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विज�?ञापन और महिला�?�?
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 3
बेकारअति उत्तम 
द्वारा/by : पंकज बेंगाणी   
सोमवार , , 30 अक्टूबर

 

विज�?ञापनों की द�?निया में महिलाओं का इस�?तेमाल जिस तरह से किया जाता है, यह हमेंशा से �?क विवादीत प�?रकरण रहा है. लोगों ने इसे तरह तरह के नाम भी दि�? हैं. क�?छ लोग इसे "सेक�?स�?अल �?क�?सप�?लो�?टेशन" भी कहते हैं. हो सकता है हमेंशा यह सही ना भी हो, पर कभी कभी यह सही भी लगता है.

मैने कई �?से विज�?ञापन देखें हैं, जिसमें वस�?त�?तः महिला पात�?र की कोई आवश�?यक�?ता ही ना हो, पर कहीं ना कहीं उन�?हे जबरद�?स�?ती डाला जाता है.

कभी प�?रूष पात�?र को अपनी बाइक महिला जैसी लगती है. कभी शराब बनाने वाली �?क कम�?पनी के विज�?ञापन में प�?रूष मोडल को बोतल में महिला जलपरी के रूप में दिखती है. और �?क उदाहरण 7Up का है. जिसमें मल�?लिका शेरावत ही अंत में बोतल बन जाती है. यानि आप को अहसास हो कि जब आप 7Up की बोतल को छ�?�?�? तो किसे याद करें.

अब नीचे दि�? ग�? विज�?ञापन देखि�? और इन पर अपनी राय दिजी�?:

"नोवा शीन" का विज�?ञापन। इसमें �?क गर�?भवती महिला पात�?र के माध�?यम से यह बताया गया कि यह पेय बिल�?क�?ल भी अल�?कोलिक नहीं है। तथा गर�?भवती महिला के लि�? भी स�?रक�?षित है।


 

ह�?ंडेई मोटर�?स का विज�?ञापन। �?क अर�?धनग�?न य�?वती की जांघो पर नई कार टकशन का टेट�? लगाया गया। सन�?देश: ख�?बस�?रत पर मजब�?त


 

प�?रूषों की पत�?रिका "शे" का विज�?ञापन। टेगलाइन : हमेंशा बेहतर द�?निया का ख�?वाब देखि�?


 

मेरा मत:

महिला पात�?रों का तथा उनके विशिष�?ट ग�?णधर�?मों का उपयोग सन�?देश पह�?�?चाने के लि�? या विज�?ञापन के लि�? उपयोग करना ठीक है परंत�? तभी तक जब तक वो अश�?लील ना लगे। यह निर�?भर करता है कि निर�?माता कम�?पनी, उसके क�?रि�?टीव डायरेक�?टर, उत�?पादक कम�?पनी और साथ ही उस महिला मोडल पर भी कि वो इस तरह के विज�?ञापनों के लि�? क�?या सोचते है। यह विज�?ञापन दाता कम�?पनीयों तथा उपभोक�?ताओं के विवेक पर भी निर�?भर करता है कि उनके लि�? अश�?लीलता के क�?या मायने और मापदंड हैं। हकीकत यही है कि महिला�?�? "हॉट सेलिंग" मानी जाती है, और यह प�?रमाणिक भी है।

मेरी रेटिंग:

विज�?ञापन 1 : 7 / 10

विज�?ञापन 2 : 8 / 10

विज�?ञापन 3 : 3 / 10

 

टिप्पणियाँ (3)add
सही च?नाव क
द्वारा प्रेषित Pratik Pandey , अक्टूबर 30, 2006
अश?लीलता जैसी कोई चीज़ नहीं होती है। हर व?यक?ति का नज़रिया ही अश?लीलता को तय करता है। किसी की देह अगर आकर?षक है, तो विज?ञापनों में दिखाने में क?या दिक़?क़त है? लेकिन अगर इसे व?यापक अर?थ में देखा जा?, तो बात बस इतनी सी ही नहीं है। विज?ञापनों में नारि-देह का इस?तेमाल उपभोक?तावादी संस?कृति का ही ?क अंग है। फिर या तो इस उपभोक?तावाद को पूरी तरह स?वीकार किया जा सकता है, या फिर पूरी तरह नकारा जा सकता है। लेकिन भारत जैसे म?ल?क में हम बीच में फ?से ह?? हैं, इसलि? श?लीलता-अश?लीलता के मापदंड तय कर पाना हमारे लि? म?श?किल हो रहा है। अब वक़?त आ गया है कि हमें यह तय कर लेना चाहि? हम किस खेमे में हैं। हमें पूरी तरह इसे स?वीकार कर लेना चाहि?, नहीं तो पूरी तरह इससे बाहर निकल जाना चाहि?।
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च?नाव
द्वारा प्रेषित समीर लाल , अक्टूबर 30, 2006
बेवजह किया गया अंग प?रदर?शन अश?लिलता की श?रेणी में आयेगा, यह तो तय है किन?त? किसके लिये बेवजह. विज?ञापनकर?ता अगर इसके माध?यम से लोगों का ध?यान आकर?षित करने में सफल हो जाता है तो वजह तो जायज कहलाई.

बाकी तो प?रतीक भाई कह ही च?के हैं कि अब वक़?त आ गया है कि हमें यह तय कर लेना चाहि? हम किस खेमे में हैं।
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उदासीनता
द्वारा प्रेषित bhuvnesh , नवम्बर 01, 2006
?क तरफ़ तो हम लोग कहते हैं कि ये सब अश?लील है पर यदि ये हमारी नजर में वाकई अश?लील है तो हम इसका विरोध भी नहीं करते। इस प?रकार की उदासीनता से ही ये चीजें उत?पन?न हो रही हैं। यदि हमें वाकई विरोध नहीं करना है तो इनको स?वीकार कर लें। निर?णय हमें ही लेना है।
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