इस बहुचर्चित दुर्घटना को हुए 100 वर्ष बीत चुके हैं और इस पर आधारित कुछ फिल्में भी बन चुकी हैं, जिनमें से एक ने सफलता के झंडे गाड़ दिए थे. आरएमएस टाइटैनिक दुनिया की सबसे बड़ी यात्री जहाज थी. यह 10 अप्रैल 1912 को इंग्लैंड से न्यूयार्क के सफर पर निकली थी और चार दिन बाद एक बर्फ की चट्टान से टकराकर समुद्र में डूब गई. उसके साथ 1500 के करीब यात्रियों ने भी जलसमाधी ली.
इस भयंकर दुर्घटना की असली वजह क्या थी इस पर काफी शोध हुआ है और लगभग सभी यह मानते हैं कि टाइटैनिक दुर्घटना एक दुर्भाग्य की बात थी. टाइटैनिक के सामने एक बड़ी बर्फिली चट्टान आ गई थी और जहाज के क्रु के लिए जहाज को उससे बचाना असम्भव हो गया था. चट्टान से टकराते ही जहाज के पेन्दें में छेद हो गया और पानी भरने लगा और कुछ घटों बाद टाईटेनिक समुद्र में डूब गई.
परंतु शायद सच्चाई कुछ और ही हो. यह तो सच है कि टाइटैनिक बर्फ की चट्टान से टकराई थी, परंतु क्या वह मात्र एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी?
टाईटेनिक के सेकंड ऑफिसर चार्ल्स लाइटोलर टाईटेनिक दुर्घटना से बच निकलने वाले सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे. उन्होनें टाईटेनिक दुर्घटना की जाँच कर रहे अधिकारियों के समक्ष यही बयान दिया था कि टाईटेनिक दुर्घटनावश बर्फ की चट्टान से टकरा गई थी. परंतु शायद वे पूरी बात नहीं बता रहे थे. लाइटोलर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ छुपा रहे थे ताकि जहाज के नेविगेटर और निर्माता कम्पनी को बचा सकें.
अब लाइटोलर की पोती लुइस पैटन ने अपनी किताब में इन बातों का खुलासा किया है. पैटन के अनुसार टाईटेनिक की सच्चाई छुपा कर रखी गई ताकि लाइटोलर की प्रतिष्ठा को आँच ना आए.
क्या है सच्चाई?
पैटन के अनुसार उनके दादा लाइटोलर जानते थे कि टाईटेनिक मानवभूल से डूबी थी. टाईटेनिक को बर्फ की चट्टान से टकराने से बचाया जा सकता था परंतु स्टीयर्समैन रोबर्ट हिचीन ने घभराकर गलती कर दी थी. टाईटेनिक में दो स्टीयरिंग व्हील थे. एक व्हील को बायीं ओर घूमाने से जहाज चट्टान से दूर चला जाता. तब काफी समय भी था. परंतु हिचीन घभरा गए थे और उन्होनें गलत व्हील घुमाकर जहाज को चट्टान के और करीब ला दिया था. जहाज के कप्तान विलियम मर्डोक को जहाज के चट्टान से टकराने से 4 मिनट पहले यह पता चल गया था. उन्होनें जहाज को वापस सही दिशा में घुमाने की कोशिश भी की परंतु तब तक देर हो चुकी थी.
दूसरी भूल जहाज की मालिकाना कम्पनी व्हाईट स्टार लाइन के चैयरमेन जे. ब्रुश इसमेय ने की. जहाज के कप्तान ने उनसे आग्रह किया था कि वे जहाज को खड़ी रखने की अनुमति दे दें. परन्तु ब्रुश ने कहा था कि जहाज को हर हालत में चलाते रहो. यह भी गलती थी. यदि जहाज को खडा रखा जाता तो उसमें इतनी तेजी से पानी नहीं भरता और बचाव दल के आने तक जहाज डूबता नहीं और लोगों की जानें बच जाती.
जब जहाज में पानी भरने लगा था तब जहाज के अधिकारियों की हुई आपात बैठक में चार्ल्स लाइटोलर मौजूद थे और वहीं पर उन्हें इन सब बातों का पता चला था. परंतु उन्होनें बाद में इन सब बातों पर पर्दा डाल दिया था.

