| न�? जमाने के पत�?रकार |
| समाज | |
| शनिवार , , 09 सितम्बर | |
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क�?छ मायनों में ग�?ज़रा ज़माना और आज का ज़माना दोनों बराबर है। कल जो पत�?रकारों की ईज�?जत होती थी वो आज भी है। यह बात और है कि आज भी पत�?रकारों से थोडी ऊ�?च-नीच हो जाती है आखिर पत�?रकार भी इनसान होते हैं। हम लोग अखबारों मे पत�?रकारों के सप�?ताहिक लेख पढने के इन�?तेज़ार मे रहते थे लेकिन आज के इलक�?ट�?रानिक पत�?राचार के य�?ग में हालत यह है कि �?क लेख अभी पढा नहीं कि �?क आध घंटे बाद नया लेख छप जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये कैसे पत�?रकार हैं जो हर आधे घंटे मे अपना ताज़ा लेख छाप देते हैं? तो जनाब ब�?लॉग लिखने वाले ब�?लॉगी क�?या पत�?रकारों से कम हैं?
ब�?लॉगिंग यानि चिट�?ठाकारी का शौख इतना बढ च�?का है कि अब बच�?चे भी कम�?प�?यूटर गेम�?स से उकता कर ब�?लॉग लिखने लगे हैं। मम�?मी डेडी से नाराज़ होकर अपने ब�?लॉग पर लिख दिया कि म�?�?े नये कपडे पहनने नहीं दि�?। फिर डेडी दफ�?तर मे बैठे अपने म�?न�?ने के ब�?लॉग पर टिप�?पणी भी लिखते हैं कि अब मान भी जाओ प�?त�?तर, अपनी मां का ग�?स�?सा म�?�? पर काहे उतार रहे हो? हालत यह है कि अगर मिया�? बीवी अपस मे बातचीत ना भी करें मगर �?क-दूसरे के ब�?लॉग�?स पर टिप�?पणी ज़रूर लिखेंगे - टेबल पर म�?न�?ने के स�?कूल की फीस रखी है, जाकर जमा कर देना, और हां मेरे ब�?लॉग पर त�?म�?हारी शॉपिंग लिस�?ट का लिंक नहीं ख�?ल रहा।
�?क-दूसरे के विचारों को सम�?ने के लि�? ब�?लॉग �?क नायाब चीज़ है। आइ�? इस नायाब तकनीक की सहायता से अपनी खूशी और गम आपस मे बांटें और ज़माने के भेदभाव को मिटाकर आपस मे इन�?सानियत पैदा करें।
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टिप्पणियाँ
(5)
"आज की पीढी के लि? ये ?क अनमोल तोहफा है।"
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"ज़माने के भेदभाव को मिटाकर आपस मे इन?सानियत पैदा करें।" बह?त बढिया तरीके से स?ंदर संदेश है. बधाई. report abuse
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हा हा. सास-बह? वाला मज़ेदार है. कहां कहा दिमाग़ लगाते हो, खूब.. ब?लॉग की महिमा भी मन को भायी
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श??ब भाई,
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सही लिखे हो..!! मतलब के बह?त ही सही..!! और इस लेख को पढ कर मजमून की तारीफ़ के साथ साथ ही ?क और बात की ख?शी ह?ई की क?छ ही महीनों में आपने अपनी हिन?दी काफ़ी मजबूत कर ली है. "लगे रहो श??ब भाई" report abuse
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