Tarakash.com, Hindi News, india news, entertainment, Hindi site, Hindi website, Hindi portal, तरकश - Hindi Information and Entertainment Portal

200 अरब के पार, विदेशी मुद्रा भन्डार
मंतव्य
बुधवार , , 18 अप्रेल

 गत शनिवार के The Economic Times मुख पृष्ठ पर खबर थी कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 200 अरब डॉलर को पार चुका है.

आपको ज्ञात होगा कि 2003 में पहली बार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 100 अरब डॉलर तक पहुँचा था, और इन चार साल में बढकर दुगना हो गया है.

हाँलाकि अभी भी भारत विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में विश्व की बढ रही अर्थव्यवस्थाओं में सातवें नम्बर पर आता है. चीन निसन्देह भारत से काफी आगे है जिसका विदेशी मुद्रा भंडार भारत से कहीं अधिक है. चीन इस मामले में सिर्फ जापान से पीछे है.  इसके बाद रशिया, होंगकॉंग, ताइवान और कोरिया आते हैं.

लेकिन फिर भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से बढ रहा है. कुछ साल पहले तक तो इसकी कल्पना करना भी हास्यास्पद लग सकता था.

आज से 15 साल पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो चुका था और देश के पास सिर्फ हफ्ते भर तक निर्यात किया जा सके इतना ही पैसा बचा था (स्रोत : The Economic Times ).

लेकिन फिर नरसिंह राव सरकार के द्वारा शुरू किए गए आर्थिक उदारीकरण ने देश की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर ला दिया. उनके और मनमोहन सिंह के उस समय के इस दुस्साहसी कदम को देश हमेंशा याद रखेगा.

नरसिंह राव ऐसा काम कर गए थे जो उनके आने वाले उत्तराधिकारीयों के लिए वापस खींचना सम्भव ही नहीं था. और आर्थिक उदारीकरण का वह दौर आज भी जारी है.

ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर चर्चा हो सकती है. चर्चा इस बात पर भी हो सकती है कि आर्थिक उदारीकरण का लाभ क्या समाज के एक विशेष तबके को ही मिल रहा है? क्या अमीर और गरीब के बीच की खाई बढती ही जा रही है और अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब हो रहे है. या गरीबों की स्थिति सुधर रही है.

यह बहस शायद अंतहीन साबित हो, पर देश की आर्थिक स्थिति और इस वजह से देश की दुनिया में साख पहले से काफी बेहतर है इसे शायद सभी स्विकार करेंगे.

यह बात अलग है कि हमारे नेता इस स्थिति का फायदा देश को पहुँचाने में विफल रहे हैं. क्योंकि हम आज भी खुद से कहीं कमजोर देशों के आगे हाथ फैलाते से दिखते हैं.

दो हजार वर्षों की गुलामी ने हमारे डी.एन.ए. बिगाड दिए हैं. शायद अभी समय लगेगा खोया आत्मविश्वास पाने में.

 

टिप्पणियाँ (2)add
२०० अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार
द्वारा प्रेषित आशीष , अप्रेल 18, 2007
इसका दूसरा पहलू यह भी है कि हमारे २०० अरब डॉलर अमरीका के विकास के लिये लगे हुये है। हमारे पास तो मुद्रा है लेकिन उपभोग तो अमरीका कर रहा है! smilies/angry.gif

इसी के तोड़ के लिये अभी कुछ दिनो पहले इरान ने घोषणा की थी कि वह तेल का भूगतान डालर की जगह किसी और मुद्रा मे लेना चाहेगा।
मुझे इंतजार उस दिन का है जब अन्य देश अपने पास विदेशी मुद्रा भंडार डालर की जगह रूपये मे रखेंगे !
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
आज का डॉलर दोधारी तलवार
द्वारा प्रेषित पंकज नरुला , अप्रेल 18, 2007
आशीष भाई

अभी उस दिन की तो कल्पना भी न कीजिए जब रूपया अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा होगा। अभी दिल्ली बहुत बहुत दूर है। यह भी सही है कि पिछले दशकों में जबसे अमरीकी डॉलर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा हर देश के पास इसका होना जरुरी है क्यूंकि इसी से आप जिन देशों से व्यापार करते हो का भुगतान करते हैं। लेकिन आज की परिस्थितियों में ज्यादा डॉलर होना कोई खुशी की बात नहीं है। चीन जिसके पास 1000 अरब से भी अधिक डॉलर हैं कि सबसे बड़ी चिंता भी यही है। कुछ इस तरह से सोचिए पिछले महीने महीने में डॉलर 46 रुपए से 41.6 रुपए पर आ गया है, अब इसका अपने 200 खरब पर प्रभाव आप सोच सकते हैं। अब इसका फायदा अमरीकियों को है कि ज्यादा लोग उनके उत्पाद खरीद पाएंगे मतलब अगर विंडोज 100 डॉलर की थी तो 4600 की बजाए 4160 पर आ सकती है, लेकिन अपनी SWITCH कम्पनियां अपनी सेवाओं के लिए अब कम रुपए भारत ले कर आएंगी।

SWITCH - Satyam, Wipro, Infosys, TCS, Cognizant, HCL
http://dealarchitect.typepad.com/deal_architect/2005/12/to_wit_it_is_a_.html
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
टिप्पणी लिखें
quote
bold
italicize
underline
strike
url
image
quote
quote
smile
wink
laugh
grin
angry
sad
shocked
cool
tongue
kiss
cry
smaller | bigger

busy

Recommend this article...

 


लोगिन करें






क्या आप अपना कूटशब्द भूल गये हैं?
क्या आप ने अभी तक खाता नहीं खोला? खाता खोलें

फ़ीड सबस्क्राइब करें


आपका Email ID: