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19वीं सदी के 7 महान अविष्कार

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steam-engine20वीं सदी और अब 21वीं सदी के दौरान कई बड़ी खोजें हुई और हो रही है. परंतु 19वीं सदी के दौरान जो खोजें की गई थी उससे हम आज भी लाभांवित हो रहे हैं और शायद होते भी रहेंगे. वस्तुत: 19वीं सदी में की गई कुछ खोजों ने सुनहरे भविष्य की नीवं रख दी थी. ऐसी ही 7 खोजें -


वाष्प लोकोमोटिव इंजिन
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वाष्प में कितनी ताकत होती है इसके बारे में ग्रीक और रोमन लोगों को काफी पहले से पता था. 17वीं सदी के दौरान प्रायोगिक तौर पर वाष्प इंजिन बनाया भी गया था. परंतु उसका व्यापारिक उपयोग 19वीं सदी में ही शुरू हुआ. तब वाष्प आधारित इंजिन की मदद से औद्योगिक क्रांति की शुरूआत हुई.

दूसरी तरफ 1829 में बाल्टिमोर एंड ओहियो रेलरोड ने अपने टोम थम्ब लोकोमोटिव का प्रदर्शन किया. इसी पीटर कूपर ने डिजाइन किया था. 19वीं सदी के मध्य तक लगभग आधे अमरीका उपखंड पर रेल लाइन बिछ गई थी और सैंकडो लोकोमोटिव इंजिन दौडने लगे थे. भाप आधारित इंजिन से चलने वाली ट्रेनों ने वाहन व्यवहार की रूपरेखा ही बदल थी. लोकोमोटिव इतने उपयोगी थे कि दुनिया के सभी देशों ने उसे अपना लिया. बाद मे डिज़ल और इलैक्ट्रिक इंजिन के आ जाने से लोकोमोटिव इंजिन की लोकप्रियता कम हो गई.



इलैक्ट्रिक टेलिग्राफ
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जब इसकी खोज की गई थी तब लोगों का तर्क था कि इसकी जरूरत ही क्या है? परंतु यह वह तकनीक थी जिसने द्वतीय विश्वयुद्ध के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यूरोप में कई वर्षो से इस तकनीक को विकसित करने का काम चल रहा था. परंतु वहाँ से दूर अमेरीका में सैमुअल मोर्स और उसके सहायक एल्फ्रेड वैल ने 1837 में इस तकनीक को विकसित कर लिया. दरअसल मोर्स कोड के विकास का असली श्रेय एल्फ्रेड वैल को दिया जाना चाहिए क्योंकि इसके पीछे उन्होनें ही सबसे अधिक मेहनत की थी. 1843 में अमेरीकी कांग्रेस ने पूरे देश में टेलिग्राफ लाइनें बिछाने का प्रस्ताव मंजूर किया. इसका लाभ लिंकन को गेटिसबर्ग के युद्ध के दौरान मिला. अब संदेश तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाए जाने लगे थे. भविष्य में टेलिफोन ने टेलिग्राफ की जगह ले ली.

 



टेलिफोन

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क्या टेलिफोन बिना की दुनिया की कल्पना की जा सकती है. ग्राहम बेल ने 1876 में अपने इलैक्ट्रिक टेलिग्राफ का पेटेंट कराया था और उन्हें ही टेलिफोन का आविष्कारक माना जाता है. हालाँकि टेलिफोन का अविष्कार वास्तव में किसने किया यह विवादास्पद है और शायद हमेशा रहेगा. क्या इस महान खोज का श्रेय मात्र ग्राहम बेल को दिया जाना चाहिए या जोहान रीज़, एंटानियो मेस्की, एलिज़ा ग्रे और थोमस एडिसन  को भी इसका श्रेय जाता है? इस सवाल का उत्तर देना कठिन है परन्तु इससे इस महान अविष्कार का महत्व कम नहीं होता. एक बार फिर सोचिए - दुनिया, टेलिफोन के बिना!

