| जनता चतुर सुजान |
| रवि-वार्ता | |
| गुरुवार , , 17 मई | |
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जनता के बारे में कहा जाता है कि जनता भोली
होती है. जनता इमोशनल होती है. जनता को बहलाया फुसलाया जा सकता है, प्रलोभनों से
बरगलाया जा सकता है. जनता को खरीदा बेचा जा सकता है. जनता को जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण
में बांटा जा सकता है. और, एक्स्ट्रीम केसेज़ में, जनता को मारा कूटा भी जा सकता
है.
यूपी चुनावों के संदर्भ में अब तक ये बातें
भले ही सत्य हों, पर इस दफ़ा वहां की जनता ने समीकरण पलट दिए. जनता जनता न रही वो
चतुर सुजान हो गई.
राहुल के रोड शो में खूब जनता आई. रोड के
रोड भर दिए, और हर जगह चक्काजाम कर दिए. गड्ढे भरी, धूलभरी, अधबनी सड़कों का एक और
रेप रोड शो के माध्यम से हो गया. पर चुनाव के नतीजों से सिद्ध हो गया – जनता चतुर
सुजान.
सोनिया की चुनावी सभाओं में तमाम जनता धूप
में तपती बैठी रही. सूखे गले और बहते पसीने के साथ बैठी रही. भीड़ इतनी कि हर तरफ
सिर ही सिर. मुलायम सरकार के ढहती क़ानून व्यवस्था के प्रश्न पर तमाम जनता ने सहमति
में सिर हिलाया और इस सरकार को उखाड़ फेंकने और कांग्रेस को वोट देने की अपील पर
खूब देर तक ताली बजाया. और जब चुनाव परिणाम आया तो साबित हो गया – जनता चतुर
सुजान.
मुलायमी हथकंडे भी कुछ कम अमर नहीं रहे थे.
बिग-बी के सिनेमाई चमत्कार युक्त ब्रांड एम्बेसेडरी से लेकर सामाजिक प्रलोभनों और
एम-वाई समीकरणों सभी का जम कर इस्तेमाल किया गया. जनता मूरख के रूप में चली आती रही
भीड़ की भीड़ बढ़ाती रही. और जब वोट देने का नंबर आया तो बता दिया – जनता चतुर
सुजान.
बीजेपी राममंदिर का राग अलापती रही, हिन्दू
हिन्दू जपती रही. जनता साथ में अखण्ड पाठ पढ़ती रही. अटल की सभा में सर्वाधिक जनता
जुटी और हिन्दू हिन्दू जपी. और जब वोट देने निकली तो अपना रामनामी चोला कहीं फेंक
आई और हाथी पर चढ़कर लौट आई. किसी ने पहचाना तक नहीं कि है जनता चतुर
सुजान.
माया मस्त हैं. उम्मीद से ज्यादा जनता ने
नवाज़ा. चाहा था चार मिला आठ. जिसे पहले गरियाए, जूतियाए, अंततः उसे गले से लिपटाए
– जनता ने बता दिया – जनता चतुर सुजान.
अखबारों ने, टीवी ने, पत्रिकाओं ने जनता से
पूछा – किसे वोट दे आए? जनता मुसकुराती रही. जनता सिर हिलाती रही. जनता मुँह
बिसूरती रही. पत्रकारों ने माउथ गेस्चर से, बॉडी लैंग्वेज से और न जाने किन किन
प्रतीकों से एक्जिट पोल के नतीजे निकाले. परिणाम उलटे आए. और भोली जनता ने भी बता
दिया, कि – है वो चतुर सुजान. ** व्यंज़ल ** हो गई जनता चतुर सुजान
है किसी को इसका संज्ञान मेरी बातों के हैं मेरे आधार
आप मानते रहें मेरा अज्ञान कोई नहीं पूछता कि क्यों
छोड़े मैंने प्रार्थना और
अजान धर्म के गलियारे में अंततः
खोल ली है मैंने भी दुकान गिरा था मैं, ये सोच के रवि गिराव के बाद ही है उठान
टिप्पणियाँ
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एक उदाहरण देखिए, जितने प्रधानमंत्रीयों ने और मुख्यमंत्रीयों ने चुनाव के ऐन पहले अपनी बडाई में विज्ञापन किए उनका क्या हाल हुआ.