| गयाना यात�?रा की डायरी से >> भाग 2 |
| भ्रमण | |
| द्वारा/by : स�?निल दीपक | |
| सोमवार , , 27 नवम्बर | |
|
घर लकड़ी का था, ड�?डों पर टिका ह�?आ. यहा�? का सारा इलाका दलदलों से भरा था, �?से में पानी, कीड़ों और अन�?य जंत�?ओं से बचने के लि�? सभी घर �?से ही ड�?डों पर बनाये जाते हैं. मैं सबसे आगे था, सी�?िया�? च�?ने लगा तो पीछे से ग�?लोरिया बोली, "ध�?यान से कदम रखना." सी�?ी पर पहला कदम रखते ही ग�?लोरिया की चेतावनी का कारण सम�? में आ गया. लकड़ी कई जगह से गली ह�?ई थी. पा�?व रखो तो लगता था कि अभी टूट जायेगी.
ऊपर घर में स�?पष�?ट था कि उस घरवाले गरीबी से जू�? रहे थे. स�?टूल ले कर बैठने लगा तो फ़िर से ग�?लोरिया बोली, "ध�?यान से, वहा�? नहीं बैठो, इधर आ जाओ". नीचे देखा तो पाया कि जहा�? स�?टूल रखने की सोच रहा था उस हिस�?से की लकड़ी टूटी ह�?ई थी और नीचे की घास दिखाई दे रही थी.
�?से ही किसी घर में रहने वाली जेनिफ़र से पहले ही मिल च�?का था. स�?कूल में प�?ाती थी जेनिफर और घर के फर�?श की लकड़ी टूट जाने से नीचे गिर जाने पर उसकी री�? की हड�?डी टूट गयी थी. मन में क�?छ डर सा आ गया. कैसे रह सकता है कोई इस तरह के घर में? और जो छोटे बच�?चे इधर उधर बाग खेल रहे थे, उनके से कोई नीचे गिर गया तो?
गृहस�?वामिनी ने प�?लेट में आम काट कर सामने रखे और कहा कि उनके घर के थे और बह�?त मीठे थे. उन�?हीं से बहाना मिल गया म�?�?े, बोला कि बाग के पेड़ देखना चाहता हू�?, और हम सब लोग नीचे आ गये.
घर के सामने �?क नहर थी. चारों ओर हरियाली थी. घर के पीछे आम, कटहल और केले के पेड़ लगे थे. अच�?छा बाग है आप का, मैंने कहा. गृहस�?वामिनी म�?स�?क�?रा दी, "हा�?, अच�?छा भी है, और लम�?बा भी. करीब दो किलोमीटर तक चलते जाओ, वहा�? तक कहने को हमारा ही बाग है."
बह�?त अचरज ह�?आ. इतना गरीब परिवार और इतना बड़ा बाग? करीब पा�?च मीटर चौड़ा और दो किलोमीटर लम�?बा? ग�?लोरिया ने सम�?ाया कि यह कोई विषेश बात नहीं है. गयाना में ज़मीन की कमी नहीं है और लम�?बे बाग का कारण यहा�? की नहरें हैं. सारा क�?षेत�?र पहले दलदल ही था. हा�?लैंड वालों के जमाने में यहा�? चार चार किलोमीटर की दूरी पर दलदलों का इलाज करने के लि�? नहरें बनवायी गयीं. नहरों से दलदलों के पानी को निकालने का रास�?ता मिला, और ख�?दाई से दलदलों को भरने की मिट�?टी भी मिली. नहरों के साथ साथ सीधी रेखा में लोगों ने घर बनाये, पर नहरों के बीच की ज़मीन खाली ही रह गयी. यानि आप के घर के सामने नहर, और पीछे अगली नहर तक खाली जगह क�?योंकि आप के पीछेवालों का घर, अगली नहर के किनारे बना होगा. उसी खाली जगह को आप अपना बाग कह सकते हैं.
इतना बड़ा देश और करीब करीब खाली ही है. देश के आठ लाख के क�?छ कम नागरिक अतला�?तिक महासागर के सामने सम�?द�?र तट से पा�?च किलोमीटर की पट�?टी के भीतर ही रहते हैं. कहते हें कि जितने गयाना वासी अपने देश में रहते हें उससे द�?गने देश के बाहर अमरीका, केनाडा, इण�?लैंड आदि में रहते हैं. जारी....
Set as favorite
Bookmark
Email This
टिप्पणियाँ
(1)
|
|