आईपीएल के सर्वेसर्वा ललित मोदी आईपीएल के सीज़न-3 फाइनल के खत्म के होने से कुछ ही देर पहले अपना स्थान गँवा चुके थे. बीसीसीआई ने उनके पर कतर दिए और आईपीएल के कमीश्नर पद से उनको सस्पेंड कर दिया. यही नहीं मोदी ने बीसीसीआई के उपाध्यक्ष का पद भी खो दिया. इस तरह से ललित मोदी का "क्रिकेट" सफर एक तरह से कुछ दिनों के लिए ही सही परंतु समाप्त हो गया. उन्होनें जितनी तेजी से क्रिकेट जीवन में सफलता की सिढियाँ चढी थी, उतनी तेजी से वे फिर से जमीन पर आ गए.
मोदी का दाँव:
आईपीएल कोच्चि टीम विवाद को हवा देने के बाद मोदी स्वयं उसकी आग में फंस गए. इस विवाद में फंसे केन्द्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और उसके बाद आईपीएल और उसकी फ्रेंचाइजियों के दफ्तरों पर आयकर विभाग तथा अन्य एजेंसियों के छापे पड़ने लगे. तभी लगने लगा था कि ललित मोदी के ऊपर अब सिंकजा कसता जा रहा है और देर सवेर उनको भी जाना ही होगा. मोदी भी इस परिस्थिति को भाँप गए थे. इसलिए उन्होनें अपने आसपास दिवार खड़ी करनी शुरू कर दी थी. उन्होनें आईपीएल फ्रेंचाइजी धारकों को अपने पक्ष में करने की पूरजोर कोशिश की. वे रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मुकेश अम्बानी से एक ही दिन में दो बार मिले. इसके अलावा उन्होनें नामी गिरामी वकीलों से भी बैठकें की तथा कानूनी सलाह ली.
मोदी किसी भी तरह से आईपीएल के कमीश्नर और गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष पद पर बने रहना चाहते थे. उनके कार्यकाल के दो वर्ष अभी बाकी थे.
मोदी कहाँ फंस सकते हैं?
2004 में राजस्थान क्रिकेट एसोशिएअशन के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए उन्होनें घोटाला किया था. राजस्थान क्रिकेट एसोशिएशन का चुनाव वही व्यक्ति लड़ सकता था जो मूलत: राजस्थान से हो तथा कभी उसे सजा ना हुई हो. उन पर आरोप है कि उन्होनें नागौर जिला क्रिकेट एसोशिएशन के तत्कालीन सचिव की सहायता से 255 वर्ग एकड़ जमीन खरीदी. जिस दिन यह जमीन खरीदी गई तब वे नागौर में थे ही नहीं. कागजादों पर भी उनके जाली हस्ताक्षर किए गए.
उन पर एक और आरोप यह भी है कि उन्होनें अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ते समय यह बात छुपाई कि उनको सजा हो चुकी है. नियम के अनुसार सजा पा चुका कोई व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता. ललित मोदी को अमरीका के नोर्थ कैरोलिना में ड्रग और अपहरण केस में सजा हो चुकी है.
उन पर एक और यह आरोप लगा है कि उन्होनें तत्कालीन राजस्थान सरकार के मार्फत कुछ प्राचीन हवेलियाँ खरीदी और उनको हैरिटज होटल की शक्ल देनी शुरू की. जबकि वे हवेलियाँ सरकार के अधीन आती है और बेची नहीं जा सकती.
आईपीएल की परिकल्पना मोदी की ही थी. और उन पर अब आरोप लग रहे हैं कि कम से कम 3 आईपीएल टीमों में उनके नजदीकी रिश्तेदारों के पैसे लगे हैं. इसके अलावा प्रसारण कम्पनियों को ठेके देने में भी घोटाले होने के आरोप लगे हैं.
व्यापार में ज़ीरो - क्रिकेट में हीरो:
ललित मोदी के पास कभी अपने पिता केके मोदी के व्यापारिक साम्राज्य को आगे बढाने का विकल्प था. परंतु उन्होनें अपनी नई राह चुनी. 1990 के दशक में भारत में विदेशी मनोरंजन चैनलों का आगमन शुरू हो रहा था और मोदी ने इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए मोदी इंटरटेनमेंट नेटवर्क की स्थापना की. उन्होनें चैनल वितरण और मार्केटिंग का काम शुरू किया. वाल्ट डिज़नी के साथ गठबंधन कर वाल्ट डिजनी इंडिया कम्पनी बनाई जो वाल्ट डिज़नी के चैनलों का भारत में वितरण करने वाली थी. इसके अलावा उसके खेल चैनल इएसपीएन का वितरण भी मोदी की कम्पनी के जिम्मे आया.
एमईएन के पास डीडी स्पोर्टस और टेन स्पोर्ट्स के वितरण के अधिकार भी थे. परंतु एकमात्र ईएसपीएन को छोड़कर बाकी सभी वितरण कार्यों में कम्पनी को नुकसान हुआ. डीडी स्पोर्ट्स से लेकर डिज़्नी तक सभी ने एमईएन को अदालतों में घसीटा.
2007 में मोदी ने एक भ्रमण और लाइफस्टाइल चैनल वोएजेस शुरू करने की सोची. लेकिन यह चैनल कभी शुरू ना हो सका. मोदी की कम्पनी की आर्थिक हालत बद से बदतर हो रही थी. कर्मचारी छोड़कर जा रहे थे और उनको वेतन भी नहीं मिल रहा था.
एमइएन के अलावा मोदी गोडफ्रे फिलिप्स में निदेशक हैं, मोदी एंटरप्राइज में निदेशक हैं तथा आमेर हैरिटेज सिटी कंस्ट्रकशन लि. से भी जुड़े हुए हैं.
लेकिन 2004 में मोदी ने क्रिकेट की सवारी शुरू की और फिर पीछे मुडकर नहीं देखा. राजस्थान क्रिकेट एसोशिएशन का अध्यक्ष बनने के बाद से मोदी के कैरियर का ग्राफ तेजी से ऊपर आने लगा. वे बीसीसीआई के उपाध्यक्ष बने. आईसीएल की शुरूआती सफलता को भाँप कर उन्होने आईपीएल की परिकल्पना की और उसे सफल बनाया.
लेकिन वे थोड़े समय में ही बहुत कुछ हासिल कर लेना चाहते थे. यह तेजी उनके लिए घातक सिद्ध हुई.


