जन्माष्टमी के पर्व को ध्यान में रखते हुए धर्मा प्रोडक्शन ने इस फिल्म को शुक्रवार की बजाय गुरूवार को ही प्रदर्शित करने का फैसला किया ताकी एक अतिरिक्त दिन मिल सके. यह योजना कामयाब हो सकती है. वी आर फैमिली एक पारिवारिक फिल्म है जो राजश्री घराने की फिल्मों की याद दिलाती है परंतु राजश्री की फिल्मों की तरह नहीं है. समीक्षा
वी आर फैमिली - समीक्षा - भावनाओं से भरी फिल्म
जन्माष्टमी के पर्व को ध्यान में रखते हुए धर्मा प्रोडक्शन ने इस फिल्म को शुक्रवार की बजाय गुरूवार को ही प्रदर्शित करने का फैसला किया ताकी एक अतिरिक्त दिन मिल सके. यह योजना कामयाब हो सकती है. वी आर फैमिली एक पारिवारिक फिल्म है जो राजश्री घराने की फिल्मों की याद दिलाती है परंतु राजश्री की फिल्मों की तरह नहीं है. आशाएं - समीक्षा - सार्थक बोझिल फिल्म
नागेश कुकुनूर गम्भीर किस्म की फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. उनकीफिल्मों में संदेश छिपा होता है. उनकी यह नई फिल्म भी एक संदेश देती है -
जीवन को जीने का, उसका आनंद उठाने का और हर परिस्थिति में खुश रहना सीखने
का संदेश.
लफंगे परिंदे - समीक्षा - सपनों की उड़ान और लफंगागिरी
यह विशुद्ध मुम्बईया फिल्म है जिसे मुम्बईकर तो पसंद कर सकते हैं परंतु अन्य जगहों के दर्शक कितना पसंद करेंगे यह कहना मुश्किल है.
हैल्प : समीक्षा - सोरी नो हैल्प
भारत में जब भी कोई होरर फिल्म बनती है तो फार्मूले पहले से ही तय होते हैं. अत्याचार सहन करने के बाद मृत्यु को प्राप्त होने वाली महिला [अमूमन] बदला लेने के लिए वापस आती है और किसी के शरीर में दाखिल होकर अपने दुश्मनों का खात्मा करने लगती है. फिल्म का हीरो किसी तांत्रिक [आजकल इनकी जगह साइकोथेरेपिस्ट लेने लगे हैं] की मदद से अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड को बचा लेता है. पीपली लाइव: समीक्षा - टीआरपी और स्वार्थ के आगे बौना इंसान
"नाम ही काफी है?". आमिर खान प्रोडक्शन की फिल्म है तो उम्मीदें अपने आप चार गुना बढ जाती है. जब दर्शक थिएटर में जाते हैं तो यह बात मन में लेकर जाते हैं कि फिल्म अच्छी ही होगी क्योंकि यह आमिर खान की फिल्म है.
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