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दो बातें
हास्य व्यंग्य
बुधवार , , 21 फ़रवरी

 

दो बातें

मैं जब बहुत छोटी थी तब मैं और मेरे भाई बहिन हमेशा शाम को बैठकर नये-नये किस्से-कहानियाँ सुनने की जिद किया करते थे उनमें बहुत किस्से ऐसे होते थे जो हमें उस वक्त याद होते थे पर बाद में भूल जाया करते थे और फिर से कोई उन्हीं किस्सों को सुनाता तो लगता इन किस्सों से हमारी मुलाकात पहले भी कहीं हुई है, पर कहाँ? याद नहीं आता था। दिन पंख लगाकर उड़ते गये और मैं उन्हीं पखों पर सवार होकर,अपनी धरती से दूर, परदेस में आ बसी पर कहीं, मेरे दिल के कोने में वो बचपन की यादें आज भी वैसे ही ज़िन्दा हैं जैसे कि सच्चा प्यार, सच्ची दोस्ती हमेशा ज़िन्दा रहती है।

 

 

उन किस्सों मे से एक किस्सा मैं आपको भी सुनाती हूँ जो मैं आज तक नहीं भूली। हुआ यूँ कि एक मेज़र साहब थे उनको आर्मी से बहुत प्यार था, उन्होंने अनेक लडाईयाँ देश के लिए लड़ीं, अनेक मैडल उनको मिले। जब मेज़र साहब का बेटा बड़ा हुआ तो उनका इकलौता अरमान मन में हिचकोले खाने लगा कि वह अपने बेटे को भी आर्मी ही ज्वाइन करायेंगे पर उनके साहब जादे को आर्मी-वार्मी में कोई दिलचस्पी नहीं थी, पर अपने पिता को इन्कार का मतलब उनके क्रोध का भाजन बनना था, जिसको सोचते ही उनकी रूह काँप जाती थी।

 

 

अब वो समय आखिरकार आ ही गया जब उनके पिताश्री उनको आर्मी में सलैक्शन के लिये ले गये 'अब मरता क्या न करता'  बेटे साहब को भी जाना ही पड़ा, अब उनसे इन्टरव्यू के समय पहला सवाल दागा गया, ठीक उसी तरह, जिस तरह दुश्मन को देखते ही किसी भी देश के जवान गोली दाग दिया करते हैं। खैर, पूछा गया  कि- "आप आर्मी क्यों ज्वाईन करना चाहते हैं? साहबजादे ने कहा- "मैं वो मैं तो..  मैं तो…. नहीं  करना चाहता परन्तु मैं अपने पिताजी की इच्छा से यहां आया हूँ क्योंकि उनका अरमान है कि मैं आर्मी ज्वाइन करूँ। " क्यों?" आर्मी आफिसर ने पूछा वह बोला कि- "मेरे पिताजी खुद एक आर्मी आफिसर हैं।"

 

 

