| व्यंग्य : भूख का इलाज |
| रवि-वार्ता | ||
| सोमवार , , 02 जुलाई | ||
![]() वैज्ञानिकों ने वो दवाई बना लेने में सफलता प्राप्त कर ली है जिसकी एक गोली खा लेने से आदमी को अपना पेट भरा महसूस होता है और उसकी भूख खत्म हो जाती है. कहा तो ये जा रहा है कि ये दवाई उन मोटे लोगों के लिए है, जो अपना वज़न नियंत्रित करना चाहते हैं. यह दवाई मोटे लोगों की भूख को मारकर, उनकी भूख को खत्म कर उनकी खाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाएगा और इस तरह उन्हें पतला बनाएगा. परंतु वास्तविकता में, अंततः ये किसके काम आएंगे? है कुछ अंदाजा आपको? ये दवाई अंततः भूखे नंगे और गरीबों के काम आएंगे. उनकी असली भूख को मारने और दबाने के काम में आएंगे. सरकारें गरीब जनता को काम और अनाज उपलब्ध नहीं करवा पाएंगीं तो वे जनता के लिए ऐसे भूख-भगाओ कैप्सूल सब्सिडाइज्ड रेट में उपलब्ध करवाएंगी. हर गरीब को महीने के तीस दिन के हिसाब से तीस कैप्सूल कोटे में मिला करेगा. भूखा गरीब एक गिलास पानी के साथ कैप्सूल गटक कर अपने को तृप्त महसूस करेगा और सरकार का धन्यवाद करेगा – जो उसकी भूख की इतनी चिंता करती है. इस भूख भगाओ कैप्सूल के कई नए नायाब प्रयोग भी हो सकते हैं. एक भूखी मां अपने भूख के कारण रोते-बिलबिलाते बच्चे को ये कहती हुई पाई जाएगी – चुप हो जा बेटा चुप हो जा. अभी तेरे बापू तेरे लिए भूख भगाओ कैप्सूल ले कर आते होंगे. जबकि उसका शराबी बाप अपने कोटे के कैप्सूलों को काले बाजार में बेचकर उस दिन के अपने दारू का कोटा पूरा कर नशे में धुत्त कहीं पड़ा मिलेगा. वैज्ञानिकों ने ये कोई ठीक काम नहीं किया है. हृदयहीन वैज्ञानिकों ने भूख की दवा बनाकर गरीब से उसकी भूख ही छीन ली. अरे, उन्हें दवा बनानी ही थी तो नेताओं के वोटों और नोटों के भूख की, भ्रष्टाचारियों के धन की भूख की और धर्मान्ध लोगों के धर्मान्धता के भूख की दवाई बनाते. दुनिया कुछ स्वच्छ तो प्रतीत होती! व्यंज़ल जाने कितने गुनाह कर दिए मैंने ईश्वर! तेरे दिए हुए भूख की खातिर अब खाने लगा हूं मैं भी सब कुछ जाने किस तरह के भूख की खातिर मैं रोया तो था, पर मेरा यकीं करो मेरा रोना नहीं था भूख की खातिर मुझ पर बेवजह शक न करो यारों नज़रें चुराया था मैं भूख की खातिर मेरे शहर में तो सभी भूखे हैं रवि कुछ शौक से बाकी भूख की खातिर
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