क्या कोंडोम एकदम सुरक्षित होते हैं? क्या कुछ निश्चित तिथियों के दौरान सेक्स में लिप्त होने से गर्भधारण की सम्भावना कम हो जाती है? क्या दोनों साथियों के द्वारा एक ही समय पर चरमानंद प्राप्त करना आवश्यक होता है? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो सेक्स मिथकों से जुडे हुए हैं और जो सच्चाई से परे हैं...
कोंडोम एकदम सुरक्षित?
कोंडोम गर्भधारण रोकने के लिए प्रयुक्त संसाधनों में से सर्वाधिक उपयोगी और सुरक्षित माध्यम है, इसमें कोई संदेह नहीं है. परंतु कोंडोम भी शत प्रतिशत सुरक्षित नहीं होता है. कई बार सम्भोग के दौरान कोंडोम के फट जाने की घटनाएँ सामने आई हैं. आजकल मेडिकल दुकानों में कई प्रकार के सस्ते कोंडोम भी उपलब्ध होते हैं, जिनको बनाने वाली कम्पनियाँ उनकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देती. इसलिए कोंडोम खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि वह अच्छी कम्पनी का हो. इसके लिए शायद आपको थोडी अधिक कीमत चुकानी पडे परन्तु अवांछित गर्भधारण को रोकने के लिए कोंडोम से अच्छा और कोई माध्यम भी नही है.
स्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेने से गर्भधारण नहीं होता
यह एक मिथक है और सच्चाई से परे है. सच्चाई यह है कि सम्भोग की क्रिया के दौरान पुरूष के लिंग से निकलने वाले द्रव्यों में वीर्य के अंश होते हैं. एक बूंद वीर्य में ही लाखों की संख्या में शुक्राणु होते हैं जिनसे गर्भ ठहर सकता है. दूसरी बात यह है कि स्खलन से ठीक पहले पुरूष की मानसिक स्थिति कैसी होगी यह तय करना मुश्किल है. आवेश के पलों के दौरान वे सही समय पर उस क्रिया को रोक देंगे यह तय करना कठीन होता है.
एक समय पर चरमानंद प्राप्त करना आवश्यक
यह अमुमन सम्भव नहीं होता है. इसलिए प्रेम उपन्यासों और फिल्मों पर ना जाएँ. पुरूष और महिला की सेक्स आकांक्षाओं मे भिन्नता होती है. महिला एक बार चरमानंद प्राप्त करने के तुरंत बाद फिर से चरमानंद प्राप्त कर सकती है, जो पुरूष नहीं कर पाते. परंतु महिलाओं को ऐसी स्थिति में आने में समय लगता है. दूसरी तरफ पुरूष नैसर्गिक रूप से सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं. इसलिए यदि पुरूष चरमानंद प्राप्त कर लें तो फिर वे बाद में अपनी साथी को वह सुख दे सकते हैं.
कुछ विशेष तिथियों के दौरान असुरक्षित सेक्स भी सुरक्षित होता है
कई सेक्स विशेषज्ञों के कॉलमों में इस बारे में लिखा होता है. माहवारी के बाद की कुछ तिथियों के दौरान महिलाएँ गर्भधारण के लिए तैयार नहीं होती और उन तिथियों के दौरान सम्भोग करने से गर्भधारण की सम्भावना नहिवत होती है. हालाँकि इसमें आंशिक सच्चाई है, परंतु फिर भी यह हितावह नहीं है.
चुम्बन से एड्स हो सकता है
अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि चुम्बन के दौरान मूँह में जाने वाले सेल्विया की वजह से किसी को एड्स हुआ हो. एचआईवी ग्रसित व्यक्ति के साथ सम्भोग करने, मुख मैथुन में लिप्त होने, स्तन से दूध के मूँह में जाने आदि से एचआईवी संक्रमण होने के केस देखे गए हैं. परंतु यदि मूँह में छाले या घाव हों तो ऐसी स्थिति में चुम्बन से भी एचआईवी संक्रमण फैल सकता है.
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मैं सुंदर नहीं
यह एक प्रकार का डिसऑर्डर होता है जो आम तौर पर महिलाओं में देखा जाता है. महिलाओं में सेक्स के प्रति अरूचि पैदा हो जाती है क्योंकि उन्हे लगता है कि वे शारीरिक रूप से सुंदर नहीं है इसलिए उनके पति उनसे प्यार नहीं करेंगे. परन्तु वास्तविकता यह है कि युगल तब सेक्स में लिप्त होते हैं जब उन्हें इसकी आवश्यकता महसूस होती है और जब उन्हें इससे आनंद प्राप्त करने की सम्भावना दिखाई देती है. एक दूसरे के साथ रहते पति और पत्नी के लिए शारीरिक सुंदरता धीरे धीरे गौण होने लगती है.
शीघ्र स्खलन एक बिमारी है
यह डर पुरूषों में आम तौर पर पाया जाता है. एक सर्वे के अनुसार करीब 80% पुरूष महसूस करते हैं कि वे शीघ्र स्खलित हो जाते हैं. इसके पीछे की एक वजह पोर्न फिल्में भी हैं. परंतु सच्चाई यह है कि ऐसी फिल्में सम्पादित होती हैं और उनमें वही दिखाया जाता है जो दर्शक देखना चाहते हैं. शीघ्र स्खलन के पीछे कुछ शारीरिक कारण भी होते हैं परंतु आम तौर पर ऐसा हडबडी, अत्यधिक उत्तेजना और डर की वजह से होता है.

