| क्या यही होती है 'Life in a Metro"? |
| मंतव्य | |
| सोमवार , , 25 जून | |
|
मेरी "लाइफ इन अ मेट्रो" इतनी "फिकी" क्यों है?
संबंधित आलेख
Set as favorite
Bookmark
Email This
टिप्पणियाँ
(8)
हमारी अगली छुट्टी बचवा देने के लिये आभार, वरना यह मूवी हम भी झेल रहे होते.
Votes: +0
अब आप इत्मिनान से सो जायें. report abuse
vote down
vote up
वाह भैया! इस फ़िल्म के बारे में हमें बताकर आपने हमें भावी परेशानी से बचा लिया, क्या पता कभी हमारा मूड भी फ़िल्म देखने का होता और आपकी तरह मेट्रो के चक्कर में फँस जाते।
Votes: +0
report abuse
vote down
vote up
माफ कीजिएगा… आपने कुछ ज्यादा ही बुरा कह दिया इसे जबकि आपको नहीं लगता की सभी की जिंदगी बिस्तर से शुरु हो कर वही दम तोड़ देती है…ये बात अलग है सभी ने ड्रीम सेंसर लगा रखा है…।इस तरह की मुवी को Surria Realistic कहते है जो New wave cinema के नाम से भी जाना जाता।वैसे भी मैंने अपना सिनेमा का ब्लाग शुरु किया है…आप उसमें देखेंगे कोशिश है विश्व सिनेमा पर कुछ बाते की जाए…
Votes: +0
अनुराग बासु ने थोड़ी नकल फ्रेंज मुवी मेकर गोदार की नकल की है…। report abuse
vote down
vote up
कापी करना बुरा नहीं है पर जब भेजा फ्राई जैसी मूवी कॉपी हो कर आती है तो मजा आता है। लाईफ इन मैट्रो भी कॉपी है पर असली वाली ज्यादा मजेदार है व अदाकार ज्यादा स्वाभाविक है। जरा यहाँ देखें
Votes: +0
http://imdb.com/title/tt0053604/plotsummary report abuse
vote down
vote up
अतुल शर्मा, प्रतीक पाण्डे
Votes: +0
वैसे देखनी चाहिए एक बार तो देख सकते हैं. समीर लालजी अब नींद कहाँ.. अब शांति चाहिए. Divyabh अपना अपना नजरिया होता है दिव्याभ. मै यह नही कह रहा कि फिल्म एकदम बकवास है. लेकिन फिल्म की आत्मा या मूलकथा लचर है. और फिल्म के शीर्षक से कहानी मेल नही खाती. आपके फिल्मी ब्लोग का पता देने का शुक्रिया. satyendra prasad srivastava बात तो सही है. पर मुश्किल यह है कि एक समस्या बिस्तर भी है. मिर्ची सेठ लिंक देने के लिए तथा जानकारी बाँटने के लिए बहुत धन्यवाद. हाँ कहानी तो उडाई गई लगती है. भेजा फ्राय मुझे पसन्द आई थी, कृपया बताएँ कि कौन सी फिल्म की कॉपी थी. report abuse
vote down
vote up
|
|