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कविता
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गुरुवार , , 26 अप्रेल |
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कुमार आशीष
फैजाबाद में कार्यरत श्री कुमार आशीष कवि हैं. तथा सम्प्रति जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में कार्यरत हैं.
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वक्त ने हम पर किए जुल्मोसितम
जब्त की चादर जो हमने तान ली
रफ्ता रफ्ता इश्क के बढ़ते कदम
हुश्न ने करवट ली पौ पहचान ली
हुश्न के कदमों तले जो नूर है
दिल ने उसमें सारी दुनिया छान ली
मिट के पा लेंगे तुझे हैं मुतमईन
कोई दिन जो जिद पे हमने ठान ली
अब तो होने में, न होने में कहीं
आरजूओं ने बदल मुस्कान ली
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