चमगादड़ों की इस प्रजाति के ऊपर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है. यह प्रजाति फ्लाइंग फोक्स के नाम से जानी जाती है और फलों को खाकर जीवन यापन करती है.
इस प्रजाति के नर चमगादड़ अपने-अपने हरम बना कर रखते हैं जहाँ उनकी पसंदीदा मादाएँ एक साथ रहती हैं. जर्मनी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की कि आखरी फ्लाइंग फोक्स चमगादड़ों की सेक्सुअल सफलता का राज़ क्या है? कैसे कुछ नर चमगादड़ अपेक्षाकृत अधिक मादाओं को आकर्षित कर पाते हैं जबकि कुछ नरों के पास एकाध मादा चमगादड़ ही होती है.
जर्मनी की अल्म विश्वविद्यालय के स्टेफन क्लोस के नैतृत्व में एक दल ने ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वैल्स में इन चमगादड़ों के कुछ दलों का अभ्यास किया. प्रत्यैक दल अथवा कॉलोनी में करीब 20000 चमगादड़ एक साथ रहते हैं. देखने में तो ऐसा ही लगता है मानो ये चमगादड़ छोटे छोटे समूहों में तितर बितर होकर रहते हैं. लेकिन ध्यान से देखा जाए तो पता चलता है कि प्रत्यैक नर चमगादड़ अपना एक विशेष इलाका घोषित करके रखता है जहाँ वह अपनी मादाओं के साथ रहता है.
किस नर के पास अधिक मादाएँ होंगी यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस नर के रक्त में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कितनी है. अधिक टेस्टोस्टेरोन की मात्रा वाले नर अधिक और पसंदीदा मादाओं को अपने हरम में रखते हैं. टेस्टोस्टेरोन पुरूषों का सेक्स हार्मोन होता है जो उत्तेजना को बढावा देता है. अधिक टेस्टोस्टेरोन की मात्रा वाला नर अधिक स्वस्थ और ताकतवर होता है. इससे वह अपने इलाके में दबदबा बनाकर रखता है और दूसरे नरों की अपेक्षा बड़े इलाके पर कब्जा कर लेता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार यही बात मादाओं को पसंद आती है. वे ऐसा नर चुनती हैं जिसका पास बड़ा इलाका हो और जो मजबूत हो. इसे देखकर वे उसकी ओर खींची चली आती है.
वैज्ञानिक अपने अभ्यास का इस्तेमाल इस प्रजाति के चमगादड़ों को बचाने के लिए करेंगे.


