नीरज पाठक की फिल्म राइट या रांग एक थ्रिलर फिल्म कही जा सकती है. हालाँकि फिल्म का कुछ भाग ही सही मायनों में थ्रिलर है और बाकी का हिस्सा मसाला फिल्म जैसा है.
समीक्षा
हाईड एंड सिक - समीक्षा - सस्पेंस की भूलभूलैया
अपूर्व लखिया की बतौर निर्माता यह पहली फिल्म है. इस फिल्म का निर्देशन उन्होनें नहीं किया है बल्कि यह जिम्मा अपने सहायक शॉन अरान्हा को सौंपा है, जिनकी बतौर निर्देशक यह पहली फिल्म है. शॉन अपनी पहली फिल्म में प्रभावित करते हैं. चुँकि यह एक सस्पेंस फिल्म है, इसलिए रहस्य को क्लाइमैक्स तक बनाए रखना काफी महत्वपूर्ण होता और इसमें वे सफल होते हैं.
अतिथि तुम कब जाओगे? समीक्षा - पुराने जमाने की याद
"अतिथि देवो भव:" यह भारत की परम्परा है, परंतु आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में अतिथि तब तक ही अच्छे लगते हैं जब तक वे एक निश्चित समय से अधिक किसी के घर ना रूकें. लम्बे काल तक रूकने वाले अतिथि किसे अच्छे लगते हैं? अतिथि तुम कब जाओगे, इसी विषय पर आधारित फिल्म है जो पुराने जमाने की हल्की फुल्की फिल्मों जैसे कि गोलमाल, नरम गरम, अंगूर आदि की याद दिलाती है.
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