| आ गया भारत का वॉलमार्ट? |
| मंतव्य | ||
| बुधवार , , 08 अगस्त | ||
या तो आप इसे बिल्कुल पसंद करेंगे या फिर बिल्कुल पसंद नहीं करेंगे. लेकिन भारत का वॉलमार्ट बनने का ख़्वाब देखने वाला रिलायंस समूह ठीक 5 दिन बाद अपने अति महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के साथ पदार्पण करने वाला है.
(फोटो सौजन्य: इस्कोन ग्रुप)
भारत का पहला रिलायंस मार्ट (नाम भी सूचक है!) अहमदाबाद में खुलने जा रहा है. वैसे इस मेगा स्टोर के खुलने के पहले ही इसके छोटे भाई के रूप में रिलायंस फ्रेश देश में अपनी जडे जमा चुका है. अंबानी बंधुओं का गुजरात प्रेम हो या फिर उनकी चालाक व्यापार पॉलिसी हो, उनके अमूमन हर प्रोजेक्ट की शुरूआत यहीं से होती है. यहाँ हर महानगर, नगर, कस्बे और गाँव और यहाँ तक की राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ साथ राज्य राजमार्गों पर भी रिलायंस फ्रेश लोगों को फ्रेश करके केश बटोरने मे जुटा लग रहा है.
वैसे रिलायंस रिटेल को लेकर हिन्दी ब्लॉग जगत में काफी बहस हो चुकी है. कई पॉडकास्ट भी इस विषय को समर्पित हो चुके हैं. लोगों के अपने अपने मत और अपनी अपनी राय है. कई लोग इसे भारत की उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में देखते है, कई इसे गरीबी औरअमीरी की रेखा चौड़ी करने की कार्यवाही मानते हैं. वास्तव में स्थिति यह है कि चाहे हम सब अपनी अपनी डफली बजाते रहें, रिलायंस वही करेगा जो वो चाहेगा. कभी कभी उनके इस तरह से अधिपत्य और एकाधिकार स्थापित करने की रणनीति को देखकर संशय उत्पन्न होता है. लेकिन यह भी सच है कि रिलायंस के इन तेजी से बढते कदमों को रोकने का कोई सार्थक तर्क और उपाय भी नहीं है. बहरहाल, रिलायंस मार्ट 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस, यह भी सूचक?) तक अहमदाबाद में और इस तरह भारत में शुरूआत करने जा रहा है. 2 लाख वर्ग फूट में फैले इस महाकाय स्टोर में वो सबकुछ मिलेगा जो आपको चाहिए. अंत में एक मज़ेदार बात: अहमदाबाद के गुरुकुल इलाके में जगह की भारी कमी है, इसलिए सारे डिपार्टमेंटल स्टोर को ना चाहते हुए भी एक दूसरे से सटकर अपनी दुकान खोलनी पड़ती है. कल मैने एक दृश्य देखा. एक दूसरे से कंधे से कंधा मिलाकर लड रहे- स्पेंसर, ट्रु मार्ट, सुभिक्षा और रिलायंस फ्रेश में भीड़ थी, और साथ ही सडक पर खडे सब्जी वालों के ठेलों पर भी भीड़ थी!! तो क्या यह माना जाए कि भारत का बाज़ार इतना बडा है कि सबके लिए जगह है? आप ही बताइए..
भारत अब 60 वर्ष का युवा होने जा रहा है! इससे गौरवशाली पर्व को मनाने के लिए हमने एक विभाग बनाया है -
भारत 60 वर्ष युवा, अब आगे... आप आमंत्रित हैं, अपने विचार प्रगट करने के लिए. टिप्पणियाँ
(7)
द्वारा प्रेषित जीतू , अगस्त 08, 2007 अंबानी बंधुओं का गुजरात प्रेम हो या फिर उनकी चालाक व्यापार पॉलिसी हो, उनके अमूमन हर प्रोजेक्ट की शुरूआत यहीं से होती ह..." इनके क्या, लगभग सभी के प्रोजेक्ट यहीं से शुरु होते है। मतलब साफ़ है भाई, खर्च करने की क्षमता। हर व्यक्ति अपना पाइलट प्रोजेक्ट सफ़ल करना चाहता है, अब बिहार मे तो कोई नया प्रोजेक्ट शुरु करेगा नही। मुम्बई/बैंगलौर अगला पड़ाव होता है अक्सर। report abuse
vote down
vote up
द्वारा प्रेषित sanjay tiwari , अगस्त 08, 2007
मेरे असहमत होने से रिलायंस मार्ट रूकनेवाला तो है नहीं. कल नौ आगस्त को दिल्ली में रिटेल में बड़ी कंपनियों के घुसने के खिलाफ एक धरना होने जा रहा है. वे अपना काम करें, हम अपना काम करेंगे.
Votes: +0
report abuse
vote down
vote up
द्वारा प्रेषित Amit , अगस्त 08, 2007
भई अपन तो इस तरह देखते हैं कि जितना अधिक competition होगा, लोगों को उतना लाभ होगा, क्योंकि उनको अच्छी चीज़ उचित/सस्ते दाम में मिलेगी। किसी का भी बाज़ार में अधिपत्य हो तो यह उपभोग्ताओं को बहुत दिक्कत होती है।
Votes: +0
report abuse
vote down
vote up
द्वारा प्रेषित समीर लाल , अगस्त 08, 2007
मुझे तो यह अच्छी खबर लगती है. यह मात्र मेरी सोच है, कोई विवाद नहीं.
Votes: +0
report abuse
vote down
vote up
द्वारा प्रेषित Pankaj bengani , अगस्त 09, 2007
नितिन बागला, जीतू, sanjay tiwari, Amit, समीर लाल,
Votes: +0
आप सभी का टिप्पणी देने के लिए बहुत धन्यवाद. समीरजी को यह खबर बहुत अच्छी लगी, मुझे भी लगी थी. अमित की बात सही है. जितुजी ने सही फरमाया यहाँ के लोगो की खरीद शक्ति तो है ही साथ ही गुजराती घुमक्कड और उत्साही भी होते हैं. संजितजी को शुभकामनाएँ. report abuse
vote down
vote up
|
||
किशोर बियानी (बिग बाजार वाले)अपनी पुस्तक इट हेप्पन्ड इन इन्डिया में लिखते हैं कि रिटेल वालों के लिये गुजरात का बजार एक तरह से अग्निपरीक्षा होता है...जिसने गुजरातियों को माल बेच लिया..समझो कहीं भी बेंच लेगा