाती है.
गूगल ने हाल ही में अपने आपको यूनिकोड के नए संस्करण 5.2 पर अपग्रेड किया है. इस नए संस्करण में 6,600 से अधिक नए अक्षर जोड़े गए हैं.


