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ये टेक्सी ड्राइवर!
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 1
बेकारअति उत्तम 
हास्य व्यंग्य
मंगलवार , , 28 नवम्बर

 

  श�?�?ब द�?वारा


क�?या आपका कभी टैक�?सी ड�?राईवरों से �?गड़ा ह�?आ है ? विश�?व के सभी देशों में, हर शहर में टैक�?सी ड�?रायवरों के साथ �?गडा �?क मामूली बात है, मगर कभी कभी ये मामूली सी बात जान लेवा भी हो सकती है। हम लोग अमूमन दिन मे �?क बार या सप�?ताह मे कम से कम दो बार इन बेचारे टैक�?सी ड�?रायवरों से ज़रूर �?गडा करते हैं (इनमें वो लोग शामिल नही हैं जिनके पास ख�?द की गाड़ी है).

 

�?क टैक�?सी मे दिन भर में तकरीबन पचास-सौ लोग तो ज़रूर यात�?रा करते होंगे और हर कोई �?क जैसा नही होता. ये टैक�?सी ड�?राईवर भी "जैसा यात�?री-वैसी ड�?राईव" जैसे होते हैं कभी ख�?शी से मान जाते हैं , कभी ईमान�?दार बन जाते हैं तो कभी यात�?री को गलत रास�?ते पर भी ले जाते हैं और अगर विदेशी यात�?री बैठा हो तो टैक�?सी का मीटर दिल की धडकन से भी तेज़ दौड़ता है। 

 

 

 ये ईमानदार होते हैं!

 

चंद लोगों का खयाल है कि ये टैक�?सी ड�?रायवर तो बडे बेईमान और मक�?कार होते हैं, जो कि बिलक�?ल गलत है। कौन ईमानदार है ? हर जगह अच�?छे और ब�?रे दोनो तरह के लोग होते हैं , सिर�?फ चंद गलत किस�?म के टैक�?सी ड�?राईवरों की वजह से बाकी सबको गलत कहना यह हमारी नादानी होगी। अब आप ही देखि�? बेचारे टैक�?सी ड�?रायवर अपनी ईमानदारी का सबूत देने के लि�? कितने बेकरार रहते हैं कि कब कोई यात�?री अपना सामान टैक�?सी मे भूल जा�? और कब यात�?री का सामान ज�?यों का त�?यों थाना आकर प�?लिस के हवाले करके अपनी ईमान�?दरारी का सबूत पेश करे। इस तरह टैक�?सी ड�?राईवर का फोटो अखबार मे छप जाता है, "ईमानदार टैक�?सी ड�?राईवर टाइटल के साथ. 

 

 

ये बेहद सहनशील होते हैं!

 

टैक�?सी ड�?राईवर, भी इनसान हैं हमारे समाज का �?क हिस�?सा हैं , हमारी ज़रूरतों पर काम आने वाले होते हैं. हम जहां बोलते हैं वहां ले जाते हैं. यह अलग बात है कि कभी अपने मूड के हिसाब से चलाते हैं मगर ये बेचारे टैक�?सी ड�?राईवर समाज के हर टाईप के लोगों को बरदाश�?त करते नही थकते. अभी बंगाली फैमिली से छ�?टकारा मिला तो उसके पीछे सरदारजी च�? बैठे,अरे नहीं...यार उधर घ�?माने के लि�? बोला....उई मां म�?�?े तो वहां पीछे उतरना था.....यहां से म�?डने को मैं ने कब कहा ?.  सरदारजी उतरे तो तभी तमिल-अंकल च�? बैठे - चिल�?ला चिल�?ला कर बेचारे ड�?राईवर के कान फाड डाले,अय�?यो हम त�?मको ये राईट मे नाई लफ�?ट मे घ�?सने को बोला जी. हमारा मद�?रास मे टैक�?सी ड�?राईवर बहूत अच�?छा जिधर बोलेगा उधर म�?डेगा। तमिलनाड के अंकल को उतार कर ड�?राईवर ने सर दर�?द की गोली ली की तभी ग�?जरात की मोटी तगडी मेडम बड़ी-सी शॉपिंग बैग उठा�? ड�?राईवर के बराबर �?से बैठी की गाडी ही �?�?क गई,चलो भैया जल�?दी चलो , �? सी चालू करो , बह�?त गंदी बदबू है त�?म�?हारी टैक�?सी मे - साफ सफाई क�?यों नही करते ?. फिर मेडम अपने मोबाईल पर चटाख चटाख ग�?जराती मे श�?रू. (ड�?राईवर का सर दर�?द और बढा दिया) फोन पर ज़ोर ज़ोर से बातें और साथ मे चिप�?स खाते ह�?�? ड�?राईवर को इशारा कर बोली,लो भैया त�?म भी खाओ। ड�?राईवर का दिल कर रहा था कि वो मेडम को खा ले मगर बेचारा अपने दांत चबाते रह गया। दिन भर इन बेचारों का हर किस�?म के लोगों से पाला पडता है। यात�?री कहता है और तेज़ चलाओ वक�?त निकला जा रहा है और जब ड�?राईवर अपनी टैक�?सी को तेज़ भगाता है, और �?क�?सीडेंट कर बैठता है। फिर यात�?री फरार ड�?राईवर बेचारा सप�?ताह भर के लि�? अंदर। 

 

 

पर क�?छ ड�?रायवर �?से भी होते हैं!

