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जीहाँ गांठिया है McDonald's से आगे!
समाज
मंगलवार , , 29 मई

pankajphoto

  पंकज बेंगाणी 


 

 

 

 

 

 

 


fafdaयदि आप गुजरात में हैं, तथा विशेष कर सौराष्ट्र के किसी इलाके में घूम रहे हैं तो बहुत संभव है इस समय आप सडक किनारे किसी ठेले वाले को देख रहे हों, जो गांठिया बेच रहा होगा. जी हाँ, गांठिया, बेसन से बना एक चटपटा त्वरित खाना (Fast Food). गुजरात के लोकजीवन में गांठिया का उतना ही महत्व है जितना पश्चिमी जगत में फास्ट फूड का है. वहाँ की तेज भागती जिंदगी में लोग फास्ट फूड को ही अपना आधार बनाकर चलते हैं. लेकिन गुजरात के सौराष्ट्र की जिंदगी इतनी दौड़ भाग भरी नहीं होती है. यहाँ के लोग वास्तव में बहुत आराम प्रिय होते हैं, और अपने दैनिक जीवन में मात्र 5-6 घंटे काम करके भी संतुष्टि पा लेते हैं. लेकिन फिर भी इस प्रदेश में फास्ट फूड का और उसमें भी गांठिया का अत्यधिक महत्व है.

गांठिया यहाँ के जीवन का मूल मंत्र है. सौराष्ट्र के राजकोट शहर में घूमते हुए आप रात के 12 या 1 बजे ही नहीं बल्कि सुबह 4 बजे भी गांठिया ख़रीद कर खा सकते हैं. सौराष्ट्र के लोगों का गांठिया के प्रति प्रेम अद्भुत है. इसी वजह से इस प्रदेश के बाहर की खाने पीने की दुकान वालों को भी अपने यहाँ गांठिया तथा खमण का स्टॉक रखना अनिवार्य हो जाता है, क्योंकि यदि कोई सौराष्ट्र का रहनेवाले आया तो उसकी पहली पसंद गांठिया की एक प्लेट ही होगी.

गांठिया को यदि सौराष्ट्र का पारिवारिक व्यंजन कहा जाए, तो गलत नहीं होगा. यहाँ यदि स्कूल जाते बच्चे अपने टिफिन में गांठिया ले जाते हैं तो वृद्धाश्रम में दान धर्म में दिया जाने वाला व्यंजन भी गांठिया ही होता है. विवाह का प्रसंग हो या किसी का मृत्युभोज, जो व्यंजन अनिवार्य रूप से बनता ही है वो है गांठिया.

गांठिया के साथ जो चीज मुफ्त में उपलब्ध होती है, वो है सम्भार या कढी. इसका कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता है, यानि यदि आप गांठिया ख़रीद रहे हैं तो कढी या सम्भार आपको मुफ्त ही मिलता है. यहाँ कई ऐसे लोग भी हैं जो 200 ग्राम गांठिया के साथ 300 ग्राम कढी यूँ ही पी जाते हैं.

एक अनुमान के मुताबिक सौराष्ट्र में खाने पीने के सामान बेचने वाली हर दुकान में रोज लगभग 50 किलो आटे के गांठिया की बिक्री होती है. इस प्रदेश में कई सारे लोगों का मुख्य व्यवसाय ही गांठिया बेचना है. यहाँ रोज करीब 10 करोड मूल्य के गांठिया की बिक्री होती है. और इस उद्योग से लगभग 15 हजार लोग रोज़गार पा रहे हैं.
बढ रहे वैश्वीकरण की हवा अब इस प्रदेश में भी लग चुकी है, और अब सौराष्ट्र की कई कम्पनियाँ गांठिया की पेकिज़िंग करके बेच रही है. इससे गांठिया की बिक्री में और भी उछाल आया है.

विदेशी फास्ट फूड रेस्त्रां जैसे कि मेक्डोनलड्स (McDonald's) या सब वे (Sub Way) के आने के बाद भी लोगों का गांठिया के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ है. एक अनुमान के मुताबिक गांठिया के असंगठित उद्योग का व्याप मेक्डोनलड्स, के.एफ.सी (KFC) या सब वे जैसे संगठीत मल्टीनेशनल फास्ट फूड रेस्त्रां से भी अधिक है. और गुजरात में तो इसकी बिक्री हमेशा से आसमान  नापती आई है.
 


टिप्पणियाँ (2)add
आपका गांठिया : हमारा फाफडा
द्वारा प्रेषित विष्‍णु बैरागी , जून 08, 2007
गांठि‍या की जानकारी रोचक है । इसका अर्थशास्‍त्र सुन्‍दर और परदेशी व्‍यंजनों के बढते आक्रमण के बीच खोमचों, रेहडियों, ठेलों पर बिकने वाले देसी व्‍यंजनों का हौसला बढाने वाला है ।
यदि गांठिया वही हैजो आपने चित्र में दिखाया है तो अपनी जानकारी तनिक बढा लीजिए । पूरे मालवा अंचल में इसे 'फाफडा' के नाम से पुकारा, पहचाना, खरीदा और खाया जाता है । इसके साथ फ्राई की गई पूरी हरी मिर्च और बेसन से बनी, हलकी-हलकी खटाई वाली कढी दी जाती है । यदि आपको गुजरात में न मिले तो फौरन मालवा में आइए और जी भर कर आपका गांठिया और हमारा फाफडा खाईए ।
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वाह
द्वारा प्रेषित समीर लाल , जून 13, 2007
बड़ी रोचक जानकारी दी..हांलाकि मैं गाठिया का दीवाना हूँ, तैयार रखना...और हर गुजराती खाने का...कई बार में पूरा होगा सत्कार. smilies/grin.gif
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