अच्छा क्या नाम है आपके पिताजी का? नाम बताने पर आफिसर चौंका और बोला अच्छा तो तुम उनके बेटे हो वो तो हमारी आर्मी की शान हैं। इतने बड़े, इतने जोशिले आदमी के बेटे होकर तुम आर्मी में क्यों नहीं जाना चाहते? क्या डरते हो?  "नहीं डरता तो नहीं पर एक बात है जो मुझे हमेशा रोक देती है।" आफिसर ने पूछा? अच्छा तो फिर वो बात बता दो जो तुम्हें आर्मी में आने से रोकती है?  वो बोला- अगर मैं आर्मीं में सलेक्ट हो गया तो दो बातें होंगी, या तो आप मुझे सीमा पर भेज़ देगें या फिर किसी शहर में, अगर शहर में भेज़ दिया तो कोई बात नहीं, पर सीमा पर भेज़ दिया तो फिर दो बातें होंगी, या तो सीमा पर वार होगी, या नहीं होगी, अगर वार नहीं हुई तो कोई बात नहीं, पर अगर वार हुई तो फिर दो बातें होंगी, वार में या तो दुश्मन को मारूँगा या खुद मारा जाऊँगा, दुश्मन को मारूँगा तो कोई बात नहीं, पर खुद मारा जाऊँगा तो फिर दो बातें होंगी, या तो मेरी बॉडी नहीं मिलेगी या फिर मिलेगी, अगर मेरी बॉडी नहीं मिलेगी, तो कोई बात नहीं पर अगर मिली तो फिर दो बातें होंगी, या तो मेरी बॉडी की पहचान होगी या फिर नहीं होगी, पहचान होगी तो कोई बात नहीं पर अगर पहचान ना हुई तो फिर दो बातें होंगी, या तो मुझे जलाया जायेगा या फिर दफनाया जायेगा, अगर ज़लाया गया तो कोई बात नहीं, पर अगर दफनाया गया तो फिर दो बातें होंगी, या तो मेरी कब्र पर पेड़ उगेगा या फिर नहीं उगेगा पर अगर उगा तो फिर दो बातें होंगी या तो वो पेड़ आम का उगेगा या फिर सरसों का, अगर आम का उगा तो कोई बात नहीं पर अगर सरसों का उगा तो फिर दो बातें होंगी या तो सरसों का तेल बनाया जायेगा या फिर नहीं बनाया जायेगा अगर तेल नहीं बनाया गया तो कोई बात नहीं पर अगर बनाया गया तो फिर दो बातें होंगी, या तो तेल खाने के काम में लाया जायेगा या फिर साबुन बनाने के काम में लाया जायेगा, खाने के काम में लाया गया तो कोई बात नहीं पर अगर साबुन के काम में लाया गया तो फिर दो बातें होंगी, या तो वो साबुन नहाने का बनेगा या फिर कपड़े धोने का बनेगा अगर कपड़े धोने का बना तो कोई बात नहीं पर नहाने का बना तो फिर दो बातें होंगी, या तो वो जैन्ट्स साबुन होगा या फिर लेडीज़ साबुन होगा अगर जैन्ट्स साबुन होगा तो कोई बात नहीं पर अगर लेडीज़ साबुन होगा तो बहुत बड़ी बात होगी क्योंकि जब कोई लेडी उससे नहायेगी तो मुझे बहुत शर्म आयेगी।

 

 

