यह किरण राव की पहली बतौर निर्देशक फिल्म है. उन्होनें इस फिल्म की परिकल्पना काफी पहले (जब वे लगान की शूटिंग के दौरान आशुतोष गोवारिकर की सहायक थी) की थी. इस फिल्म से साबित होता है कि किरण राव में कहानी को कहने नैसर्गिक प्रतिभा है.
समीक्षा
धोबी घाट - समीक्षा - मुम्बई के चेहरे का सटीक चित्रण
नो वन किल्ड जैसिका - समीक्षा - कड़वे सच को उजागर करती फिल्म
इस देश में यदि सत्ता और पैसा है तो सबकुछ है. परंतु यदि लोग जाग जाएँ तो बडी से बडी सरकार भी गिर सकती है और बडे से बडा आदमी भी जेल की सलाखों के पीछे धकेला जा सकता है. जरूरत है बस लोकजागृति की. नो वन किल्ड जैसिका बहुचर्चित जैसिका लाल (म्यारा) हत्याकांड पर आधारित है. यह फिल्म बताती है कि कैसे रसूख वाले लोग कानून को अपने हाथों में खिलाते हैं और कैसे मीडिया और लोगों का दबाव हारी हुई बाजी को जीत में बदल सकता है.
तीस मार खाँ - शीला के भरोसे, पर नाकाम
फराह खान का 70 का प्रेम जारी है. उनकी यह तीसरी फिल्म है जो आज के जमाने की कम 70 के जमाने की अधिक लगती है. फिल्म की शुरूआत भी 70 की बॉलीवुड फिल्म से होती है, जिसका हीरो एक चोर है. फिल्म को देख रहा पति अपनी पत्नी से कहता है - "अभिमन्यु माँ के पेट से युद्ध सीख कर आया था, तेरा बेटा चोरी सीख कर आएगा".
"नो प्रोब्लम" में काफी प्रोब्लम परंतु दर्शनीय
अनीस बज़्मी की फिल्म नो प्रोब्लम को माइंडलैस कॉमेडी की श्रेणी में रखा जा सकता है. ये ऐसी फिल्में होती हैं जिन्हें देखने के पहले आपको मान लेना होता है कि इनमें तथ्यपरक कुछ भी नही होगा और इन फिल्मों का मजा तभी लिया जा सकता है जब आप अपने दिमाग का इस्तेमाल ना करें.बैंड बाजा बारात - यशराज की "शादी' फिल्म
इसे हम सादी फिल्म नहीं कह सकते क्योंकि इसमें दिल्ली की भारी भरकम शादियों को मजेदार तरीके से दिखाया गया है. इसके साथ ही इसमें यशराज फिल्मस की ट्रेडमार्क शैली का रोमांस भी परोसा गया है. कुल मिलाकर यह फिल्म यशराज फिल्मों के प्रसंशकों को तो पसंद आएगी ही साथ ही साथ युवाओं को भी पसंद आएगी.More Articles...
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