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कविता
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द्वारा/by : रचना बजाज
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शनिवार , , 20 जनवरी |
 | देश है प�?कारता, स�?न लो उसकी आह त�?म देश की जरूरतों पर डालो �?क निगाह त�?म योग�?य हो परिपक�?व हो शक�?ति हो अथाह त�?म सबको ही उम�?मीद है करोगे पूरी चाह त�?म
जवा�? भी हो सबल भी हो क�?यू�? रहे कराह त�?म? स�?वजन त�?म�?हारे भोगते मत करो ग�?नाह त�?म
भटकते क�?यू�? दिशाविहिन? पकडो नेक राह त�?म ज�?ञान का सागर यहा�? है जानो उसकी थाह त�?म
मत बिगाडो जिन�?दगी मान लो सलाह त�?म जो चाहता त�?म�?हे उसे दिल मे दो पनाह त�?म
देश है प�?कारता, स�?न लो उसकी आह त�?म देश की जरूरतों पर डालो �?क निगाह त�?म. |
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