| तरकश: सफलता का एक साल |
| विशेष | |||
| शनिवार , , 25 अगस्त | |||
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टिप्पणियाँ
(15)
द्वारा प्रेषित Abhishek Patni , अगस्त 25, 2007
तरकश की समस्त टीम और सभी पाठकों को पहली वर्षगांठ की बहुत बहुत बधाई । तरकश ने एक साल में जिस मुकाम को छुआ हैं शायद ही किसी अन्य हिन्दी वेबसाइट ने छुआ हो । मॆं आशा करता हूँ कि तरकश की समस्त टीम और हम सभी पाठक इसी लगन से इसे ओर भी ऊँचे मुकाम पर ले जाएँगे ।
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द्वारा प्रेषित रवि , अगस्त 25, 2007
तरकश की समर्पित टीम को उनके प्रथम, सफल सालगिरह पर हार्दिक बधाई
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द्वारा प्रेषित नितिन बागला , अगस्त 25, 2007
प्रथम वर्षगांठ की बधाई ।
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द्वारा प्रेषित manoj singh , अगस्त 25, 2007
pratham vershagath par subh kamnaei
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द्वारा प्रेषित RC Mishra , अगस्त 25, 2007
Badhaae ho,
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varSh GaanTh ki tarakasha ke report abuse
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द्वारा प्रेषित गरिमा , अगस्त 25, 2007
हर पल एक शुरूआत की तरह है... तरकश इसी तरह फैलता फलता रहे, और इसका वर्षगाँठ हजारो साल तक मनता रहे
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द्वारा प्रेषित arvind chaturvedi , अगस्त 25, 2007
बधाईयां.
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आप लोगों ने अपनी सफलता के झंडे गाढ दिये हैं. आप लोग इसी प्रकार सफलता के नये सोपान चढते चलें,यही कामना है. report abuse
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द्वारा प्रेषित शशि सिंह , अगस्त 26, 2007
करत करत अभ्यास जड़मति होत सुजान
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छूटे लगे तरकश से अब सफलता के बाण बधाई report abuse
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द्वारा प्रेषित जीतू , अगस्त 26, 2007
तरकश के एक साल पूरा होने पर बहुत बधाई। टीम तरकश(छवि मीडिया) बधाई के पात्र है। इस टीम के द्वारा हिन्दी चिट्ठाजगत को किए गए योगदान भी बहुत महत्वपूर्ण है। भावी भविष्य के लिए शुभकामनाओं के साथ।
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(निवेदन : अरे यार, टिप्पणी मे टाइटिल वाले बक्से का क्या काम? इसे या तो हटाओ या फिर इसको पोस्ट टाइटिल वाले से प्रिफ़िल करो।) report abuse
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द्वारा प्रेषित श्रीश शर्मा , अगस्त 26, 2007
तरकश ने दिखा दिया है कि दिल में जज्बा हो तो हर मंजिल मुमकिन बनाई जा सकती है। तरकश टीम को सालगिरह की बहुत-बहुत मुबारकें।
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तरकश कि पुरी टीम को मेरी और से हादिक़ बधाई | ये शायद मेरा पहला तजुर्रबा होगा कि मे हिन्दी मे लिखने लगा हुँ मेने शायद अपने छात्र जीवन के बाद पहली बार ही हिन्दी मे कुछ लिखा है|
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हर दिन से प्यारा लगता है हमे ये खास दिन, जिसे बिताना नहि चहते हुम आप बिन, वेसे तो दिल देता है सदा ही दुआ अपको, फिर भी कहता है मुबारख हो आपको ये जन्मदिन..... report abuse
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द्वारा प्रेषित sanjay patel , सितम्बर 01, 2007
तरकश के तीर बने रहें अचूक
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परिवेश को बनाते रहें विशेष मनुष्यता को दें विस्तार मन से शुभकामनाएँ अशेष. report abuse
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जैसा अंकित ने कहा, मैं भी कई सालों के बाद हिन्दी में लिख रहा हूँ.
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१९६६ में High School छोड़ने के बाद, फ़िर से हिन्दी में लिखने का मौका मिल रहा है । मेरी मतॄभाषा हिन्दी नहीं है लेकिन मुझे इस भाषा से लगाव है । मेरी पढ़ाई English medium में हुई थी और इतने सालों से मुझे अपने पेशे में हिन्दी का प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिला । लिखित हिन्दी से दूर रहा हूँ और इसका मुझे खेद है । अब तक Internet पर केवल अंग्रेज़ी का बोलबाला था । संयोग से तरकश, Podbharti और लोकमन्च का पता चला । एक साल से आप इस site को चला रहे हैं और मुझे पता भी नहीं था । संकोच छोड़िये. आप लोगों को और जोश से अपना web site का प्रचार करना चाहिये । मेरा मानना है कि हिन्दी और अन्य प्रान्तीय भाषाओं ने internet का पूरा लाभ उठाया नहीं । मुझे आपके प्रयत्नों पर गौरव है और आप लोगों की उन्नति और अधिक सफ़लता का कामना करता हूँ । G विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु report abuse
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