Tarakash.com, Hindi News, india news, entertainment, Hindi site, Hindi website, Hindi portal, तरकश - Hindi Information and Entertainment Portal

तरकश: सफलता का एक साल
विशेष
शनिवार , , 25 अगस्त

pankajphoto

  पंकज बेंगाणी 


 

 

 

 

 

 

 

1-year

 

 इसकी शुरूआत एक छोटे से ख़्वाब से हुई थी. यह ख़्वाब था कि हिन्दी में लिखने वालों का एक समूह बने और एक ऐसा संजाल बनाया जाए जिसमें उनके द्वारा लिखे गए लेख प्रकाशित हों. ये सपना संजयभाई ने देखा था और उन्होने जोगलिखी नामक चिट्ठा शुरू किया था. उसके बाद मैने और रवि ने भी लिखना शुरू किया. हमारे सभी चिट्ठों की फीड को हम तरकश.कॉम पर दिखाते थे. तब तरकश.कॉम एक सामान्य HTML संजाल हुआ करती थी. यह नवम्बर 2005 की बात है.


इसके बाद तरकश.कॉम के स्वरूप को बदलने की कोशिश शुरू हुई. अब इसे जूमला पर बनाया जा रहा था और यह एक समूह ब्लॉग बनने वाला था. कई ट्रायल के बाद तरकश.कॉम विधिवत रूप से 25 अगस्त 2006 को अपने मूल स्वरूप में शुरू हुई.

कल:

तरकश.कॉम जब शुरू हुई तब इसमें 6 मुख्य लेखक थे - संजयभाई, समीरलालजी, सागरभाई, निधि श्रीवास्तव, शुएब और मैं. हमने कोशिश की कि हर विषय से सम्बन्धित कोई ना कोई पोस्ट इस संजाल पर रखते हैं. हालाँकि लेखकों के उपर कोई बाध्यता नहीं थी कि उन्हे कब कितना लिखना है (आज भी नही है). निधी श्रीवास्तव एक ही लेख लिख पाई और फिर अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के चलते तरकश के दायित्व नही निभा पाई. उनकी कमी आज भी महसूस होती है.

थोडे समय के बाद हमे लगने लगा कि तरकश का स्वरूप समूह ब्लॉग के रूप में रखना ठीक नही होगा, और इससे इस संजाल को एक अलग पहचान भी नही मिलेगी. तब तरकश के नए अवतार पर काम शुरू हुआ. हम इसे हिन्दी का पहला ज्ञानरंजन यानि कि ज्ञान और मनोरंजन का पोर्टल बनाना चाहते थे, जिसकी अपनी एक टीम हो जो इस संजाल को चलाए. धीरे धीरे इस पर काम होने लगा. और फिर जनवरी 2007 मे तरकश.कॉम का ज्ञानरंजन पॉर्टल के रूप में एक नया अवतार सामने आए.

एक साल पहले तरकश की अलेक्सा रेटिंग थी 30,00,000 के लगभग.


आज:

आज तरकश.कॉम अपने नए स्वरूप में दर्शकों के सम्मुख है. यहाँ ज्ञान, मनोरंजन, मीडिया, विज्ञापन, साहित्य, पॉडकास्ट, विज्ञान, स्वास्थ्य आदि अनेक विषयों पर लेख प्रकाशित होते हैं. तरकश.कॉम सबसे अधिक भारत से और उसके बाद अमरीका मे देखा जाता है. अमरीका मे रहने वाले गुजराती अप्रवासी भारतीयों को यह संजाल काफी पसंद है. तरकश.कॉम का दर्शक वर्ग हिन्दी चिट्ठासंसार से काफी विस्तृत है. हमने पाया है कि तरकश.कॉम अफ्रीका और पेसेफिक के छोटे छोटे देशों मे भी खोला जाता है. आज भारतीय लोगों की पहुँच विश्व के कोने कोने में है और शायद यही भारतीय लोग तरकश.कॉम के माध्यम से देश से जुडे हुए हैं.

आज तरकश की अलग टीम है. अब इस संजाल में कॉलम नामक अलग विभाग है, जहाँ रवि रतलामी, समीरलाल, संजयभाई, मनोज सिंह, सागर नाहर जैसे उत्कृष्ट लेखक अपने विचार प्रकट करते हैं. इसके अलावा टीम तरकश संजाल के बाकी विभागों के लिए सामग्री जुटाती रहती है.

