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क्या ओर्कुट खतरनाक है!
बुधवार , , 22 अगस्त
pankajphoto  मंतव्य - पंकज बेंगाणी द्वारा



orkut ओर्कुट कोम्युनिटी संजाल बनाने ओर्कुट ब्युकोटेन ने क्या कभी सोचा होगा कि उनके इस रचनात्मक प्रोजेक्ट इस्तेमाल करने वाले सबसे अधिक लोग भारतीय होंगे. शायद नहीं. उन्होने यह भी नही सोचा होगा उनका प्रोजेक्ट एक दिन भारत मे इतना अधिक लोकप्रिय होगा कि भारतीय युवा उठते बैठतेसोते जागते ओर्कुट पर ही पडे रहेंगे!

कल मुझे दिखाया गया कि मेरे छोटे से पैतृक गाँव की भी दो ओर्कुट कम्युनिटी है. और तो और उसके 150 सदस्य भी हैं और ज्यादातर मेरे गाँव के युवा हैं. वे गाँव से ही ओर्कुट पर मेल मिलाप करते हैं. यह मेरे लिए आश्चर्यजनक खबर थी, क्योंकि मैं सोचता था कि मेरे गाँव में अभी इंटरनेट के बारे में ही ज्यादा जानकारी नही होगी. लेकिन यहाँ तो ओर्कुट कम्युनिटी भी है वो भी दो दो.

यह गूगल के लिए सचमुच रोमांचक समाचार हो सकता है. आज ओर्कुट की पैठ भारत की छोटी से छोटी जगह मे है. और अब यह बहस गर्म हो रही है कि क्या ओर्कुट भारतीय युवाओं पर गलत असर डाल रही है?

मुम्बई के अदनान पात्रावाला की हत्या के बाद तो यह बहस और भी गरम हो गई है. अदनान की हत्या उसके ओर्कुट दोस्तों ने की. वे लोग ओर्कुट पर ही मिले थे. उन्होने अदनान को मुम्बई के इनोर्बिट मॉल बुलाया और उसे अगवा कर लिया. पैसों के नशे मे चूर ये युवा इस हद तक बहक गए कि उन्होने अदनान के घर वालों से पहले फिरोती मांगी फिर पुलिस तक बात पहुँचने पर डरकर हत्या कर दी.

आज मैने मेरे गुजराती समाचार पत्र को खोला तो मुख्य खबरों में से एक खबर थी, "ओर्कुट से बढ रहा है खतरा"! इस खबर में बताया गया कि ओर्कुट की वजह से युवा ऐसे लोगों के सम्पर्क मे आ रहे है जिनको कोई ठोर ठिकाना नही है. जिन्होंने अपनी गलत प्रोफाइल बना रखी है, जो असामाजिक तत्व हैं. उनकी संगत में देश का युवा बर्बाद हो रहा है.

इसी समाचार पत्र की सप्लीमेंट्री की हेडिंग है - "अहमदाबादीयो सावधान! ओर्कुट से बचें". मुझे ये दोनो खबर ही बेतुकी लगी. यह सही है कि ओर्कुट प्रोफाइल से किसी व्यक्ति की प्रामाणिकता और ईमानदारी का पता नही चलता. वह कोई भी हो सकता है और कोई नही भी हो सकता है. लेकिन यह तो प्रयोक्ता के विवेक पर निर्भर है कि वह किन लोगों से मिल रहा है और किन लोगो के साथ घूम रहा है. अदनान हत्या कैस से ओर्कुट को जोड़कर इस कम्युनिटी साइट को बदनाम करना दुर्भाग्यपूर्ण ही है.

अदनान की हत्या करने वाले लोग उसके घर आते जाते थे. उनसे मेलजोल भी था. ऐसा नही है कि वे लोग सिर्फ ओर्कुट पर ही मेल मिलाप करते थे. तो फिर उसकी हत्या के लिए ओर्कुट को दोषी ठहराना बेवकुफी ही है.

लेकिन दुसरी तरह मै यह भी जोडना चाहता हुँ कि मुझे ऐसा लगता है कि देश के युवा ओर्कुट का फायदा कम उठा रहे हैं लेकिन समय अधिक बर्बाद कर रहे हैं. ओर्कुट से हम हमारे सम्पर्क बढा सकते हैं, और दूर दराज बैठे हमारे मित्रो के सम्पर्क में रह सकते हैं. यह सही है लेकिन ओर्कुट के पीछे घंटो खपाना, काम धाम छोडकर सारा दिन ओर्कुट पर स्क्रेप लिखना यह बिल्कुल सही नहीं कहा जा सकता.

जैसा कि मैने कहा सबकुछ निज विवेक पर निर्भर करता है. जितना जल्दी सिखें उतना अच्छा. जागे तब सवेरा!




