| श�?री मृगेश शाह से बातचीत |
| द्वारा/by : अफलात�?न देसाई [अतिथि] | |
| सोमवार , , 06 नवम्बर | |
मृगेश शाह का www.readgujarati.com १,३३००० लोगों द�?वारा देखा जा च�?का है.औसतन ६००-७०० लोग रोज इस स�?थल पर पह�?ंचते हैं.'प�?स�?तक परिचय' और 'साहित�?य विभाग' नामक दो चिट�?ठे मूल स�?थल से ज�?डे हैं.'साहित�?य-विभाग' ३,०००,०० लोग देख च�?के हैं.मृगेश मानते हैं कि प�?रतिष�?ठित साहित�?यकारों की रचनाओं तथा ग�?जराती प�?रेमियों की व�?यक�?तिगत चर�?चा की कारण इतनी पाठक संख�?या हो सकी है.'रीड ग�?जराती' के बारे में लगभग सभी ग�?जराती अखबारों और लोकप�?रिय पत�?रिकाओं में लेख छपे हैं.
मृगेश शाह से अफलात�?न देसाई की बात-चीत:
१. ग�?जराती में ब�?लोग�?स की श�?र�?आत , प�?रसार और अभी की हालत पर संक�?षिप�?त टिप�?पणी करें.संख�?या का अन�?मान दें. ग�?जराती में सर�?वप�?रथम ब�?लॊग www.forsv.com/guju है. इसके पहले कोई ब�?लॊग रहा हो �?सी जानकारी नहीं है.यह चिट�?ठा अमेरिका में रहने वाले �?क कम�?प�?यूटर वैज�?ञानिक द�?वारा चलाया जाता है.वर�?षों से वे भी काफी अच�?छा काम कर रहे हैं.उनके चिट�?ठे पर खासतौर पर काव�?य,रास-गरबा स�?न�?दर होता है. तमाम ग�?जराती चिट�?ठों का प�?रसार 'मित�?र-मंडलियों' और 'सर�?च इन�?जिनों' द�?वारा ह�?आ है.ग�?जराती सूचना-तकनीक के क�?षेत�?र में अच�?छी संख�?या मे हैं तथा कविता,गज़ल और साहित�?य का शौक आम है,इस से ही चिट�?ठों की स�?विधा का प�?रयोग करने की लोगों को प�?रेरणा मिली है,साथ- साथ निजी शौक की सृजनात�?मक अभिव�?यक�?ति भी हो जाती है.
पिछले �?क साल में ग�?जराती चिट�?ठों की संख�?या बह�?त बढी है,उससे पहले तीन-चार सक�?रीय चिट�?ठे थे. अब करीब तीस चिट�?ठे हैं.
२.फिलहाल , ज�?यादातर ग�?जराती ब�?लोग�?स व�?यक�?तिगत शेरो-शायरी और साहित�?य पर ही हैं. ज�?ञान-विज�?ञान, राजनीति, सामयिक घटनाक�?रम, खेल कूद आदि पर कम हैं.इन विषयों पर ब�?लोगिंग बढे-इसके लि�? क�?या कोई सामूहिक या व�?यक�?तिगत प�?रयास हो रहे हैं ?
आप की बात सही है.अभी ज�?यादातर ग�?जराती चिट�?ठे काव�?य,गज़ल और साहित�?य-केन�?द�?रित ही हैं. 'कलरव' नामक �?क चिट�?ठा बच�?चों के लि�? है तथा 'ग�?जराती सारस�?वत परिचय' नामक ग�?जराती चिट�?ठे में ग�?जराती के साहित�?यकारों की जीवनियों की �?लकियां देखी जा सकती हैं.चन�?द चिट�?ठों को छोड ज�?यादातर साहित�?य-केन�?द�?रित चिट�?ठे हैं. राजनीति, सामयिक सामाजिक घटनाओं पर आधारित चिट�?ठे दिखाई नहीं पडते. इसका कारण यह हो सकता है कि उन�?हें रोज नयी प�?रविष�?टियों से ताजा रखना होगा, जो नही हो पाता. आमतौर पर चिट�?ठेबाजी सरलता से चलने वाली शौकिया वृत�?ति है इसलि�? पेशे या व�?यावसायिक व�?यस�?तता वाले लोग रोज-ब-रोज 'अपडेट' करने वाले विषय सहजता से च�?नते ही नहीं.इसके बावजूद अब क�?छ ग�?जराती मंच और समूह संजाल पर गठित हो रहे हैं,यह ख�?शी की बात है.
३.आपके ब�?लोग की पाठक संख�?या बह�?त अच�?छी है.इसके लि�? क�?या उपाय कि�? -कि इतनी पाठक संख�?या हो गयी?' रीड ग�?जराती' की सफलता की कहानी संक�?षेप में बतायें.
