| Podcast : गरवी गुजरात के रंगीले गीत |
| हमारी आवाज़ | |||
| शुक्रवार , , 18 मई | |||
Set as favorite
Bookmark
Email This
टिप्पणियाँ
(6)
इन लोकगीतों में आधुनिकता का प्रभाव स्पष्ट झलक रहा है. मिट्टी की सुगंध नहीं है.. मेरा अनुरोध है कि सुदूर गांवों में गाए जाने वाले लोकगीत जो पारंपरिक वाद्ययंत्रों में सुरबद्ध होते हैं.. वे सुनाए जाएं.. कभी कभार.
Votes: +0
report abuse
vote down
vote up
नीरजभाई,
Votes: +0
आपकी बात सही है. हम जल्द ही एक पॉडकास्ट विशुद्ध लोकगीतों पर लाएंगे. उसके लिए तैयारीयाँ चल रही है. यह वाली पॉडकास्ट कुछ लोगों की सिफारीश को ध्यान में रखकर की गई है. सुझाव के लिए बहुत धन्यवाद report abuse
vote down
vote up
भाई, हमारी अपार खुशी की सीमा नहीं है, खुशी की प्रस्तुतियों को देखकर. अब तो खुशी तुम अपना रेडियो ऑन लाइन शुरु कर ही दो. शायद हम भी मध्य प्रदेश के कुछ लोकगीत तुम्हें दें प्रसारित करने को.
Votes: +0
और फिर रेडियो पर हमारी तारीफ तो तुम कर ही दोगी, बस यही लालच लगी है. report abuse
vote down
vote up
खुशी,
Votes: +0
हर नवरात्रि के त्योहार की रात्रि मेँ इसी लोक गीत पर हम यहाम यु.एस.के लगभग सभी शहरोँ मेँ,भारत के उत्सवोँ के साथ हर साल, कुछ क्शण जी लेते है.. सनेडो भी बढिया है..और 'माडी तारा मँदीरीया माम घँटारव गाजे.."..ढोलीडा ढोल रे वगाड "..." मारो सोना नो रे घलूडो रे ..हा पाँणीडा छलके छे ..मारो हेलो साँभळो हो जी रे .." सभी बढिया ...Keep it up !! Warm rgds, Lavanya report abuse
vote down
vote up
|
|||