अब आप खुद ही समझ सकते हैं कि उस आर्मी आफिसर कि क्या हालत हुई होगी? और क्या आप लोगों की? वो तो आपकी प्रतिक्रियाएं ही बता पायेंगी और अगर आपकी प्रतिक्रियाएं आईं तो मैं प्रेरित होऊँगी नही आईं तो फिर दो बातें होगीं  या तो मैं अपनी लेखनी यानि "की-बोर्ड" को गुस्से में तोड़ दूँगी या फिर नहीं तोडूँगी, अगर नहीं तोडूँगी तो कोई बात नहीं, पर अगर तोड दिया तो फिर दो बातें होंगी, या तो मैं उसको कूडेदान में डाल दूँगी या फिर नहीं डालूँगी, नहीं डालूँगी तो कोई बात नहीं पर डाल दूँगी तो फिर दो बातें होंगी या तो उसको रबिश वाली लॉरी उठाकर ले जायेगी या नहीं ले जायेगी,  नहीं ले जायेगी तो कोई बात नहीं, पर ले गई तो फिर दो बातें होंगी, या तो उसको वो गड्ढे में डाल देगी या नहीं डालेगी, गड्ढे में डाल देगी तो कोई बात नहीं, पर गड्ढे में नहीं डालेगी, तो फिर दो बातें होंगी या तो वो सड़क पर लगे कूड़े के अम्बार पर डालेगी, या फिर नहीं डालेगी, नहीं डालेगी तो कोई बात नहीं, पर डालेगी तो, फिर दो बातें होंगी या तो उसको गाय खायेगी या फिर भैंस खायेगी, गाय खायेगी तो कोई बात नहीं, पर भैंस खायेगी तो बहुत बुरी बात होगी क्योंकि भैंस उन अक्षरों को पढ़ जायेगी तो फिर दुनिया की उस कहावत का क्या होगा? कि- "काला अक्षर भैंस बराबर"? अब ये कहावत बन्द हो जायेगी, बन्द हो गयी तो फिर दो बातें होंगी, या तो नयी कहावत बनेगी या नहीं बनेगी, बनेगी तो कोई बात नहीं, नहीं बनी तो फिर दो बातें होंगी, या तो लोग मेरे ऊपर दावा करेंगे, या नहीं करेंगे, नहीं करेंगे तो कोई बात नहीं, करेंगे तो फिर दो बातें होंगी, या तो लोग भूख हडताल पर बैठेगें, या नहीं बैठेंगे, नहीं बैठेंगे तो कोई बात नहीं, बैठेगें तो फिर दो बातें होंगी, या तो उनका परिवार भूख को बर्दाश्त कर लेगा, या नहीं करेगा, कर लेगा तो कोई बात नहीं, नहीं करेगा, तो फिर दो बातें होंगी, या तो वो परिवार मर जायेगा, या नहीं मरेगा, नहीं मरेगा तो कोई बात नहीं, मर जायेगा तो उसके जिम्मेदार आप होंगे मैं नहीं।  

