Sunday, Dec 21st

अंतिम अपडेट:05:24:29 AM IST

नाक-कान काटने की सज़ा

BBC Hindi

090913133004_yemeniwomenपाकिस्तान की एक अदालत ने दो व्यक्तियों के नाक और कान काटने की सज़ा सुनाई है.इन दोनों पर एक महिला के नाक-कान काटने के आरोप थे.

शेर मोहम्मद और अमानत नामक इन दोनों भाइयों ने 20 वर्षीय फ़ज़ीलत बीबी को अगवा किया.

फ़ज़ीलत ने जब इन दोनों में से एक से शादी करने से इंकार कर दिया तो दोनों ने फ़ज़ीलत के नाक-कान काट दिए थे.

इन दोनों पर फ़ज़ीलत को अगवा करने का आरोप सितंबर महीने में ही साबित हो चुका है. लाहौर में न्यायाधीश ने इन दोनों भाईयों पर दो हज़ार डॉलर का जुर्माना और आजीवन कारावास की सज़ा भी सुनाई है.

यह सज़ा सोमवार को सुनाई गई है और इसमें 1980 के इस्लामी क़ानून का हवाला दिया गया है. इससे पहले इस तरह की सजाओं पर अपील की गई है.

सरकारी वकील एहतिशाम कादिर ने कहा कि यह सज़ा इस्लामी क़ानून के सिद्धांत आँख के लिए आँख के आधार पर दी गई है.

कादिर ने बीबीसी से कहा, ‘‘ इन दोनों ने फ़ज़ीलत के गले में फंदा लगाया और फिर उसकी नाक और कान काट दिए.’’

उन्होंने बताया कि फ़ज़ीलत के मां बाप ने शेर मोहम्मद के साथ फ़ज़ीलत की शादी करने से इंकार किया था जिसके बाद फ़ज़ीलत को अगवा कर लिया गया.

इस मामले में तीन और लोगों की पुलिस को अभी भी तलाश है.

पाकिस्तान में 1980 के दशक में इस्लामी क़ानून लागू किए गए थे. बीबीसी संवाददाता एम इलियास खान का कहना है कि इस्लामी क़ानून के तहत कम ही लोगों को सज़ा दी जाती है.

पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता लगातार मांग करते रहे हैं कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हमलों को रोकने के लिए क़दम उठाए जाएं. हालांकि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस तरह की सज़ा दिए जाने का भी विरोध किया है.
BBC Hindi
BLOG COMMENTS POWERED BY DISQUS