अमेरिका के नोर्थ कोरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने कम्पयूटर ओपरेटिंग सिस्टम को किसी भी सम्भावित हमले या हैकिंग प्रयास से बचाने के लिए एक नई तकनीक विकसित करने का दावा किया है.यह नई तकनीक तीन चरणों में काम करती है. पहला चरण है ओएस की सुरक्षित कॉपी बनानी, दूसरा चरण है सम्भावित हमले के समय उसकी पहचान करना और तीसरा चरण है भविष्य में उसी तरह का हमला ना हो इसका इंतजाम करना.
यह सिस्टम कुछ कुछ विंडोज के सिस्टम रिकवरी की तरह ही काम करता है. इस सिस्टम को इंस्टाल करने के बाद प्रयोक्ता का कम्प्यूटर समय समय पर अपनी सुरक्षित कॉपी बनाता रहता है. हैकिंग प्रयास होने के समय यदि सिस्टम में कोई अवांछित अप्लिकेशन आ जाती है तो सिस्टम अपने पुराने स्वरूप पर चला जाता है. इसके अलावा उस अप्लिकेशन की पहचान रिकार्ड कर ली जाती है और उसे फिर से आने से रोक दिया जाता है.
कुछ विशेषज्ञ इस तकनीक को लेकर अधिक उत्साहित नहीं हैं क्योंकि इससे सिस्टम की गति पर काफी असर पडता है. परंतु इस सिस्टम से जुडे डॉ. यान सोलिहिन के अनुसार उनका सिस्टम कम्प्यूटर के 5% संसाधनों का ही इस्तेमाल करता है.