 

 

 

 

 

टिप्पणियाँ (25)add
दो बातें
द्वारा प्रेषित समीर लाल , फ़रवरी 21, 2007
हमें तो लगा था इसे पढ़ कर दो बातें होंगी-या तो अच्छा लगेगा या बेकार. मगर पढ़कर एक ही बात हुई: अच्छा लगा. smilies/smiley.gif
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...
द्वारा प्रेषित सागर जैन , फ़रवरी 22, 2007
वाह डॉ साहिबा
बहुत खूब, भाई आप अपना की बोर्ड मत तोड़िये, लीजिये हम टिपिया देते हैं। अब तो खुश ना। उस परिवार को भी कह दीजियेगा कि भूख हड़ताल ना करे। smilies/smiley.gif
शानदार प्रस्तुति।
॥दस्तक॥
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बहुत खूब !!
द्वारा प्रेषित from: लावण्या :) , फ़रवरी 22, 2007
" दो बातेँ" " बेबाक " व " बेखौफ " कह डालीँ डो. साहिबा आपने !!
बहुत खूब !! लिखती रहियेगा तो दो बातेइँ होँगीँ -
१ आप लिखती रहेँगीँ और २ हमेँ हँसातीँ रहेँगीँ !!
अगले लेख की प्रतीक्षा मेँ ..
स ~ स्नेह,
लावण्या smilies/smiley.gif
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Loved It
द्वारा प्रेषित Kanu , फ़रवरी 22, 2007
Dr.Bhawna ji, Aapke to hum pahle se hi fan the ab to inti saari do baaten padhkar A.C ban gaye. smilies/cheesy.gif
Well Done
Keep it up
Agli do baaton ka intazaar. smilies/smiley.gif
~Kanu~
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बाल-बाल बचे!!!
द्वारा प्रेषित डॉ० संजय , फ़रवरी 23, 2007
डॉ० भावना जी आपका लेख मेरे लिये बहुत फायदेमन्द रहा। मेरा बेटा जो बहुत शर्मीला है आर्मी में जाना चाहता था, परन्तु मेरी इच्छा उसको डॉ० बनाने की थी ताकि मेरे बाद कोई तो मेरे क्लीनिक को सँभाल सके तभी मैंने आपका लेख अपने बेटे को सुनाया तो उसने आर्मी जाने से साफ इन्कार कर दिया आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो लेख लिखकर मेरी इच्छाओं पर पानी फिरने से बचा लिया। अब तो एक ही बात होगी कि मेरा बेटा डॉ० ही बनेगा!!! smilies/shocked.gif :- smilies/cry.gif
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bahut majedar
द्वारा प्रेषित vibha , फ़रवरी 23, 2007
vaha kaya bat ha pahle to golgol ghum gaye par ant men to haste haste pait men dard ho gaya bahut khub kaya bat ha!! smilies/cheesy.gif
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Sabun Fisla, BhaiNs hansi, Nazar fisli , LaDki fansi./'Habeeb'
द्वारा प्रेषित Roop Hans 'Habeeb'/u.s.a , फ़रवरी 23, 2007
Bhavana ji, ab samajh aaye ki sabun ki tikiya hath se kayon fisalti hai aur pakaDne par fir hath se fisal jati hai , mujhe lagta hai ki sabun meN jo yeh fisalne ka asar hai vo kabar ki aaNkh vali mitti ka hoga jo kuchh dekhane ki chah men fisalta hi jata hai. smilies/grin.gif smilies/grin.gif/ dekha ,aapne kaha tha ki main hansta nahin hun . Gustakhi muaaf karen .
aapki yeh rachna acchi hai. Aur haN BhaiNs ko paDne se rokiye kahiN vo meri baat na samajh jay, verna vo bhi HANS padegi. Aur HaN shukria story batane ka ab main bhi fouz men hi bharti hunga ;Shayeri karne se to kuchh hansil na hua, sabun ban kar to hoga hi.Roop Hans 'Habeeb'
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लो जी बात हो गईं दोनों
द्वारा प्रेषित राकेश खंडेलवाल , फ़रवरी 23, 2007
लेख आपका पढ़ा, लेखनी बोल उठी दो बातें होंगी
लिखे टिप्पणी या तो कोई, या फिर कोई गीत लिखेगी
गीत लिखा तो संख्याओं में एक इज़ाफ़ा हो जायेगा
लिखी टिप्पणी अगर, आप फिर सुन्दर नूतन लेख लिखेंगीं

