इलैक्ट्रोनिक और तकनीक के क्षैत्र में अग्रता हासिल करने के बाद जापान का इरादा अब ऐसे शहर बनाने की ओर है जहाँ कार्बन उत्सर्जन शून्य के करीब होगा. जापान ना केवल ऐसे शहर बनाएगा बल्कि अन्य देशों को "बेचेगा' भी.
जापान ने हाल ही में इस तरह के स्मार्ट शहर की परियोजना प्रस्तुत की. जापान के कम्बाइड एक्सीबिशन ऑफ एडवांस टेक्नोलोजीज़ यानी सीटेक प्रदर्शनी में एक बडे क्षैत्र में स्मार्ट सिटी का खाका प्रस्तुत किया गया. इसमें यह दिखाया गया कि वर्ष 2020 तक शहरी जीवन किस तरह का हो जाएगा. जापान की इस परियोजना में कार्बन उत्सर्जन को कम से कम रखने पर जोर दिया गया है.
इस तरह के स्मार्ट शहर में सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा का अधिकाधिक इस्तेमाल किया जाएगा. इन स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा को शहर के घरों, रास्तों और वाहनों में वितरित किया जाएगा. जाहिर है इस शहर में चलने वाले सभी वाहन बिना जैविक ईंधन के चलेंगे. सारे वाहन, घर और अन्य संसाधन स्मार्ट ग्रिड से जुडे होंगे जो उन्हें ऊर्जामय रखेंगे.
जापान ने टोक्यो के पास योकोहामा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट शुरू भी कर दिया है. 5 वर्ष के इस पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत जापान की 7 कम्पनियाँ जैसे कि निस्सान मोटर्स, पैनासोनिक, तोशिबा, टोक्यो इलैक्ट्रिक पावर, टोक्यो गैस कम्पनी और मिदेंशा कोर्प मिलकर एक छोटा शहर बनाएंगे जो बिल्कुल प्रदुषण मुक्त होगा. यह पूरा शहर स्मार्ट ग्रिड से जोडा जाएगा.
ऑस्ट्रेलिया ने भी न्यू साउथ वैल्स के शहर न्यूकैसल को स्मार्ट ग्रिड से जोडने का काम शुरू किया है और इसके लिए शुरूआती तौर पर 100 मिलियन डॉलर खर्च किए जा रहे हैं. दक्षिण कोरिया ऐसी ही एक परियोजना जेजु द्विप पर शुरू कर रहा है जिसकी लागत 200 मिलियन डॉलर तय की गई है. इस परियोजना के तहत 2030 तक देश के जैविक इंधन खपत को 3% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है. चीन इस तरह की परियोजना के पीछे 7.3 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है. मध्यपूर्व में अबु धाबी के पास ऐसा ही एक स्मार्ट शहर बन रहा है. भारत में गुजरात की राजधानी गांधीनगर के पास आकार ले रही गिफ्ट सिटी भी कुछ इसी तरह की परियोजना है.
इसके अलावा निजी कम्पनियाँ भी इस तरह की पहल कर रही हैं. टोयोटा जापान में टोयोटा स्मार्ट सेंटर बना रहा है. इस सेंटर में तरह तरह के विकल्पों का इस्तेमाल कर ऊर्जा तैयार की जाएगी. जैसे कि लोगों के चलने से, गाडियों के चलने से, कचरे से, खराब पानी से आदि. यहाँ के निवासी जब अपने गैजेटों का इस्तेमाल नहीं कर रहे होंगे तो वे स्वत: स्विच ऑफ हो जाएंगे ताकी ऊर्जा बचे.

