| नया रंग-नया रुप |
| नई उडनतस्तरी | |
| मंगलवार , , 03 जुलाई | |
नया रिन!! अब पहले से ज्यादा झाग! नींबू की खूशबु के साथ!! और भी न जाने क्या क्या विज्ञापन. भागे और खरीद लाये. इस्तेमाल किये तो वही. काहे का झाग और काहे का नींबू. मगर खरीद तो लाये ही. फिर आदात लग गई और अब लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं. यानि विज्ञापन का यह तरीका प्रभावी कहलाया.ऐसा कि हम भी बह गये इसी धारा में. तो हाजिर है नई उड़न तश्तरी!! पहले से ज्यादा घरघराहट और ज्यादा तेज उड़ान. सवारी इतनी ज्यादा हैं कि पुरानी वाली http://udantashtari.blogspot.com/ भी पूरी ताकत से चलती रहेगी और इसे उसी में बेहतर सेवा के लिये नया जोड़ माना जाये. ज्यादा लेग स्पेस,बेहतर साज सज्जा,एक्स्ट्रा व्युवरशिप,परमानेंट पार्किंग,फटाफट दर्शन!! और क्या चाहिये?? सब तो है. तब हाजिर हैं पहली नजर-बड़ी गंभीर टाईप बात के साथ. हँसी मजाक तो हमेशा लगा ही रहना है, कम से कम शुरुवात तो गंभीर करें.
एडस या भूख: कौन बड़ा
एडस उन्मुलन की टीम विदेश से आई है अपने साथ कपडे, खाना और बहुतेरे यंत्र लाई है. गोपीनाथ का ब्लड एच आई वी पॉजिटिव आया है पहनने को कपडे़ खाने का सामान परिवार को अनुदान क्या कुछ नहीं पाया है. रामू मिस्त्री का बेटा दो दिन से भूखा है भगवान से रुठा है सोच रहा है कैसी फूटी किस्मत पाई है एच आई वी पॉजिटिव न तो खुद है न उसका बाप है न माई है. --समीर लाल ‘समीर’ टिप्पणियाँ
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समीर जी अच्छा लगा प्रस्थान का तरीका और आपकी रचना हकीकत को जाहिर करती यहाँ युगांडा में तो आये दिन बच्चे और बड़े इस बिमारी से मर रहे हैं कभी-कभी उनमें परिचित लोग भी होते हैं हमारे साथ काम करने वाले भी, उनके जाने के बाद विश्वास नहीं होता कि वो इस भंयकर बिमारी से जूझते हुये कल स्वर्ग सिधार गये जिनको कल हमने चलते-फिरते देखा था।
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सही कहा है भाइ
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जब बिल ने भारत आकर एड्स के लिये मोटा योगदान दिया था तो हमने भी उनसे विनती की महाराज कुछ पैसा जापानी बुखार और डेंगू के उन्मूलन के लिये भी दे पर वो भडक गये, कहने लगे "जिस के लिये हम जुम्मेदार नही है वहा कोई एड हम क्यो दे" report abuse
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गुजराती में - भले पधार्या!