| लो हम खुद ही फँस गए! |
| मंतव्य | ||
| बुधवार , , 01 अगस्त | ||
भई दुनिया में अगर कोई सबसे आसान और मजेदार काम है तो वह है नसीहत देना! इसे तो हम सभी स्वीकार करेंगे. लेकिन कभी कभी क्या होता है हम जिस चीज की नसीहत देते हैं हम खुद उसी चक्कर में फँस जाते हैं. तब स्थिति बडी हास्यास्पद हो जाती है.
आज हमें मौका मिला है कि हम भी खुद पर थोडा हँस ही लें. बात यूँ है कि अभी कुछ दिन पहले हमने तरकश जोश पर एक स्टोरी डाली थी. यह स्टोरी थी एक कम्प्यूटर वायरस से संबंधित. यह एक नया वायरस है जो पेन ड्राइव से फैल रहा है. इस वायरस से जब सिस्टम दूषित हो जाता है तो, कुछ यूँ होता है कि जब भी आप फायरफोक्स खोलेंगे तो वो खोलने नही देगा. नही उसे फायरफोक्स से कोई दुश्मनी नही है. वो तो बस यह चाहता है कि आप इंटरनेट एक्सप्लोरर का इस्तेमाल करें.
इसके अलावा वो आपको ओर्कुट और युट्युब भी नही खोलने देगा. उसे वास्तव में आपकी चिंता होती है कि कही आप समय ना बरबाद करने बैठ जाओ. तो वह रावण की तरह हंसेगा और ब्राउजर बंद कर देगा.
देखिए इस वायरस को आपकी कितनी चिंता है, और एक हम हैं जिन्होंने इसके खिलाफ एक लेख छाप दिया. और उसने भी बदला ले लिया, हमारे खुद के सिस्टम इंफेक्टेड कर दिए. खैर हमारे पास भी इलाज तो है. लेकिन भाई सो टके की बात यह है कि, नसीहत तो दो लेकिन ध्यान रखो कि कहीं खुद ना फँस जाओ!
भारत अब 60 वर्ष का युवा होने जा रहा है! इससे गौरवशाली पर्व को मनाने के लिए हमने एक विभाग बनाया है -
भारत 60 वर्ष युवा, अब आगे... आप आमंत्रित हैं, अपने विचार प्रगट करने के लिए.
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टिप्पणियाँ
(5)
द्वारा प्रेषित समीर लाल , अगस्त 01, 2007
बहुत सही फंसे. और घूमों नसीहत देने. तब तो बड़े भारी मास्साब बन कर निकले थे. तुम्हारे चक्कर में सीधे सादे संजय भाई भी चिपिया गये होंगे?
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द्वारा प्रेषित श्रीश शर्मा , अगस्त 01, 2007
हे हे, ये भी खूब रही, वायरस जी ने बदला ले लिया आपसे।
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यार कुछ जुगाड़ करो इस कमेंट बॉक्स का, हर बार नाम-पता डालना पड़ता है। कोई स्क्रिप्ट वगैरा सैट करो कि ये कुकीज द्वारा याद रखे। report abuse
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