हमारी कोशिश यह नही है कि हम ज्यादा से ज्यादा लेख डालते रहें. परंतु हमारी कोशिश यह है कि हम कम ही सही लेकिन ऐसे लेख डालें जो सचमुच ज्ञानवर्धक हों, जिन्हे आप हिन्दी में कहीं और ना पढ पाएँ हों.

आज भी हम कुछेक अपवाद छोड़कर किसी भी पूर्व प्रकाशित लेख को तरकश.कॉम पर पुनः प्रकाशित नही करते हैं. हम किसी भी चिट्ठे से लेख नहीं लेते हैं. तरकश.कॉम पर प्रकाशित होने वाले सभी लेख मूलतः तरकश के लिए ही लिखे गए होते हैं.

आज तरकश की अलेक्सा रेटिंग 5,80,000 के करीब है.


तरकश.कॉम के अन्य प्रोजेक्ट:

तरकश.कॉम के सुचारु रूप से कार्यरत हो जाने के बाद हमने अन्य कई प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया. और एक के बाद एक नए नए प्रोजेक्ट कार्यरत होने लगे.

तरकश जोश: यह युवाओं के लिए युवाओं द्वारा बनाया गया संजाल है. यहाँ कैरियर, रिलेशनशिप, डेटिंग, साहित्य, समाज आदि अनेक विषयों पर लेख प्रकाशित किए जा रहे हैं. यह संजाल अंग्रेजी में है और इसकी अपनी अलग टीम है, जिसमें अभिजीत चक्रबर्ती मुख्य सम्पादक है. इसके अलावा अंकित पाटनी, अभिषेक, खुशी बेंगाणी, और अर्मेंडो हल्दर मुख्य लेखक हैं.

तरकश वीडियो: इस विभाग में हम भारत से सम्बन्धित विभिन्न श्रेणियों में वीडियो लगाते हैं. इस विभाग में दर्शक भी अपनी पसंद के वीडियो लगा सकते हैं.

तरकश कॉलम: यह तरकश का ब्लॉग विभाग है, जिसमें फिलहाल रवि रतलामी, संजयभाई, मनोज सिंह, समीरलाल और मेरे अलावा सागर नाहर भी लिखते हैं.

तरकश प्रवाह: इस विभाग में आप विभिन्न फीड एग्रीगेटरों की फीड एक साथ देख सकते हैं. इसके अलावा हिन्दी के पॉडकास्ट व अन्य संजालों की फीड भी यहाँ उपलब्ध है.

नए प्रोजेक्ट:

नुक्कड: नुक्कड, तरकश समूह का फोरम है. इसमें तकनीक और मनोरंजन पर अधिक ध्यान दिया गया है. नुक्कड की मुख्य भाषा हिन्दी ना होकर अंग्रेजी है और इसके प्रयोक्ता तकनीकी और मीडिया फ़ील्ड से हैं. नुक्कड पर अंग्रेजी के अलावा हिन्दी में भी पोस्ट किया जा सकता है. इससे मूलतः तो यह बहु भाषी फोरम है.

रसोई: रसोई, तरकश समूह की रेसेपी संजाल है. भारत के विभिन्न प्रांतों की व्यंजन विधि यहाँ प्रकाशित की जा रही है. हिन्दी मे बनी यह साइट प्रयोक्ताओं के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हो सकती है. इसमें प्रयोक्ता भी अपनी रेसेपी डाल सकते हैं.

भविष्य के प्रोजेक्ट:

इस समय कई नए विचारों पर बातचीत चल रही है. इसमें से एक पर्यावरण से सम्बन्धित विभाग होगा जो तरकश पर शीघ्र ही प्रकाशित होगा.


क्या रहा हिट क्या रहा फ़्लॉप:

विचार आते रहते हैं और उनपर कार्य भी होता रहता है. जरूरी नही कि हमारे सभी प्रोजेक्ट चले ही हों. कई आइडिया फ़्लॉप हो गए थे. प्रस्तुत है हिट फ़्लॉप का लेखा जोखा -

3 सबसे फ़्लॉप विचार:

1. तोरण : तोरण तरकश का गुजराती विभाग था. हमारा विचार था कि हम तोरण में गुजराती रचनाएँ प्रकाशित कर गुजराती पाठकों को सक्रिय रूप से जोड पाएंगे. लेकिन यह प्रोजेक्ट फ़्लॉप हो गया.

