"मीरा की भक्ति को जानों,
दूर्गा की शक्ति पहचानो,
कर लो तुम नारि अभिनन्दन!"
"माँ का तुमने मोल न जाना,
पत्नी को अबला ही माना,
अब समझो बेटी का गुन्जन!"
आओ अब प्रायश्चित कर लो,
तुम उसके अब पीछे चल लो,
निर्मल कर लो अपना तन -मन्!!"
भारतीय नारी.......
इसकी बेटी, उसकी पत्नी, बच्चों की माँ मै कहलाई,
कभी खुद से जानी जाऊँगी, इस आशा मे जीती आई!
हर युग मे बलशाली नर ने अपनी ही बातें मनवाईं,
जिस नर को मैने जन्म दिया, उसकी ही बनी मै परछाई!
राणा के राज मे मीरा बन, प्याले मे जहर पीती आई,
द्रौपदी, उमा या फिर सीता, हर रूप मे दुख सहती आई!
हर तरह के कर्म किये मैने, फिर भी अबला ही कहलाई,
हर तरह के जुल्म सहे मैने, कभी न आँखें छलकाईं!
बेटे का जब- जब जन्म हुआ, हर घर मे खुशियाँ लहराईं,
बेटी का भूण परीक्षण कर, कोख मे हत्या करवाई!
इतना जानो! नारि से ही, इस दुनिया मे रौनक आई,
नारी जो गुम हुई जग से, फिर मानो कि शामत आई!!