वह समय अधिक दूर नहीं है जब हमारे पास ऐसे कम्प्यूटर होंगे जो वर्तमान सिस्टम से 1 लाख गुना अधिक तेजी से काम करेंगे और ऊर्जा का इस्तेमाल भी कम करेंगे. वर्तमान कम्प्यूटर सिस्टम की हार्ड डिस्क काफी ऊर्जा का इस्तेमाल करती है परंतु नई तकनीक हार्ड डिस्क की वर्तमान तकनीक को पूरी तरह से बदल देगी.
क्या होता है आज?
आज जब एक सिस्टम बूट होता है तो करीब 1 से 2 मिनट का समय लगता है. इस दौरान हार्ड डिस्क की जानकारियाँ RAM यानी रेंडम एक्सेस मेमरी तक जाती है. हमारा ध्यान नहीं जाता परंतु इस दौरान काफी मात्रा में ऊर्जा की खपत हो जाती है. आज दुनिया में जितने कम्प्यूटर सिस्टम कार्यरत हैं उसका अनुमान लगाया जाए तो मात्र कम्प्यूटर बूटिंग के दौरान प्रतिदिन अरबों रूपए खर्च हो जाते हैं.
नई तकनीक
आईबीएम के ज्यूरिख रिसर्च सेंटर के प्रोफेसर मैथियास लुईट और उनकी टीम ने एक नई तकनीक विकसित की है. उन्होनें करोडों नैनोवायरों को जोडकर एक चिप तैयार की है जो शॉकप्रूफ है और काफी उपयोगी भी. उन्होनें जो सिस्टम तैयार किया है उसमें निकल-आइरन के नैनोवायर इस्तेमाल किए गए हैं. इससे बनी टेप वर्तमान टेम से लाख गुना छोटी होती है. और चुम्बकीय वीडियोटेप के विपरित यह खुद नहीं घुमती है.
स्पिन पोलराइज़ड विद्युत के द्वारा जानकारियों को इस टेप के भीतर दाखिल किया जाता है और इसकी गति कई सो मीटर प्रति सैकंड हो सकती है. जब इस तकनीक पर आधारित कम्पयूटर सिस्टम बन जाएगा तो जानकारियों को प्रवाहित करना वर्तमान तकनीक की अपेक्षा 1 लाख गुना तेज हो जाएगा. और ऊर्जा की खपत नहिवत हो जाएगी.
इस सिस्टम को पूर्ण रूप से विकसित करने में अभी 5 से 7 वर्ष लगेंगे.