आधुनिक राईफल
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19वीं सदी में इस हथियार की खोज की गई थी यह सत्य नहीं है, परंतु इस दौरान इस हथियार का सही मायनों में "आधुनिक" रूपांतरण हुआ. इस हथियार का इस्तेमाल सदियों से होता आया था. परंतु पहले राईफल जैसी लगने वाली एक नली की बंदूक में आगे से बारूद भरा जाता था और फिर उसे दागा जाता था. उसकी क्षमता भी सीमित थी. परंतु 19वीं सदी के मध्य तक दुनली राईफल का विकास हो गया. इसके बाद कार्टिज़ की शोध की गई और इससे गन पावडर भरने का झंझट दूर हो गया. ब्रीच लोडिंग की खोज के बाद तो राईफल का उपयोग और भी सरल हो गया. अब राईफल में पीछे से गोलियाँ भरी जा सकती थी और उसका उपयोग सरल और दुर्घटना रहित हो गया था.


इलैक्ट्रिक बल्ब
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सोचिए बिजली नहीं होती तो आज का जमाना कैसा होता? बिजली या इलैक्ट्रिसिटी नहीं होती तो आज आप यह पढ भी नहीं पा रहे होते. 19वीं सदी की शुरूआत मे इलैक्ट्रिसिटी की खोज से भविष्य का जनजीवन पूरी तरह से बदलने वाला था. तब रोशनी के लिए केरोसिन आधारित लालटेन या गैस आधारित चिमनियों का उपयोग होता था. धीरे धीरे उनका स्थान इलैक्ट्रिक बल्ब ने ले लिया. जोसफ विल्सन स्वान ने 1860 में पहले "उपयोगी" इलैक्ट्रिक बल्ब का प्रदर्शन किया. परंतु वह विकास का पहला चरण ही था. परंतु इससे आग लगने का खतरा भी कम हो गया और इससे रोशनी भी अधिक होती थी. धीरे धीरे इस तकनीक का और विकास होने लगा और इलैक्ट्रिक बल्ब का महत्व कम हो गया. परंतु इलैक्ट्रिसिटी के बिना की दुनिया की कल्पना करना अब असम्भव हो चुका है.


फोटोग्राफी
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1840 से पहले लोग अपनी पोर्टेट बनाते थे. चित्रकार लोगों की तस्वीरें बनाए करते थे. हालाँकि यह चलन आगे भी जारी रहने वाला था परंतु तब फोटोग्राफी का अविष्कार हुआ और लोग आश्चर्यचकित रह गए. अब वे एक ऐसी छवि देख सकते थे जिसमें वे वैसे ही दिखते थे जैसे कि वे थे! पोर्ट्रेट बनाते समय हमेशा मुस्कुराने वाले लोगों ने देखा कि फोटोग्राफी उनके हर हावभाव को चित्रित कर सकती है वह भी काफी तेजी से. भविष्य में इस तकनीक का लगातार विकास होता रहा. इस बीच 1890 में मोशन कैमेरा तकनीक की भी खोज की गई और अब लोग चीजों को पर्दे पर हिलते डुलते देख सकते थे.


रूई छांटने वाली मशीन
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ऊपरोक्त अविष्कारों पर नजर डालने के बाद रूई छांटने वाली मशीन का उल्लेख कुछ अजीब लग सकता है. ऊपरोक्त 6 अविष्कारों ने दुनिया की दिशा ही बदल दी थी, परंतु क्या इस सूचि में रूई छांटने वाली मशीन का उल्लेख उचित है? शायद है. क्योंकि इस मशीन के अविष्कार ने लाखों लोगों की जिंदगियाँ बचाई थी. एली वाइट्नी की इस छोटी सी खोज ने कई लोगों को गुलामी से मुक्त किया. उस जमाने में बंधुआ मजदूर रूई की खेजी करने और छांटने का काम किया करते थे. उनका जीवन नर्क के समान था. परंतु इस मशीन के अविष्कार के बाद इन मजदूरों की जगह इस मशीन ने ली. क्योंकि यह मशीन 20 मजदूरों जितना काम अकेली कर लेती थी और इसलिए मजदूरों को रखना अव्यवारिक हो गया था. हाँ यह सच है कि इससे बेरोजगारी भी बढी और गृहयुद्ध की नौबत तक आ गई थी.
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