"नो प्रोब्लम" में काफी प्रोब्लम परंतु दर्शनीय
तभी तो दक्षिण अफ्रीका में बनी इस फिल्म के कई दृश्य साफ तौर पर भारत में फिल्माए गए लगते हैं और बताया जाता है कि यह दक्षिण अफ्रीका है. वैसे यह समझ से परे है कि निर्माता-निर्देशक के लिए नो प्रोब्लम जैसी फिल्म में विदेश दिखाने की क्या आवश्यकता थी. वैसे भी बॉलीवुड फिल्मों में यही होता है. यहाँ फिल्म में चाहे अफ्रीका दिखाया जाए या सिंगापुर या कोरिया या ऑस्ट्रेलिया - पुलिसवालों से लेकर दुकानदार तक सब होते तो भारतीय ही हैं.
बहरहाल इस फिल्म की कहानी हीरों की चोरी और यश [संजय दत्त] और राज [अक्षय खन्ना] की जोडी पर आधारित है. एक "तीस मार खाँ" पुलिस अफसर अर्जुन [अनिल कपूर] इन्हें पकडने की भरपूर कोशिश करता है. अर्जुन अपनी दोहरे व्यक्तित्व वाली पत्नी काजल [सुष्मिता सेन] से परेशान है. उधर झंडुलाल [परेश रावल] इसलिए परेशान है क्योंकि यश-राज ने उसके गाँव में जो गडबड की उसका दोष खुद उसके सिर पर आ गया है.
यह एक सितारों से भरी फिल्म है जिसमें कॉमेडी तो है परंतु कई जगह ठुंसी गई है. अनीस बज़्मी ने सिंह इज़ किंग और वेलकम जैसी फिल्में बनाई थी. यह फिल्म उन फिल्मों से कमतर ही कही जा सकती है. परंतु इस फिल्म को बचाते हैं स्टार अभिनेताओं की टाइमिंग, जैसे कि अनिल कपूर, संजय दत्त और अक्षय खन्ना के पात्र काफी जीवंत लगते हैं.
परंतु फिल्म में कई कमियाँ और झोल हैं. दक्षिण अफ्रीका के झंडुलाल के गाँव में मात्र भारतीयों का दिखाई देना कैसे हजम हो सकता है? परंतु फिर इस तरह की फिल्में होती भी ऐसी है! यदि आपकी पाचनक्षमता अच्छी हो तो जरूर देखें.