टिप्पणियाँ (7)add
हिंदीबात
द्वारा प्रेषित Manisha , अगस्त 22, 2007
असली दोस्ती छोड़ कर लोग इंटरनेट पर दोस्ती करते हैं जो कि कभी सच्ची नहीं हो सकती। आखिर आप बचपन से जिनके साथ पले-बढ़े हैं, साथ रहते हैं , वही तो अच्छे दोस्त हो सकते हैं। पता नहीं ओरकुट पर कौन सी दोस्ती होती है?
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द्वारा प्रेषित सागर नाहर , अगस्त 22, 2007
हममें एक खासियत है किसी भी चीज में से उसकी बुराईयों को बहुत जल्दी पकड़ लेते हैं, अच्छाईयाँ हमें जल्दी नजर नहीं आती। ओर्कुट में बहुत सी काम की और अच्छी कम्यूनिटी है जैसे ओपन सोर्स, गीत संगीत आदि।
अदनान पातरा वाला की हत्या के पीछे सिर्फ ओर्कुट को दोष देना गलत है, माता पिता कि जिम्मेदारी नहीं बनती कि उनका बेटा जो अभी लाईसेन्स लेने की उम्र का भी नहीं हुआ स्क्वोडा गाड़ी लेकर घूमता रहता है, किन दोस्तों से मिलता जुलता है?
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नारद संदेश
द्वारा प्रेषित बृजेश श्रीवास्तव , अगस्त 22, 2007
आजकल मीडिया के माध्यम से किसी भी विषय का नकारात्मक पक्ष सामने लाया जाता है। ऑर्कुट का सकारात्मक पक्ष भी सामने लाने की आवश्यकता है। आपने यह जानकारी दी इसके लिए आपको धन्यवाद।
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द्वारा प्रेषित विकास , अगस्त 22, 2007
तकनीकी ग्यान का प्रयोग तो प्रयोक्ता के विवेक पर ही निर्भर करता है.
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द्वारा प्रेषित श्रीश शर्मा , अगस्त 22, 2007
भईया कुँआ पानी लेने के लिए बनाया जाता है, कोई अगर उसमें गिरे जाए तो इसमें कुँआ बनाने वाले का क्या दोष।
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द्वारा प्रेषित Amit , अगस्त 22, 2007
सही कै रिये हो पंकज बाबू। वो सालभर पहले इंडिया-टीवी पर जिस कार्यक्रम के लिए मुझे बुलाया था, उसमें भी इसी तरह की बातें उठी थीं, तब मैंने भी यही कहा था, इंटरनेट पर जो लोग हैं वो कोई मंगल ग्रह से तो आए नहीं हैं, यही हमारे समाज के ही हैं, तो उनसे भी किसी प्रकार का रिश्ता कायम करने से पहले उसी तरह अपने विवेक से काम लेना चाहिए जिस तरह वास्तविक दुनिया में किसी अंजान से मिलने पर लेते हैं। लेकिन लोगों को ये बात पल्ले नहीं पड़ती, इंटरनेट जैसी चीज़ पर दोष मढ़ देना बहुत आसान लगता है। कल को पड़ोस का ही कोई अपहरण/हत्या कर जाए तो किसको दोष देंगे ये महानुभाव?

असली दोस्ती छोड़ कर लोग इंटरनेट पर दोस्ती करते हैं जो कि कभी सच्ची नहीं हो सकती। आखिर आप बचपन से जिनके साथ पले-बढ़े हैं, साथ रहते हैं , वही तो अच्छे दोस्त हो सकते हैं। पता नहीं ओरकुट पर कौन सी दोस्ती होती है?

मनीषा जी, यह आप किस आधार पर कह सकती हैं? क्या आपको दोनों पहलुओं(वास्तविक संसार की दोस्ती और इंटरनेट की दोस्ती) का अनुभव रहा है? यदि हाँ तो बाँट सकती हैं तो अवश्य बाँटिए। कुछेक मित्र आदि जिनके साथ आज मेरा उठना-बैठना है, घूमना फिरना होता है वे मुझे इंटरनेट पर ही मिले थे। जिस कंपनी के लिए मैं पिछले तीन वर्षों से कार्य कर रहा हूँ मैं कभी उसके ऑफिस नहीं गया, अपने बॉस से कभी रूबरू नहीं मिला, तो क्या वो विश्वास योग्य नहीं है?

भईया कुँआ पानी लेने के लिए बनाया जाता है, कोई अगर उसमें गिरे जाए तो इसमें कुँआ बनाने वाले का क्या दोष।

वाह पंडित जी, क्या मिसाल दी है, क्या बात की है, तुम्हारे ओर्कुट प्रोफाईल की कसम मज़ा आ गया!! smilies/grin.gif
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हमसे भी
द्वारा प्रेषित समीर लाल , अगस्त 22, 2007
कभी हमसे भी बात कर लिया करो न आर्कुट महाराज स्क्रेप देकर smilies/grin.gif
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