2. समीक्षाएँ: फिल्म समीक्षाओं में फिल्म रिलीज होने के दिन ही हिन्दी में समीक्षा छापने वाले थे. यह प्रोजेक्ट भी फ़्लॉप रहा.

3. खेल: तरकश पर खेल का एक विभाग शुरू किया तब मुझे उम्मीद थी कि यह खूब चलेगा, लेकिन यह उतना ही नहीं चला. लेकिन यह विभाग आज भी मौजूद है.

3 सबसे हिट विचार:

1. तरकश पॉडकास्ट: तरकश पॉडकास्ट तरकश का सबसे हिट प्रोजेक्ट रहा है. पॉडकास्ट को लेकर हम सबसे अधिक आशंकित थे लेकिन यह प्रोजेक्ट  इतना सफल रहा कि खुद हमें यकीन नहीं हुआ. खुशी के रूप में हिन्दी जगत को एक युवा और चुलबुली पॉडकास्ट जोकी मिली. फिलहाल खुशी की परिक्षाओं के कारण यह विभाग सुप्त है जो जल्द ही धमाके के साथ अपने दूसरे चरण में शुरू होने जा रहा है.

2. तरकश जोश: जोश ने उम्मीद से कहीं अच्छा प्रदर्शन किया. तरकश.कॉम के बाद आज इस संजाल की सर्वाधिक हिट है. इसकी अपनी टीम और मैनेजमेंट है.

3. नुक्कड: अभी भी बीटा टेस्टींग से ही गुज़र रहा यह प्रोजेक्ट अपने शैशव काल में ही हिट हो रहा है.

तरकश एक संजाल से अधिक तो एक विचार है. यह नित नए स्वरूप में आपके समक्ष आता रहा है और आता रहेगा. आप सभी का साथ और प्रेम बना रहेगा ऐसी हमारी कामना है. इस दिन हम उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने तरकश बनाने और चलाने में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दिया है.

इसमें ईस्वामी, जितुजी, समीरलालजी, रवि रतलामीजी, शुऐब, सागर नाहरजी, निधि श्रीवास्तव, रवि कामदार, विरल पूजारा, भावना कुँअरजी, अभिजीत चक्रबर्ती, ब्रिंदा शाह, जीनल शाह, अंकित पाटनी, भाविन शाह, अर्मेंडो हल्दर, अनुभव, खुशी बेंगाणी, अभिषेक पाटनी, मनोज सिंह आदि का विशेष योगदान रहा है. और आखिर में पूरी टीम छवि भी बधाई की पात्र है.


टिप्पणियाँ (15)add
Happy Anniversary
द्वारा प्रेषित Abhishek Patni , अगस्त 25, 2007
तरकश की समस्त टीम और सभी पाठकों को पहली वर्षगांठ की बहुत बहुत बधाई । तरकश ने एक साल में जिस मुकाम को छुआ हैं शायद ही किसी अन्य हिन्दी वेबसाइट ने छुआ हो । मॆं आशा करता हूँ कि तरकश की समस्त टीम और हम सभी पाठक इसी लगन से इसे ओर भी ऊँचे मुकाम पर ले जाएँगे ।
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
बधाई!
द्वारा प्रेषित रवि , अगस्त 25, 2007
तरकश की समर्पित टीम को उनके प्रथम, सफल सालगिरह पर हार्दिक बधाई smilies/smiley.gif
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित नितिन बागला , अगस्त 25, 2007
प्रथम वर्षगांठ की बधाई ।
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
badhai
द्वारा प्रेषित manoj singh , अगस्त 25, 2007
pratham vershagath par subh kamnaei
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
Badhai Ho
द्वारा प्रेषित RC Mishra , अगस्त 25, 2007
Badhaae ho,
varSh GaanTh ki
tarakasha ke
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित सागर नाहर , अगस्त 25, 2007
तरकश को सपलतापूर्वक एक साल पूरा करने पर हार्दिक बधाई।
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
बधाई
द्वारा प्रेषित गरिमा , अगस्त 25, 2007
हर पल एक शुरूआत की तरह है... तरकश इसी तरह फैलता फलता रहे, और इसका वर्षगाँठ हजारो साल तक मनता रहे smilies/smiley.gif
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
badhaaee
द्वारा प्रेषित arvind chaturvedi , अगस्त 25, 2007
बधाईयां.
आप लोगों ने अपनी सफलता के झंडे गाढ दिये हैं.
आप लोग इसी प्रकार सफलता के नये सोपान चढते चलें,यही कामना है.
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
सफलता के बाण
द्वारा प्रेषित शशि सिंह , अगस्त 26, 2007
करत करत अभ्यास जड़मति होत सुजान
छूटे लगे तरकश से अब सफलता के बाण

