| चिट्ठाकार स्टेपनी उर्फ चिट्ठा आउटसोर |
| रवि-वार्ता | |||
| सोमवार , , 10 सितम्बर | |||
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‘चिट्ठाकार स्टेपनी’ शब्द से आप चौंक गए होंगे. स्वाभाविक है. जरा धैर्य से आगे पूरा पोस्ट पढ़ें. आपकी जिज्ञासा शांत तो होगी ही, हो सकता है आपको सफल चिट्ठाकारी के लिए कोई धांसू आइडिया भी मिल जाए.
हाल ही में राजस्थान में एक बड़ी बस दुर्घटना में कोई सौ से ऊपर व्यक्तियों की अकाल मृत्यु हो गई. अब ये दीगर बात है कि 70 सवारी ढोने की क्षमता वाले बस में ऊपर नीचे और छत मिलाकर कोई दो सौ से ऊपर यात्री सवार थे. और सवारी भी भगवान दर्शन के लिए लगने वाले सालाना मेले में जाने वालों की थी. आरंभिक जांच पड़ताल से खबरें आईं कि बस को ड्राइवर का स्टेपनी चला रहा था. ‘ड्राइवर का स्टेपनी’ शब्द से आप फिर से चौंक गए होंगे. बिलकुल. मैं भी चौंक गया था. दरअसल उस बस के ड्राइवर ने अपनी ड्यूटी किसी और व्यक्ति को दे दी थी – कुछ इस तरह से – जैसे कि ड्राइवर को दिन भर ड्यूटी के दो सौ रुपये पगार के मिलते थे तो उसने सौ रुपए अपने पास रखे और बाकी बचे सौ रुपये से किसी अन्य व्यक्ति को अपनी जगह ड्राइवरी पर लगा दिया. हींग लगे न फिटकरी की तर्ज पर – नौकरी बजे न चाकरी, पगार पक्की हो जाए! वाला मामला था. वाह, क्या बात है! बहुत पहले कुछ ऐसा ही किस्सा आयकर विभाग का सुना था. काम की अधिकता (व अतिरिक्त रिसोर्सेज! की सहज सुलभता) के चलते वहां के बाबुओं ने लोकल आउटसोर्सिंग का बढ़िया तरीका ढूंढ निकाला था. (हाल ही में रजिस्ट्रार ऑफिस से भी ऐसी ही खबर आई थी...) बाबुओं ने अपने खर्चे पर अतिरिक्त दिहाड़ी कर्मचारी रख रखे थे, जो दफ़्तर में उनके हिस्से का काम करते थे. और इस तरह बाबुओं का चाय-पान व गप्प बाजी का उनका मूल अधिकार बरकरार रह पाता था. अन्यथा बेचारे बाबू तो काम के बोझ के मारे दब ही जा रहे थे. ‘ड्राइवर का स्टेपनी’ शब्द को समझते ही मेरे चिट्ठाकार मन में भी अजीब खयाल दहाड़ें मारने लगा. सोचता हूँ कि मैं भी चिट्ठाकारी का आउटसोर्सिंग करूं. अपने लिए स्टेपनी चिट्ठाकार लगाऊँ. वो मेरे बदले चिट्ठा लिखा करेगा, साथी चिट्ठाकारों के चिट्ठों पर टिप्पणियाँ किया करेगा और गाहे बगाहे विवादित(?¿?) चिट्ठे पोस्ट किया करेगा ताकि अपना चिट्ठा धड़ाधड़ छप रहे चिट्ठासूची में टॉप पर रहे. जाहिर है, अपने स्टेपनी चिट्ठाकार को गूगल एडसेंस से कमाई का कुछ हिस्सा (नेगोशिएबल) मैं देने को मैं तैयार हूँ. अभी मैं ज्यादातर समय बाहर रहा तो मेरा यह स्तम्भ विधवा के सूनी मांग की तरह रिक्त बना रहा. मेरा स्टेपनी चिट्ठाकार ऐसा कतई नहीं होने देगा, बल्कि वो तो दिन में छः पोस्ट के हिसाब से कोई तीन चिट्ठों में पोस्ट लिखा करेगा. और, यदि बात बन जाए तो मैं तो अपना कोई तीन दर्जन स्टेपनी चिट्ठाकार काम पर लगा लूंगा. तो, यदि आप पाठक बंधु इस चिट्ठाकार का स्टेपनी चिट्ठाकार बनना चाहते हैं तो तत्काल आवेदन करें. आवेदन में अपने बायोडाटा सहित कोई एक पेज का चिट्ठा-पोस्ट यह बताते हुए संलग्न करें कि आप अपने आप को एक सफल स्टेपनी चिट्ठाकार के रूप में क्यों और कैसे देखते हैं. अनुभवी स्टेपनी (क्या पता लोग पहले से ही काम में जुटे हों – ये कोई नायाब विचार थोड़े ही है!) चिट्ठाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी व उन्हें एडसेंस कमाई का ज्यादा