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दो आदमी, नाम एक, और गफलत अनेक
मंतव्य
शुक्रवार , , 25 मई

कुछ दिन पहले मुझे गोल माल और अंगूर फिल्म बहुत याद आई. दोनों ही शानदार कॉमेडी फिल्में थी. दोनों ही फिल्मों में डबल रोल का चक्कर था, और ढेर सारी गफलत थी.

खैर ये दोनों बेहतरीन फिल्में मुझे क्यों याद आई वो देखिए, और यह भी देखिए कि मैं बेचारा काम के बोझ का मारा, ऐसी गफलतों के अतिरिक्त बोझ से कैसा लस्त पस्त हो गया था.

शुरूआत करते हैं कोई महीने भर पहले से है. हमारी एक क्लाइंट है श्रीमती सुनीता सिन्हा (नाम मैने बदल दिया है), वे हमें Project Outsource करती हैं. उन्होने एक दिन जल्दी जल्दी में मुझसे कुछ फायलें मंगवानी चाही.. मैने कहा आपका ईमेल अकाउंट काम नही कर रहा. तो उन्होने आनन फानन में मुझे दो तीन अकाउंट बता दिए, जो जिमेल के थे.

एक समझिए sunita.sinha at gmail.com (dummy) और एक sinha.sunita at gmail.com
(dummy), इस तरह से.



मैने सोचा बडी गफलत है यह तो! फिर मैने एक उपाय सोचा कि चलो सब में मेल कर देते हैं, कोई ना कोई तो पँहुचेगा, या सारे ही पहुँच गए तो भी बंदी के पास कॉपीयाँ पडी रहेगी. मेरे आश्चर्य के बीच कोई भी मेल रिटर्न नही हुआ. बस फिर क्या था आगे से मैं यही करने लगा, जो भी भेजना होता सुनिताजी के सारे ईमेल आई.डी. पर भेजता रहा.

कुछ दिनो तक तो ठीक था, लेकिन एक दिन मैने उनसे मेल से पूछा," आप फलानाँ प्रोजेक्ट का रिपोर्ट नहीं दे रही हैं, यह तो बताइए हमें एडवांस कब मिलेगा".

जवाब में मुझे ऐसी झाड पडी कि पूछिए मत. सामने से जवाब आता है," तुम हो कौन बास्टर्ड. मैं क्यों दूँ तुम्हें एडवांस."

मैं तो हैरान रह गया. यह क्या बात हुई. वे तो ऐसी ना थी. वे तो बहुत बार हमारी ऑफ़िस में ही गप्प शप्प करा करती थी, मज़ाक वजाक करती थी, और आज अचानक ही मैं बास्टर्ड!!! मुझे क्यों दे एडवांस!! अरे काम कर रहा हुं भाई!

मैने उन्हे जवाब दिया, प्लीज़ माइंड योर लेंग्वेज़. शायद आपका मूड खराब है, बाद में बात करते हैं.

दुसरे दिन वे हमारी ऑफिस आई. हमेशा की तरफ भागती दौडती मुस्कुराती. आते ही बोली, यार पंकज प्रोजेक्ट फिनिश कर यार, मुझे मुम्बई जाना है. और हाँ तुम्हारा एडवांस का चेक. और भाई चाय मंगवा यार किसी से.....

मैं चुपचाप उन्हे देखता रहा.. क्या आप वही हो!?

कुछ दिन बात वे मुम्बई चली गई. हमें कुछेक प्रोजेक्ट्स के पैसे लेने थे. मैं उन्हे मेल करता रहा.. हमेशा की तरह सभी आई.डी. पर. बीच बीच में मुझे एकाध जवाब मिलते जिसमें "?" बना होता.

एक दिन मैने उन्हे लिखा, मेडम, और कितना टाइम लगेगा पेमेंट में. आप मेरी स्थिति समझिए!

मुझे जवाब मिला,"क्या तुम पागल हो? मैं क्यों दूँ तुम्हें पैसे? क्या खाक समझुँ तुम्हारी स्थिति!"

मुझे भी गुस्सा आने लगा. यार ये क्या बात हुई. काम के समय तो कैसे भी करके पूरा करो, और अब यह..

दूसरे दिन मुझे फिर उनका एक मेल मिला, छोटा सा.. पंकज पैसे तुम्हारी कम्पनी के अकाउंट में जमा कराए हैं.

अब मैने ठंडे दिमाग से सोचना शुरू किया कि ये माज़रा आखिर है क्या. और फिर समझ में आई गफलत. एक नाम के दो आदमी और एक जैसे दो आई.डी. सुनीता सिन्हा ये भी और वो भी. एक का आइ.डी sunita.sinha at gmail.com और दूसरी का sinha.sunita at gmail.com.

तो मै एक कॉपी जिसको हमेशा से मेल करता आ रहा था, वो कोई और ही है, जिसे मैं जानता तक नही, और वो बेचारी मुझे ना जाने कितनी बार झाड़ चुकी है.

बाद में पता चला कि हमारी क्लाइंट ने एक आई.डी. जो बंद हो चुका था (उनके हिसाब से) वो भी दे दिया था, जो अब किसी और के पास था.

खैर मैने जल्दी से वो गलत आई.डी अपनी लिस्ट मे से Delete किया, तब जाकर शांति मिली. आजतक मैं उस गलत इंसान को भगवान जाने कितनी फायले भेज चुका हुं , जिनका उनसे कोई सरोकार ही नही हैं. पर अब क्या हो सकता है.