इसीलिये अब गीत नहीं, मैं सिर्फ़ टिप्पणी लिखने आया
धन्यवाद,सुन्दर लेखन ने अधरों पर मुस्कान जगाई
अब दो बात, रहें चुप या फिर, फिर से अपनी कलम चलायें
सिर्फ़ चलायें कलम, ह्रदय से अब बस ये आवाज़ें आईं

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kafi accha hasya
द्वारा प्रेषित narendra , फ़रवरी 24, 2007
kafi accha hasya kissa likha, mene isme hassya ras ka bharpur anand liya, isse to baat ho gayagi ya tho mere maan ko santushti milegi ya phir nahhi milengi, mil gayi to thik agar nahi milengi to tho phir tho baat hogi ya tho aapko aur hassy raas ke aur kissey likkne padge ya phir aap nahi liknegi, aur muje pata hei ki aap jaroor se bhejangi. isse muje bada accha lagega.
dhanyavad
lage rahiya lage rahiya ....aur bhejeta rah
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शुक्रिया
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , फ़रवरी 27, 2007
समीर अच्छा हुआ एक ही बात हुई वरना तो ये 'क्रम' कभी बन्द ही न होता। शुक्रिया पसन्द करने के लिये।
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खुशी बड़ी मँहगी हो गयी है!!
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , फ़रवरी 27, 2007
सागर जी आभारी हूँ कि आपने मुझे दो भयंकर 'नुकसान' होने से बचा लिया। आपका मैसेज़ भी उस परिवार को पहुँचा दिया है वो भी बार-बार आपका धन्यवाद कर रहे थे और जल्द ही आपसे मिलने के इच्छुक भी हैं, आपने जो मुझे खुशी दी उसके लिये बार-बार धन्यवाद क्योंकि खुशी आसानी से नहीं मिलती बड़ी मँहगी हो गयी है। धन्यवाद एक बार फिर से।
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शुक्रिया
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , फ़रवरी 27, 2007
लावन्या जी और कनु बहुत-बहुत शुक्रिया की आपको हमारा लेख पसन्द आया कोशिश रहेगी आगे भी आप लोगों को हँसाने की। smilies/smiley.gif
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शुक्रिया
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , फ़रवरी 27, 2007
डॉ० संजय जी खुशी हुई कि मैं आपके लिये कोई काम आसान कर सकी। बहुत-बहुत शुक्रिया।
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धन्यवाद
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , फ़रवरी 27, 2007
विभा और हबीब जी आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद लेख को पसन्द करने के लिये। प्रयास जारी रहेगा आगे भी लिखने का। धन्यवाद।
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आप लोगों का स्नेह !!
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , फ़रवरी 27, 2007
राकेश जी आपकी कवितामयी टिप्पणी सदा की तरह बहुत खुशी दे गयी। आप लोगों का स्नेह मिलता रहा तो लेखनी जरूर चलती रहेगी और आपकी टिप्पणियों को पाकर प्रसन्नता का भी भरपूर मिलेगी। धन्यवाद दाद के लिये।
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शुक्रिया
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , फ़रवरी 27, 2007
नरेन्द्र जी आपकी प्रतिक्रिया देखकर अच्छा लगता है कि आप साहित्य से दूर होते हु्ए भी उससे जुड़े रहते हैं और ओर भी जुड़ना चाहते हैं अच्छा लगता है जानकर। शुक्रिया आपको लेख पसन्द आया।
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माफ करना
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , फ़रवरी 27, 2007
माफ करना समीर जी जल्द बाजी में "जी" छूट गया बहुत शर्मीन्दा हूँ। कोई ठीक कर सके तो खुशी होगी। smilies/sad.gif
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मजा आ गया...
द्वारा प्रेषित गिरिराज जोशी "कविराज" , मार्च 02, 2007
आपका यह आलेख पढ़कर दो बाते हो रही हैं... एक तो मैं हँस रहा हूँ और दूसरा टिप्पणी क्या लिखूँ, यह सोच रहा हूँ smilies/grin.gif

गिरिराज जोशी "कविराज"
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ये भी खूब रही
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna , मार्च 03, 2007
गिरिराज जी ये भी खूब रही चलिये आप हँसे तो स्वास्थ्य में वृद्धि तो हुई। धन्यवाद।
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hello bitia
द्वारा प्रेषित roop hans habeeb , मई 13, 2007


Sab se pahle aikgeet ki aayaten,

Itani bhari barsaat men, ye dil kayon dhadarkata hai.? "Habeeb'
mera naya geet. hai. aur bhi bahut hain , par aapse mujhe sikawa hai aap ne aaj talak meri aik gazal ya geet apne forum par nahin diaa . kaya narazagi hai ya main is kabil hanin hun? 'Habeeb' Main agale hafate INDIA aa raha hun . busssy samaya hai lekin itna bhi nahin ki doston ko mil na paoon .batana. mera phone hai 740-382-1540. DElhi utrunga./'Roop Hans 'Habeeb' U.S.A
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...
द्वारा प्रेषित ankur jain , दिसम्बर 04, 2007
Are bhai yeh do baatein to hum bachpan main sunaya karte the.aaj bade hokar bhi yehi do baatien sun ni pad rahi hai.really boaring.
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achchhi kahani thi
द्वारा प्रेषित raj jain , मई 15, 2008
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achchhi kahani thi...................................
द्वारा प्रेषित raj jain , मई 15, 2008
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acha hai,,,,,,,,,,,,,,,,,
द्वारा प्रेषित Reema Dogra , मई 27, 2008
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Nakal
द्वारा प्रेषित A kumar(Kerwa) , जून 21, 2008
Dr Sahiba apne sahi likha hai ki apne ye khani bachpan mai suni thi kyonki ye khani maine apne school ke annual magajine me 1995 me padhi thi vaise kosis acchi thi.
Ummeed karta hoo ki aap agli bar kuch apne aap likhar hume dikhanyegi.
Dhanyavad smilies/wink.gif
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