दिल्ली उच्चन्यायालय ने कल एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए महिला सैन्य अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन लागू किए जाने की बात कही थी. महिलाओं के लिए 33% संसदीय आरक्षण की तैयारियों के बाद यह दूसरी बड़ी खुशी कही जा सकती है.
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इसके लिए 15 वर्षों का लम्बा इंतजार करना पड़ा. इसकी पहल दैवेगोड़ा सरकार ने की थी और यह बिल विभिन्न सरकारों और समितियों और चर्चाओं - बहसों से गुजरता हुआ आखिरकार राज्यसभा में पास हो गया. राज्यसभा में दो दिनों तक चले विरोध, शोर शराबे और हंगामे के बाद मुख्य विपक्षी दल भाजपा और वामपंथी दलों के समर्थन से सरकार इस विधेयक को पास कराने में सफल रही. विधयेक के पक्ष में 186 सदस्यों ने वोट दिया जबकि विरोध में केवल एक ही मत पडा.
तिब्बती लोगों ने कल लोसर मनाया. यह नए साल का जश्न है, लेकिन तिब्बती लोग अब इसे काफी सादगी से मनाते हैं. इस वर्ष उनके विस्थापन के 50 साल [लगभग] पूरे हो रहे हैं, और शायद यह उनके लिए एक और वजह है कि वे लोसर का आयोजन शांतिपूर्वक करना चाहते हों. आखिर 50 साल से तिब्बत की सरकार एक “विदेशी” देश में चल रही है. तिब्बत के विस्थापित निवासी आज भी “विदेशी” भूमि पर रह रहे हैं और निकट भविष्य में उनके स्वदेश लौटने की सम्भावना नहिवत है. Page 1 of 8