ऐसा भी होता है.

 

टिप्पणियाँ (11)add
भगवान के कई रूप
द्वारा प्रेषित राकेश खंडेलवाल , मई 25, 2007
चिट्ठे वाले पंकज बेंगाणी क्या आप ? हमें बतलायें
या बेंगाणी पंकजजी का सम्बोधन हम यहाँ लगायें
सच में ही गफ़लत होती है हमने भी ये महसूसा है
जो भी हो क्या हल है इसका,जान सकें तो हमें बतायें

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are nahi
द्वारा प्रेषित pankaj bengani , मई 25, 2007
महाराज आप तो हमे कहो

सिर्फ पंकज बेंगाणी.

पहले से ही शर्मसार हैं..

हो चुके पानी पानी..
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मेरी कहानी भी सुन लो
द्वारा प्रेषित आशीष श्रीवास्तव , मई 25, 2007
मेरी कँपनी मे एक दो नही पूरे छह के छह आशीष श्रीवास्तव है ! smilies/cool.gif सभी के मेल आइ डी एक जैसे ही है|
अब कहानी कुछ ऐसी है|मेरा मेल आइ डी सबसे अच्छा है , मतलब की ashish और shrivastava दोनो पूरे है| smilies/grin.gif लेकिन एक बन्दे के मेल पते मे srivastava दूसरे के पते मे shrivastav तिसरे के पते मे srivastav ! अब क्या करे shrivastava के साथ जितनी छेडखानी हो सकती कर ली, लेकिन तीन और बचे ! smilies/angry.gif कँपनी वालो ने नाम.उपनाम@कँपनी.काम का फँडा उल्टा कर दिया , मतलब की उपनाम.नाम@कँपनी.काम| तीन नये मेल पते और मील गये है| अब तक तो काम चल गया है| smilies/grin.gif

लेकिन अब मै सोच रहा हूँ कि यदि साँतवा आशीष श्रीवास्तव यदि मेरी कँपनी मे आ गया तो उसका क्या होगा ? smilies/grin.gif
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he bhagwan
द्वारा प्रेषित pankaj bengani , मई 25, 2007
हे भगवान... आशीष जी,

आपके चरण कहाँ हैं.... smilies/wink.gif
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www.emotions-life.blogspot.com
द्वारा प्रेषित manya , मई 25, 2007
बहुत अच्छे.. गोलमाल है भई सब गोल्माल है..
आशीष जी आप भी संभलियेगा.. smilies/smiley.gif
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अरे ये तो....
द्वारा प्रेषित kakesh , मई 25, 2007
अरे ये तो मेरे साथ भी हो चुका है भाई ...जब मैं मेल एडमिन था ... तो मेरे दो यूजर dkdas और ddas बहुत परेशान रहते थे क्योकि अक्सर एक की मेल दूसरे को मिल जाती थी... एक बार तो ddas जो युवा थे का प्रेम पत्र dkdas जो वाइस प्रेसिडेंट थे के पास पहुंच गया ...जो कि उनकी सेक्रेटरी ने देखा ( वी.पी लोग अपने मेल खुद नहीं देखते थे ) ..और उस पर जो बबाल मचा था smilies/smiley.gif smilies/grin.gif आप समझ ही सकते हैं...
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ई क्या गड़बड़ मचाई हुई है
द्वारा प्रेषित समीर लाल , मई 25, 2007
ये क्या गड़बड़ मचाई हुई है? smilies/grin.gif

ईमेल के शिष्टाचार पर भी लिख ही दो. फोन और खाने की मेज के तो लिख ही चुके हो.
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...
द्वारा प्रेषित सागर चन्द नाहर , मई 25, 2007
ये बात समझ में नहीं आई कि जो आई डी बन्द हो चुका है वह किसी दूसरे को कैसे दिया जा सकता है?, कहीं कल को मेरा जीमेल का आईडी कहीं ओसामा बिन लादेन को दे दिया तो मेरा क्या होगा ... कालिये।

smilies/smiley.gif smilies/smiley.gif smilies/smiley.gif
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हमारे नाम तो एकदम यूनिक हैं भाई
द्वारा प्रेषित धुरविरोधी , मई 25, 2007
हमारे परिवार के तो सभी लोगों के नाम एकदम यूनिक हैं.
चलिये, आप आने वाली पीढ़ी के नाम तो एकदम हटकर रखियेगा.
आशीष जी सुन रहें हैं क्या आप?
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...
द्वारा प्रेषित श्रीश शर्मा , मई 26, 2007
हा हा ये भी खूब रही, भईया किसी जमाने में मैं सोचता था कि मेरा नाम Shrish बहुत यूनीक है लेकिन एक गूगल सर्च मारो तो 33,000 रिजल्ट मिलते हैं।

आजतक मैं उस गलत इंसान को भगवान जाने कितनी फायले भेज चुका हुं , जिनका उनसे कोई सरोकार ही नही हैं. पर अब क्या हो सकता है.


अब एक और मेल उस पते पर करो और माफी मांगते हुए इस लेख का लिंक भेज दो। smilies/smiley.gif
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क्या सीन है
द्वारा प्रेषित arun , मई 26, 2007
वाह भाई पंकज जी गलत न. पर गलत फ़ाईल और वो भी इतनी सारी,चलो भाइ बन्दा ढीला था वरना इतने सारे मैटर को देख कर आपके साथ जुड कर एक नया प्रोजेक्ट चालू कर लेता आपको भी नया ग्राहक मिलता हमे भी नया लेख,
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