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आज मुझे कुछ कहना है...
कविता
बुधवार , , 13 जून

sameer

 

समीरलाल


 

  श्री समीरलाल उत्कृष्ट कवि, चिट्ठाकार एवं तरकश के कोर सम्पादक हैं. 

 

 

 

 

 

 

 

rahi

 

आज मुझे कुछ कहना है......
मौन दमित मुखरित होने से

अब मुश्किल यह सहना है

कल तक मैं बस सुनता आया

आज मुझे कुछ कहना है.

 

पीर पराई सहता था मैं
कभी न दिल की कहता था मैं
जिन राहों पर कोई न चलता
उन राहों पर रहता था मैं.
मुझको भी उन्मुक्त मुसाफिर
बन कर चलते रहना है
कल तक मैं बस सुनता आया
आज मुझे कुछ कहना है.
 

सबने ही मुझको भरमाया

तरह तरह से मुझे डराया

क्या क्या खेल रचे जाते हैं

सोच सोच कर मैं घबराया

मर मर के जिंदा रहने से

बेहतर जी कर मरना है

कल तक मैं बस सुनता आया

आज मुझे कुछ कहना है.

 

दया धर्म का नाम नहीं है
जीवन में आराम नहीं है
नफरत वाली इस महफिल में
प्यार पिलाता जाम नहीं है
मुझको अब पावन नदिया की
धारों सा बन बहना है
कल तक मैं बस सुनता आया
आज मुझे कुछ कहना है.

 

 

लेखक का निजि चिट्ठा

 



 



टिप्पणियाँ (9)add
...
द्वारा प्रेषित pankaj bengani , जून 13, 2007
smilies/kiss.gif सुन्दर रचना.

आप तो बस कहते ही रहिए.. सुनने वाले लाखों में हैं..
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बहुत खूब
द्वारा प्रेषित Dr.Bhawna Kunwar , जून 13, 2007
समीर जी बहुत अच्छी रचना है। बहुत-बहुत बधाई।
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...
द्वारा प्रेषित Yatish Jain , जून 17, 2007
"पीर पराई सहता था मैं
कभी न दिल की कहता था मैं
जिन राहों पर कोई न चलता
उन राहों पर रहता था मैं. "

"मर मर के जिंदा रहने से
बेहतर जी कर मरना है"

ये जो शब्दों की समीर हैं हम सब मै एक सी बहती हैं, ये सब ऐसे ही हैं जैसे हर पहर की अलग अलग हवाएँ। एक हवा मै आप जीं रहे हैं एक हवा मै हम ...
यतीष
कतरा-कतरा

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...
द्वारा प्रेषित rachnasingh , जून 17, 2007
samir
very nice very very nice
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...
द्वारा प्रेषित Amit , जून 17, 2007
अगर "मौन" यह है तो आवाज क्या होगी...वैसे मेरी निजी राइ है "मौन" शब्दों से जायदा बोलता है ...
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http://www.bhavnaye.blogspot.com/
द्वारा प्रेषित reeteshgupta , जून 19, 2007
बहुत सुंदर लालाजी,

लाजबाब लिखा है ....अच्छा लगा पढ़कर....बधाई
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kal tak mai suna aya aj mujhe kuch kahna hai........
द्वारा प्रेषित Reema Dogra , मई 21, 2008
behat hi acha likha hai
this to good
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kal tak mai suna aya aj mujhe kuch kahna hai........
द्वारा प्रेषित Reema Dogra , मई 21, 2008
behat hi acha likha hai
this to good smilies/smiley.gif
good day
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Very Good Keep it up
द्वारा प्रेषित Anil Dubey , अप्रेल 24, 2009
Aap ki kavita man ko choone lagi aur bar bar padne ka man chahta hai
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