| मुफ्त का चंदन घस मेरे नंदन |
| मंतव्य | |
| शनिवार , , 30 जून | |
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आजकल पता नहीं क्या हो गया. बिजली को जलते देख मेरी उँगली तुरंत स्वीचबॉर्ड की तरफ बढने लग जाती है. इच्छा होती है लाइट बंद कर दूँ. यह मेरे सनकीपन की नई मिसाल है.
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टिप्पणियाँ
(10)
जो लोग बिलावजह संसाधन बर्बाद करते रहते हैं, दरअसल ये ज़िन्दा नहीं हैं। ये लोग विचारहीन मशीन हैं। जो यांत्रिक तौर पर रोज़मर्रा का काम करते रहते हैं।
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क्या बात है संजय जी आज आप लाईट बचाने की बात कर रहे है,बहुत अच्छी बात है लगता है कल आपको हमारा पानी बचाने का आईडीया बहुत भा गया है.फ़िर तो हम वादा करते है कि लाईट बचाने मे भी आपका सहयोग करेगे और बाकी वक्त वक्त पर आपको टिप्पणि मे सुझाव भी झिला दिया करेगे
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Dilip mehta
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धन्यवाद. Pratik Pandey मित्र यंत्रो को तो फिर भी नियंत्रित कर सकते हैं, ये लोग तो बेकाबु होते हैं. aroonarora
क्या मैं संजय जी को पंकज जी पढ सकता हुँ? report abuse
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अरे लेख की शुरुआत में तो मन्ने लगा कि थारे पे कोई भूत-वूत आ गयो है, सो मैं तन्ने अमदाबाद ही के एक बाबे का पता बतान की सोच रिया था, पर आगे पढ़ा तो जान्ना कि यो तो कोई ओर ही बात से!
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मेरा एक बार यहाँ के ONGC कार्यालय में जाना हुआ. दोपहर का समय था, लंच ब्रेक चल रहा था. एक फ्लोर पर जाकर मैने देखा कि गलियारे से लेकर हर केबीन के लाइट - पंखे, एयरकडीशनर सब पूरजोश में चालू हैं लेकिन उनका लाभ उठाने वाला एक भी इंसान नहीं है. चपरासी से पूछा तो वो बोला, लंच ब्रेक में गए हैं. मैने कहा - तो लाइटें तो बन्द कर दो. इस बार उसने मुझे जिन नजरों से देखा उससे मैं समझ गया कि यह मुझे गुरूघंटाल समझ रहा है. "इतने बडे फ्लोर की लाइटें बंद करने में रात हो जाएगी, और फिर जलाएगा कौन?" - यह उसका कहना था. अब सोचिए बाबुलोग वापस आकर अपने केबिन की बत्ती भी नही जला सकते! हाँ भई, यह लगभग हर सरकारी दफ़्तर की हालत है, सरकारी ही क्यों, कुछ अपवादों को छोड़ प्राईवेट दफ़्तरों में भी यही हालत है। जो लोग अपने घर में बिजली आदि सावधानी से बरतते हैं वही दफ़्तरों में ऐसे खुला प्रयोग करते हैं जैसे पता नहीं क्या हो। report abuse
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Amit,
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कुछ अपवादों को छोड़ प्राईवेट दफ़्तरों में भी यही हालत ह सही बात है, मुफ्त की चीज मिलते ही बस... report abuse
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मुफ्त की चीजों का अधिकतर दुरुपयोग ही होता है । मैं अपने स्कूल में बच्चों की एक बात से बहुत प्रसन्न हूँ कि २० मिनट की रिसेस में वे याद से पंखे बंद करके बाहर जाते हैं ।
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घुघूती बासूती report abuse
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इन्सान की फितरत ही ऐसी है कि मुफ़्त की चीज़ बेख़ौफ़ इस्तेमाल करते है वो चाहे बिजली हो या गैस ।
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बड़ा सार्थक कदम है, सनक नहीं. तुम अपना बत्ती बुझाने और दुरुपयोग कम करने का काम करते रहो और लोगों को भी प्रेरित करो. ऐसे ही किसी भी बड़े अभियान की नींव रखी जाती है. इसकी आवश्यकता है. बधाई और शुभकामनाऎं
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