| 200 अरब के पार, विदेशी मुद्रा भन्डार |
| मंतव्य | |
| बुधवार , , 18 अप्रेल | |
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टिप्पणियाँ
(2)
आशीष भाई
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अभी उस दिन की तो कल्पना भी न कीजिए जब रूपया अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा होगा। अभी दिल्ली बहुत बहुत दूर है। यह भी सही है कि पिछले दशकों में जबसे अमरीकी डॉलर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा हर देश के पास इसका होना जरुरी है क्यूंकि इसी से आप जिन देशों से व्यापार करते हो का भुगतान करते हैं। लेकिन आज की परिस्थितियों में ज्यादा डॉलर होना कोई खुशी की बात नहीं है। चीन जिसके पास 1000 अरब से भी अधिक डॉलर हैं कि सबसे बड़ी चिंता भी यही है। कुछ इस तरह से सोचिए पिछले महीने महीने में डॉलर 46 रुपए से 41.6 रुपए पर आ गया है, अब इसका अपने 200 खरब पर प्रभाव आप सोच सकते हैं। अब इसका फायदा अमरीकियों को है कि ज्यादा लोग उनके उत्पाद खरीद पाएंगे मतलब अगर विंडोज 100 डॉलर की थी तो 4600 की बजाए 4160 पर आ सकती है, लेकिन अपनी SWITCH कम्पनियां अपनी सेवाओं के लिए अब कम रुपए भारत ले कर आएंगी। SWITCH - Satyam, Wipro, Infosys, TCS, Cognizant, HCL http://dealarchitect.typepad.com/deal_architect/2005/12/to_wit_it_is_a_.html report abuse
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इसी के तोड़ के लिये अभी कुछ दिनो पहले इरान ने घोषणा की थी कि वह तेल का भूगतान डालर की जगह किसी और मुद्रा मे लेना चाहेगा।
मुझे इंतजार उस दिन का है जब अन्य देश अपने पास विदेशी मुद्रा भंडार डालर की जगह रूपये मे रखेंगे !