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अनुगूँज 22 : भारत अगर अमरीका बन जाये तो? |
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गुरुवार , , 02 अगस्त |
संजय दृष्टि - संजय बेंगाणी द्वारा |
और परमाणु धड़ाका तो क्या फुस्स भी नहीं होता. मगर कागजादों में दिखाया जाता है की उम्मीद से भारी धमाका हुआ था.
भारत अगर अमरीका बन जाये तो?
सुन कर कई लोग खी खी कर हँसेगे.
पर, क्यों भई नहीं हो सकता क्या? क्यों नहीं हो सकता, जरूर हो सकता है. और दुनिया पर इसके दूरगामी परिणाम भी होंगे, खास कर अमरीका पर इसके निम्न असर पड़ेगें. आप कह सकते है बात भारत की हो रही है और आप अमरीका की गा/बजा रहे हो. तो सुन लें अब से जो भारत करे वही सही है. आखिर दुनिया का दादा है, भई.
अब जब की भारत अमरीका बन गया है, देखें अमरीका की क्या हालत हो गई है.
आर्थिक प्रभाव :
अमरीका वाले वैश्वीकरण का विरोध करते है, जहाँ देखो वहाँ वडा-पाव के खोमचे खुल गए है. मैक-बर्गर को कोई पुछता ही नहीं. सारे पैसे-उड़ाऊ व स्टेटस मेंटेन करने वाले लोग बर्गर छोड़ वडा-पाव खाने लगे हैं. बोटल्ड कोला छोड़ स्टील के गिलास में निम्बु-पानी पीने लगे है. इस कृत्य को कुछ राष्ट्रवादी अमरीकी देशद्रोह व इंडीया परस्त कार्य मानते हुए निंदा करते है, तथा बर्गर व कोला के ज्यादा पौष्टिक होने का प्रचार करते है. अमरीकी वामपंथी अपनी सरकार पर भारत परस्त होने का आरोप लगाती है. वोल्मार्ट भारतीय कम्पनियों के लिए अमरीका के दरवाजे खोलने का विरोध कर रही है. हथियार उद्योग भारत की आक्रमण न करने की नीति का विरोध करता है.
सामाजिक प्रभाव :
तलाक के मामलो में कमी आयी है. माँ-बाप परेशान है, पूर्वी कल्चर के प्रभाव में लड़कीयाँ ता-उम्र एक ही निखट्टू से चिपकी रहती है. बच्चे भी हाय-हैलो छोड़ प्रणाम-स्रणाम करने लगे है. हर कोई अपने बच्चो को हिन्दी मीडियम में पढ़ाना चाहता है, मगर सभी अफोर्ड नहीं कर सकते. चुनाव जीत कर अमरीकी नेता हिन्दी बोलने लगते है, आम लोगो को समझ में नहीं आता वे कब भारतीय नेताओ से हिन्दी में क्या गिटर-पीटर कर आते है. परिवारवाद ने समाज में बैचेनी पैदा कर दी है. साफ-सफाई महत्त्वहीन हो गई है, कहीं भी मल-मुत्र त्याग एक संस्कार माना जाने लगा है. सेक्स शब्द से ही घृणा होने लगी है परिणामतः आबादी में भयंकर गति से बढ़ावा हो रहा है.
धार्मिक प्रभाव :
कुछ कट्टरपंथी सरकार से नाराज हैं की शंकराचार्य के अमरीका आगमन पर उनकी आगवानी राष्ट्रपति को करने की क्या आवश्यकता थी? देश में हिडेन एजेण्डा चलाया जा रहा है, हिन्दुधर्मांतरण का. हिन्दू मिश्नरी इसके लिए योग जैसी पद्धतियों का गलत सहारा ले रही है. देश से बड़ा धर्म हो गया है, लोग जात-पात में बटने लगे है.
खैर छोड़ो ये उबाऊ बाते, सुनिये मजेदार किस्सा. अमरीका को परमाणु विस्फोट कर परमाणु ताकत बनना है, भारत की दादागीरी बढ़ गई है, इधर केनेड़ा पिन किये हुए है. मगर हर प्रयास को रॉ पहले से ही ताड़ लेता है, और भारतीय प्रधानमंत्री के दबाव के आगे अमरीकी राष्ट्रपति झुक जाते है. ऐसे में दस-पन्द्रह राष्ट्रपतियों क कार्यकाल समाप्त हो जाता है. फिर जो राष्ट्रपति साहस करता है एन मौके पर उसकी सरकार गिर जाती है. उसके बाद वाले ने परमाणु विस्फोट सम्बन्धी जिस फाइल को साइन किया होता है उसे चूहे कुतर जाते है, तो एक की फाइल लालफीताशाही से गुजरती हुई गंतव्य तक पहुँचाती है तब तक दूसरे का कार्यकाल शुरू हो जाता है. इस बार भारी चौकसी बरतते हुए काम को सिरे लगाया जाता है, रॉ को भनक ही नहीं लगती, मगर हाय से दुर्भाग्य मटेरियल सप्लाय करने वाला ठेकेदार अमरीकी राष्ट्रपति का साला ही होता है, और परमाणु धड़ाका तो क्या फुस्स भी नहीं होता. मगर कागजादों में दिखाया जाता है की उम्मीद से भारी धमाका हुआ था. इतनी उन्नत तकनीक का प्रयोग हुआ की भारत के विकसित उपकरण भी उसे पकड़ नहीं पाये. हाँ धरती इतनी जोर से हिली की आस-पास के गाँवो में भारी क्षति हुई है, और सरकार से अनुदान की माँग की जाती है.
और सुनने की हिम्मत है या अमरीका के लिए भारत को भारत ही रहने दें.
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