सबसे पहले यह स�?पष�?ट कर दूं कि www.readgujarati.com का स�?वरूप चिट�?ठे का नहीं, वेबसाइट का है. साहित�?य और प�?स�?तक चर�?चा के लि�? मैंने चिट�?ठों का उपयोग किया है क�?योंकि उससे जालस�?थल का गठन सरल हो जाता है तथा फ़ीड का लोग उपयोग कर पाते हैं.इस लि�? मेरे द�?वारा ब�?लॊग�?स का उपयोग वेबसाइट की मदद में किया जा रहा है.
हां, 'रीड ग�?जराती' की की भारी पठक संख�?या को मैं ईश�?वर की कृपा मानता हूं.�?क कारण यह भी है कि साहित�?यिक लेखों वाले चिट�?ठे या वेबसाइट नहीं है तथा प�?रसिद�?ध ग�?जराती लेखकों की कहानियां और निबन�?ध पढने को मिलते हों और नियमित तौर पर मिलते हों �?सा अन�?य कोई जालस�?थल नहीं है.
रीडग�?जराती ने ज�?यादातर ग�?जराती अखबारों और पत�?रिकाओं का ध�?यान खींचा है.पाठक अपने मित�?रों और स�?वजनों को भी इसके बारे में बताते हैं.इसकी भारी पाठक संख�?या साइट की पब�?लिसिटी के कारण नहीं है अपित�? साहित�?य में लोगों की ऋचि के कारण है.फ़िर यह पाठक संख�?या अचानक नहीं ह�?ई है,�?क साल की अवधि में धीरे धीरे लोग इसके बारे में जानने लगे.उत�?तम साहित�?य पढने की उत�?कट इच�?छा परदेश में रहने वालों को होती है इसलि�? ज�?यादा तादात में वे प�?रवासी ग�?जराती इस जालस�?थल पर आते हैं.
४.भारतीय भाषाओं में ब�?लोगिंग के भविष�?य के बारे में आप क�?या सोचते हैं ?
भारतीय भाषाओं में ब�?लोग काफ़ी विकसित ह�?�? हैं.उनमें हिन�?दी की व�?याप�?ति के कारण अगणित ब�?लॊग बने हैं , यह आनन�?द की बात है.इससे हमारा साहित�?य टिकेगा और दूर के लोगों के लि�? भी लोकोपयोगी बन पडता है. इसलि�? यह इन�?टरनेट का सद�?पयोग ही माना जा�?गा.चिट�?ठे सतत नई प�?रविष�?टियों से ताजे रखे जां�?,विविध विषयों का समावेश करें तो अधिक उपयोगी होंगे.ब�?लोगिंग अच�?छी वृत�?ति है लेकिन इसके साथ यह ध�?यान रखा जा�? कि उत�?तम सामग�?री परोसी जा रही है.यह मनोरंजन का साधन न बने, ज�?ञान प�?राप�?ति का श�?रेष�?ठ साधन बने.
[साभार: अन�?प श�?क�?ला, अफलात�?न देसाई]
Set as favorite
Bookmark
Email This
टिप्पणियाँ
(11)
really great for you and good news for readgujarati.com.
Votes: +0
thanks mrugeshbhai,congratulations !!!!! report abuse
vote down
vote up
ई-कारान?त शब?दों के बह?वचन में हमेशा दीर?घ ई हृस?व इ हो जाता है.जैसे टिप?पणी - टिप?पणियां , लेखनी - लेखनियां , गली - गलियां .
Votes: +0
report abuse
vote down
vote up
सागर चन?द नाहरजी ने अनूप के चिट?ठे पर 'रीड ग?जराती' का जिक?र किया था - सनद रहे.
Votes: +0
report abuse
vote down
vote up
Thanks Aflatun Desai and TARAKASH.COM for taking note of readgujarati.com and so of Mr. Mrugesh.
Votes: +0
Smthing very good. We are proud of readgujarati.com. report abuse
vote down
vote up
ब?िया साक?षात?कार!
Votes: +0
ग?जराती में सर?वप?रथम ब?लॊग www.forsv.com/guju है...वर?षों से वे भी काफी अच?छा काम कर रहे हैं मेरे विचार से "कर रही हैं" ज़?यादा उपय?क?त होगा। report abuse
vote down
vote up
धन?यवाद अफ़लातून जी और बेंगानी बंधू
Votes: +0
इतने अच?छे साक?षात?कार के लिये। अगर मैं गलत नहीं हू? तो रीड ग?जराती का हिन?दी चिठ?ठा जगत से परिचय मैने ही करवाया है। report abuse
vote down
vote up
रीडग?जराती की लोकप?रियता के बारे में जानकर अच?छा लगा। भारतीय भाषाओं का गौरव ?से ही ब?ता रहे।
Votes: +0
report abuse
vote down
vote up
|