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न�? जमाने के पत�?रकार
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 3
बेकारअति उत्तम 
समाज
शनिवार , , 09 सितम्बर

  श�?�?ब द�?वारा


क�?छ मायनों में ग�?ज़रा ज़माना और आज का ज़माना दोनों बराबर है। कल जो पत�?रकारों की ईज�?जत होती थी वो आज भी है। यह बात और है कि आज भी पत�?रकारों से थोडी ऊ�?च-नीच हो जाती है आखिर पत�?रकार भी इनसान होते हैं। हम लोग अखबारों मे पत�?रकारों के सप�?ताहिक लेख पढने के इन�?तेज़ार मे रहते थे लेकिन आज के इलक�?ट�?रानिक पत�?राचार के य�?ग में हालत यह है कि �?क लेख अभी पढा नहीं कि �?क आध घंटे बाद नया लेख छप जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये कैसे पत�?रकार हैं जो हर आधे घंटे मे अपना ताज़ा लेख छाप देते हैं? तो जनाब ब�?लॉग लिखने वाले ब�?लॉगी क�?या पत�?रकारों से कम हैं? 

 

ब�?लॉगिंग यानि चिट�?ठाकारी का शौख इतना बढ च�?का है कि अब बच�?चे भी कम�?प�?यूटर गेम�?स से उकता कर ब�?लॉग लिखने लगे हैं। मम�?मी डेडी से नाराज़ होकर अपने ब�?लॉग पर लिख दिया कि म�?�?े नये कपडे पहनने नहीं दि�?। फिर डेडी दफ�?तर मे बैठे अपने म�?न�?ने के ब�?लॉग पर टिप�?पणी भी लिखते हैं कि अब मान भी जाओ प�?त�?तर, अपनी मां का ग�?स�?सा म�?�? पर काहे उतार रहे हो?

हालत यह है कि अगर मिया�? बीवी अपस मे बातचीत ना भी करें मगर �?क-दूसरे के ब�?लॉग�?स पर टिप�?पणी ज़रूर लिखेंगे - टेबल पर म�?न�?ने के स�?कूल की फीस रखी है, जाकर जमा कर देना, और हां मेरे ब�?लॉग पर त�?म�?हारी शॉपिंग लिस�?ट का लिंक नहीं ख�?ल रहा।


सास और बहू
Anonymous की तरह �?क दूसरे के ब�?लॉग पर टिप�?पणी करके अपनी भडास निकाल रहे हैं - बहू की टिप�?पणीः देख लिजि�?गा कल दोपहर आपके खाने मे बाल ही बाल होंगे - और दूसरी तरफ सास का इस टिप�?पणी पर जवाबः अरी डायन म�?�?े पता है कि त�? मेरी बहू की कोई सहेली होगी।


उधर द�?कानदार भी अपनी द�?कान के कम�?प�?यूटर से ब�?लॉग लिख
रहा है। ग�?राहकी की तरह टिप�?पणीयों के इन�?तज़ार में है। लोग टेलिफोन कि बजा�? उसके ब�?लॉग पर आकर पूछते हैं कि टमाटर क�?या भाव है?


यानी आने वाले दिनों मे आन-लाइन शॉपिंग भी ब�?लॉग से होगी
? अब ये बताना कठिन है के ब�?लॉग मे क�?या नही है - हर ताज़ा खबर अखबारों से पहले हमे ब�?लॉग पर मिल जाती है, सिर�?फ सर�?च इन�?जन में खोजने की देर है। �?सा भी हो सकता है कि अखबार और टीवी चैनल वाले ताज़ा खबरों के लि�? ब�?लॉग छानते होंगे जैसे अखबारी दफ�?तरों मे दूसरे अखबारों के आर�?टिकल�?स पर कैंची चलती है। आज मानना पडता है हमें कि इन चिट�?ठों की वजह से हमे द�?निया भर की खबरों का लगातार पता चल रहा है। कहते हैं इन�?टरनेट की वजह से द�?निया �?क छोटे गा�?व की तरह हो गई है और अब ब�?लॉग के आने से यूं महसूस होता है कि मानो हम सब �?क ही गली मौहल�?ले मे रहते हैं और हमारा �?क-दूसरे के घर आना जाना है।


ब�?लॉग की वजह से आज हर कोई अपने मौहल�?ले की �?क छोटी सी खबर को भी प�?री
द�?निया मे चर�?चित करवाता है। और तो और अपने घर के �?गडों को स�?ल�?ाने के लि�? द�?सरों से राय भी मांगता है। वैसे तो ब�?लॉग पर कई लेख लिखे जा च�?के हैं और इस कमाल की चीज़ का परिचय करने की भी ज़रूरत नहीं रही है। आज की पीढी के लि�? ये �?क अनमोल तोहफा है।


किसी ज़माने
मे यदि अखबार मे किसीका लेख छप जाता था तो बह�?त बडी बात हो जाती थी और आज हर कोई अपनी बात इन�?टरनेट पर छाप सकता है। ब�?लॉग से द�?निया वालों को अपने विचार बताओ और दूसरे क�?या चाहते हैं उनके विचार जानो!


�?क-दूसरे के विचारों को सम�?ने के लि�? ब�?लॉग �?क नायाब चीज़ है। आइ�?
इस नायाब तकनीक की सहायता से अपनी खूशी और गम आपस मे बांटें और ज़माने के भेदभाव को मिटाकर आपस मे इन�?सानियत पैदा करें।
टिप्पणियाँ (5)add
न? जमाने के
द्वारा प्रेषित डा प?रभात ट , सितम्बर 09, 2006
बात तो त?म बडे पते की कह रहे हो, श??ब?।
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ब?लॉग-?क ना
द्वारा प्रेषित समीर लाल , सितम्बर 09, 2006
"आज की पीढी के लि? ये ?क अनमोल तोहफा है।"
"ज़माने के भेदभाव को मिटाकर आपस मे इन?सानियत पैदा करें।"


बह?त बढिया तरीके से स?ंदर संदेश है. बधाई.


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http://neerajdiwan.wordpress.c
द्वारा प्रेषित नीरज दीवान , सितम्बर 11, 2006
हा हा. सास-बह? वाला मज़ेदार है. कहां कहा दिमाग़ लगाते हो, खूब.. ब?लॉग की महिमा भी मन को भायी
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...
द्वारा प्रेषित http://vijaywadnere.blogspot.c , सितम्बर 12, 2006
श??ब भाई,

सही लिखे हो..!! मतलब के बह?त ही सही..!!

और इस लेख को पढ कर मजमून की तारीफ़ के साथ साथ ही ?क और बात की ख?शी ह?ई की क?छ ही महीनों में आपने अपनी हिन?दी काफ़ी मजबूत कर ली है.

"लगे रहो श??ब भाई"

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Online journalism
द्वारा प्रेषित Veena , जनवरी 17, 2007
Ya i think blogging is very common now a days & it's part of free journalism....we can share...any news...any where..any time...GOOD
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