| बहता नाला, नाले में जहर |
| मंतव्य | |
| शुक्रवार , , 13 अप्रेल | |
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भगवान को भी भ्रम होता होगा. भ्रम की वो सबसे बडा है और उसने प्रकृति की रचना की है. उसने मनुष्य को दुनिया का सबसे समझदार जानवर बनाया है, और मानव ने हर जगह अपनी जानवर बुद्धि का प्रदर्शन किया है. फिर उसने खुद के और टुकडे किए और खुद को सुन्नी और शिया में, अगडे और पिछ्डे में, ठाकुर और दलित में, प्रोटेस्टंट और केथोलिक में बाँट लिया. और फिर खुद ही खुद से लड बैठा. खुद ही लहुलुहान हो गया. और यह सब किसके लिए? इसका जवाब भी तो नही है इस मानव के पास.
भगवान ने भी क्या चीज बनाई है, मानव के रूप में; या मानव ने भी क्या चीज गढी है, भगवान के रूप में!
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टिप्पणियाँ
(11)
वाक़ई बढ़िया लिखा है। वे लोग भ्रमित हैं जो सोचते हैं कि किसी "वाद" या चिंतन-प्रणाली से आमूल क्रांति सम्भव है। क्रांति का आरम्भ तो विचार-प्रणालियों से परे जाना है। जो विचारों से बंधे हैं वे सिर्फ़ कोलाहल में वृद्धि कर रहे हैं और समस्या को और जटिल बना रहे हैं।
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Pratik Pandey,
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हाँ बात सही है मित्र, कुछ लोगों को पता नही चलता कि वे भी किसी विशेष वाद के अधीन हो चुके हैं. ये लोग सम्मोहन की स्थिति में हैं और जडवत हैं. report abuse
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बहुत सही लेख। ऊपर बैठा ईश्वर/खुदा भी सोचता होगा, कि क्यों ये इन्सान बनाया? जो 'अपनो' के लिए अपने जैसे इन्सान से लड़ता है। शायद लड़ना ही इसकी प्रवत्ति तो नही। दरअसल यही सच है, हम जानवर से इन्सान तो बन गए, लेकिन मानसिक विकास नही हो सका। हम जानवर थे, है और (अभी के हाल को देखते हुए लगता है कि) भविष्य मे भी रहेंगे। हम आज भी छोटी छोटी बातों के लिए खून बहाने मे हिचकिचाते नही, क्यों है ऐसा?
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भगवान ने भी क्या चीज बनाई है, मानव के रूप में; या मानव ने भी क्या चीज गढी है, भगवान के रूप में!
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क्या खूब बात कही है पंकज report abuse
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जीतुजी,
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बात सही है, इंसान अभी तक नाम का इंसान है, वस्तुतः अभी जानवर अवस्था से उपर नही उठा है. तरुणजी, धन्यवाद report abuse
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ये पंकज बैंगाणी ने ही लिखा है.....?
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सच है इन्सान अभी जानवर ही है, बिना नुकसान पहुँचाये तो जानवर भी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता!! इन्सान तो उनसे भी गया गुजरा है। report abuse
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अतुल शर्मा जी ,
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इतनी समझ होती तो पंगेबाजी क्यों करते, इतनी समझ होती तो बजारू क्यों बनते और मौहल्ले कस्बे में क्यों अटक जाते. report abuse
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