बधाई smilies/smiley.gif
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
बहुत बहुत बधाई
द्वारा प्रेषित जीतू , अगस्त 26, 2007
तरकश के एक साल पूरा होने पर बहुत बधाई। टीम तरकश(छवि मीडिया) बधाई के पात्र है। इस टीम के द्वारा हिन्दी चिट्ठाजगत को किए गए योगदान भी बहुत महत्वपूर्ण है। भावी भविष्य के लिए शुभकामनाओं के साथ।


(निवेदन : अरे यार, टिप्पणी मे टाइटिल वाले बक्से का क्या काम? इसे या तो हटाओ या फिर इसको पोस्ट टाइटिल वाले से प्रिफ़िल करो।)
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
बधाईयाँ जी बधाईयाँ
द्वारा प्रेषित श्रीश शर्मा , अगस्त 26, 2007
तरकश ने दिखा दिया है कि दिल में जज्बा हो तो हर मंजिल मुमकिन बनाई जा सकती है। तरकश टीम को सालगिरह की बहुत-बहुत मुबारकें।
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
मुबारख हो आपको ये जन्मदिन
द्वारा प्रेषित ankit , अगस्त 27, 2007
तरकश कि पुरी टीम को मेरी और से हादिक़ बधाई | ये शायद मेरा पहला तजुर्रबा होगा कि मे हिन्दी मे लिखने लगा हुँ मेने शायद अपने छात्र जीवन के बाद पहली बार ही हिन्दी मे कुछ लिखा है|

हर दिन से प्यारा लगता है हमे ये खास दिन,
जिसे बिताना नहि चहते हुम आप बिन,
वेसे तो दिल देता है सदा ही दुआ अपको,
फिर भी कहता है मुबारख हो आपको ये जन्मदिन.....

report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित sanjay patel , सितम्बर 01, 2007
तरकश के तीर बने रहें अचूक
परिवेश को बनाते रहें विशेष
मनुष्यता को दें विस्तार
मन से शुभकामनाएँ अशेष.
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित G Vishwanath , सितम्बर 03, 2007
जैसा अंकित ने कहा, मैं भी कई सालों के बाद हिन्दी में लिख रहा हूँ.
१९६६ में High School छोड़ने के बाद, फ़िर से हिन्दी में लिखने का मौका मिल रहा है ।
मेरी मतॄभाषा हिन्दी नहीं है लेकिन मुझे इस भाषा से लगाव है ।
मेरी पढ़ाई English medium में हुई थी और इतने सालों से मुझे अपने पेशे में हिन्दी का प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिला ।
लिखित हिन्दी से दूर रहा हूँ और इसका मुझे खेद है ।
अब तक Internet पर केवल अंग्रेज़ी का बोलबाला था ।
संयोग से तरकश, Podbharti और लोकमन्च का पता चला ।
एक साल से आप इस site को चला रहे हैं और मुझे पता भी नहीं था ।
संकोच छोड़िये. आप लोगों को और जोश से अपना web site का प्रचार करना चाहिये ।
मेरा मानना है कि हिन्दी और अन्य प्रान्तीय भाषाओं ने internet का पूरा लाभ उठाया नहीं ।
मुझे आपके प्रयत्नों पर गौरव है और आप लोगों की उन्नति और अधिक सफ़लता का कामना करता हूँ ।

G विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित preeti h.tailor , अक्टूबर 02, 2007
jo log naye vicharon ko sadaiv apnate hai unki safalata par koi shak nahin kar sakata .
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
टिप्पणी लिखें
quote
bold
italicize
underline
strike
url
image
quote
quote
smile
wink
laugh
grin
angry
sad
shocked
cool
tongue
kiss
cry
smaller | bigger

busy
 


लोगिन करें






क्या आप अपना कूटशब्द भूल गये हैं?
क्या आप ने अभी तक खाता नहीं खोला? खाता खोलें

फ़ीड सबस्क्राइब करें


आपका Email ID: