कई महिलाएँ अपने जीवन पर्यंत बचपन में घटी कुछ अवांछित और दुखद यादों को भूला नहीं पाती है. इससे उनका आगे का जीवन कठीन बन जाता है. कई बार जीवन में ऐसी घटनाएँ घट जाती है जो व्यक्ति की भावनाओं पर गहरा असर छोड़ देती है और इससे उनका जीना दुभर हो जाता है. क्या ऐसी यादों को मिटाया जा सकता है?
यह किसी विज्ञान फिल्म का हिस्सा लग सकता है परंतु वह दिन अधिक दूर नहीं जब ऐसी तकनीक विकसित कर ली जाएगी जब किसी भी दुखद याद को हमारे दिमाग से हमेशा के लिए मिटा दिया जाना सम्भव होगा.
इसके लिए प्रयास जारी है और शुरूआती सफलता भी मिली है. जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि उनके प्रयोग सफल रहते हैं तो वे एक दिन ऐसी दवाई विकसित कर लेंगे जो बुरी यादों को मिटा देगी.
इस शोध से जुडे डॉ रिचर्ड ह्यूजनेर के अनुसार - जब कोई अवांछित घटना घटती है तो हमारा दिमाग उसे एक बुरी याद के रूप में संग्रहित कर लेता है और वह याद जीवन पर्यत हमें दुखी करती रहती है. इससे हमारा जीवन प्रभावित होता है.
इस शोध के लिए डॉ. रिचर्ड और उनके सहयोगी रोजर क्लेम ने दिमाग के एमीडाला क्षैत्र पर अपना ध्यान केन्द्रीत किया. यह क्षैत्र डर की भावना को संग्रहित रखता है. वैज्ञानिकों ने देखा कि जब कभी चूहों को तेज आवाज़ के आगे लाया जाता है तब उनके दिमाग के इस क्षैत्र के कोष अत्यधिक सक्रीय हो जाते हैं और यहाँ एक विशेष प्रोटीन का स्राव होना शुरू हो जाता है. ये प्रोटीन निकाले भी जा सकते हैं.
डॉ. रिचर्ड के अनुसार यदि ये प्रोटीन निकाल दिए जाएँ तो इसका असर दिमाग के उस क्षैत्र पर पडता है. तब इतना डर नहीं लगता और हो सकता है कि वह भावना ही जड से समाप्त हो जाए.
अभी इस तरह के प्रयोग चूहों पर किए गए हैं. इंसानों पर इस तरह के प्रयोग किए जाने बाकी हैं. परन्तु वैज्ञानिकों की टीम अपनी खोज को लेकर आश्वस्त है और मानती है कि यह प्रयोग इंसानों पर भी उतना ही सफल सिद्ध होगा.

