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MSN के द्वारा Yahoo! का खरीदा जाना! |
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मिडिया खबर
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शनिवार , , 05 मई |
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पंकज बेंगाणी
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गूगल के तेज कदमों की आहट से परेशान माइक्रोसॉफ्ट के लिए अब एक यह ही रास्ता बचा है. ख़बरें है कि माइक्रोसॉफ्ट(Microsoft) ने याहू(Yahoo) के समक्ष प्रस्ताव रखा है, जिसमें याहू को 50 बिलीयन डॉलर में खरीदने की बात की गई है.
इस समय इन दोनों कम्पनीयों के बीच वार्ताओं का दौर जारी है, लेकिन निकट भविष्य में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाने की सम्भावना है.
इससे समय अमरीका के सर्च व्यापार में गूगल का हिस्सा 47% है, और याहू और का सयुंक्त हिस्सा लगभग 40% का है. इस तरह से अगर यह प्रस्ताव दोनों कम्पनीयों द्वारा मंज़ूर हो जाता है तो माइक्रोसॉफ़्ट (Microsoft) सर्च इंजिन (Search Engine) के मामले में गूगल की लगभग बराबरी कर लेगा.जानकारों का मंतव्य है कि माइक्रोसॉफ्ट के पास इसके अलावा और कोई चारा भी नही है. माइक्रोसॉफ्ट यदि अपने बलबूते पर गूगल की बराबरी भी करना चाहे तो भी उसे अपने संसाधनों पर भारी खर्च करना पड़ेगा एवं लगभग दस साल तक इंतजार करना पड़ेगा.दूसरी तरफ याहू सर्च इंजन के अलावा कई अन्य सुविधाएँ भी देता है, तथा उसका नेटवर्क भारत सहित अन्य कई देशों में उत्कृष्टता के साथ फैला हुआ है. माइक्रोसॉफ़्ट अगर याहू को ख़रीद लेता है, तो उसकी पहुँच तथा सेवा के मानक कई गुना बढ जाएंगे.
जानकारों की यह भी सोच है कि माइक्रोसॉफ्ट के पास एक दूसरा विकल्प यह भी है कि वह याहू की बजाय 8 से 10 दूसरी छोटी एवं मध्यम कद की कम्पनीयों को ख़रीद ले. लेकिन इस तरह से यह प्रक्रिया लंबी हो जाएगी और इससे याहू जैसी प्रतिस्पर्धि कम्पनी भी मैदान में बची रहेगी. इससे भविष्य में माइक्रोसॉफ्ट को शायद ही कोई फायदा हो सके.
वैसे भी माइक्रोसॉफ्ट के लिए अधिग्रहण को नई बात नही है. माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कर्ताधर्ता बिल गेट्स ने भी उसके सफलतम प्रोडक्ट यानि को वस्तुत: ख़रीदा ही था.
माइक्रोसॉफ्ट और याहू के बीच समझौता हो जाने पर जहाँ एक और माइक्रोसॉफ्ट को याहू की कई सारी सफल सर्विसिज़ मिल जाएगी दूसरी तरफ माइक्रोसॉफ्ट के अमरीका में सफल एड नेटवर्क को भी नई जिंदगी मिल जाएगी.
विशेषज्ञों का मत है कि यह प्रस्ताव अगले 6 से 9 महीनों में परवान चढ़ सकता है. इस बात से गूगल के कान खड़े हों या ना हो, लेकिन याहू और माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों मे तेजी ज़रूर आ गई है.
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