 

देखने मे आता है कि अक�?सर टैक�?सी ड�?राईवर लालची, बदमाश , निकम�?मे और चोर दिखाई देते हैं। यात�?रियों से �?सा बरताव करते हैं कि जैसे ये उन पर �?हसान कर रहे हों। यात�?री को जहां जाना होता है वहां ये ड�?राईवर जाते नही बल�?कि इन�?हें जहां जाना होता है उसी तरफ का यात�?री ढूं�?ते हैं। यहां तक कि मरीज़ को अस�?पताल ले जाना हो , उस से भी डबल भाड़ा मांगते हैं। अब तो शहरों मे टैक�?सी की कई कम�?पनियां आ च�?की हैं , �?क कम�?पनी यूनियन हडताल पर हो तो दूसरी टैक�?सी कम�?पनी को चांदी निकल पडती है। पर जो हडताल पर होते हैं उनकी जेब मे फूटी कोडी नही होती , रात को अपने बच�?चों के लि�? क�?या लेकर जा�?ं? लेकिन ये भी उनके लि�? फ़र�?ज़ बनता है कि यूनियन जैसा बोले वैसा करो। 

 

 

क�?यों होते हैं �?गड़े?

 

वर�?षों से टैक�?सी दौड़ाते बेचारे ड�?राईवर स�?बह ये सोच कर अपने घर से निकलते हैं कि आज का दिन इनके लि�? अच�?छा रहेगा और रात तक अपनी पत�?नी और बच�?चों के लि�? खाने का बन�?दोबस�?त हो जा�?गा, मां के लि�? दवाई और घर का किराया सबका इंतज़ाम भी हो जा�?गा। फिर सड़क पर अपनी टैक�?सी लेकर निकला तो रात तक पूरा दिन वैसा ही ग�?ज़रता है जैसा पिछले दिन ग�?जरा था। हर किस�?म के लोगों को उनकी मंज़िलों तक पह�?ंचाना , लोगों से गाली स�?नना और ग�?स�?से मे दूसरों को गाली देना - टैक�?सी मे बैठने वालों के द�?ःख स�?ख स�?नना। छोटी छोटी बात पर इन बेचारों को प�?लिस पकड़ कर ले जाती और ये कोर�?ट कचहरी का म�?ंह देख-देख आदी हो जाते हैं जैसे ये उनका दूसरा घर हो। पूरे दिन भर की थकान लि�? घर आ�? तो फिर पत�?नी के ताने-बाने - ये सारी बातें बेचारे टैक�?सी ड�?राईवरों के अंदर चिड़चिड़ाहट पैदा कर देती है। अब अमीर बाप के बेटा तो टैक�?सी चला�?गा नहीं, टैक�?सी ड�?राईवर अक�?सर गरीब होते हैं जो हमें आधी रात को भी हमारी मंज़िल तक पह�?ंचाते हैं। इनकी चिड़चिड़ाहट को देख कर पैसेंजर को ज़रूर ग�?स�?सा आता है मगर इस पैसेंजर को पता नही होता कि उस से पहले जो पैसेंजर बैठा था उसने सिर�?फ दो चार र�?पयों के लि�? ड�?राईवर का मूड ही खराब कर दिया था। हम भी पेट पूजा के लि�? कमाते हैं और टैक�?सी ड�?रायवर भी, ज़रूरत है आपस मे �?गडा करने कि बजा�? हम �?क दूसरे की ज़रूरतों को सम�?ें. खाली गाडी घूमाने की जगह धूप मे बस के इंतजार मे खडे इनसान को थोडा आगे तक ड�?राप कर दे तो सच�?ची ख�?शी क�?या है ख�?द-ब-ख�?द महसूस होगी।

टिप्पणियाँ (3)add
www.musipubs.blogspot.com
द्वारा प्रेषित umesh patil , नवम्बर 29, 2006
I don't travel by taxi.
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...
द्वारा प्रेषित सागर चन?द न , नवम्बर 30, 2006
टैक?सी ड?राईवरों की पीड़ा का बह?त स?न?दर वर?णन किया आपने। साधूवाद
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woh chor hotey hai
द्वारा प्रेषित rani , जनवरी 02, 2007
woh humse hamesha jyada rupe letey hai or humesha lambe rastey se lejatey hai
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