हिस्सा दिया जाएगा. तो, सोच क्या रहे हैं? तत्काल ही कुंजीपट की कुंजियों को दबाना शुरू कीजिए और लिख डालिए अपना धांसू आवेदन पोस्ट. चिट्ठाकार स्टेपनी की एक नई दुनिया, एक नया स्वर्णिम कैरियर आपका इंतजार कर रहा है जहाँ, यकीन मानिए, भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है. (पुनश्च : यदि बढ़िया प्रस्ताव मिले तो यह चिट्ठाकार स्वयं स्टेपनी चिट्ठाकार बनने को तैयार है. अतः उत्तम प्रस्तावों का स्वागत है.) व्यंज़ल बेहतर मूल है या है स्टेपनी यूँ अब हर लाइफ़ है स्टेपनी नौकर हो या शौहर अब तो सभी को चाहिए है स्टेपनी प्यार के हाट में चलेगा वो जिस का जिगर है स्टेपनी वास्तव में फिर कैसा होगा दिखाया अभी जो है स्टेपनी जीवन के उपक्रम में रवि बन के रह गया है स्टेपनी
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टिप्पणियाँ
(11)
द्वारा प्रेषित Pratik Pandey , सितम्बर 10, 2007
हमउ स्टेपनी बनने के लिए तैयार हैं... कोई सुन रहा है?
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द्वारा प्रेषित अरुण , सितम्बर 10, 2007
हम हू ना..? अब अगर कोई और आया या आपने स्लेक्ट किया तो पंगा पक है..
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द्वारा प्रेषित Zakir Ali 'Rajneesh' , सितम्बर 10, 2007
बहुत धांसू आइडिया है। मैं भी सोच रहा हूं आवेदन कर ही दूं।
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द्वारा प्रेषित शास्त्री जे सी फिलिप् , सितम्बर 10, 2007
गुर अच्छा बताया, लेकिन पूरी आमदनी आपको न मिल पायगी. हम भी क्यू में आपके ठीक पीछे खडे है -- शास्त्री जे सी फिलिप
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जिस तरह से हिन्दुस्तान की आजादी के लिये करोडों लोगों को लडना पडा था, उसी तरह अब हिन्दी के कल्याण के लिये भी एक देशव्यापी राजभाषा आंदोलन किये बिना हिन्दी को उसका स्थान नहीं मिलेगा. report abuse
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द्वारा प्रेषित स्टेपनी-समीर लाल की , सितम्बर 10, 2007
भाई जी
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फुल टाईम तो समीर लाल की उड़न तश्तरी पर ड्यूटी है. आपके यहाँ पार्ट टाईम और कुछ ज्यादा शनिवार/इतवार को कर सकते हैं. परफारमेन्स तो आप खुद ही देखकर समझ लें, हम यह निबंध नहीं लिख पायेंगे आखिर डेढ़ साल का अनुभव जो है. report abuse
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बहुत ही बढ़िया आइडिया है। अब इतने दिग्गज लोगों ने एप्लाई किया है तो तनिक एक काम हमारा भी कर दिजिएगा, एक आध स्टेपनी हमएं भी दिला दिजिएगा, आपका रिजेक्ट किया भी चलेगा॥
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रविजी,
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मज़ा आ गया ! स्वयं outsourcing में व्यस्त रहता हूँ । blogging अभी तक शुरू नहीं की । औरों का blog पढ़कर टिप्पणियाँ लिख भेजता हूँ । आजकल टिप्पणियाँ लिखने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता । आपका idea बुरा नहीं है । अब मेरे नाम से टिप्पणी लिखने के लिए एक बकरे की तलाश है । उम्मीद है के मुझ्से अच्छा काम करेगा और चिट्टाजगत में मेरा नाम रोशन करेगा । आशा है कि स्कूल का कोई भी विद्यार्थी ने आपका यह लेख नहीं पढ़ा । नहीं तो होमवर्क का outsourcing शुरू हो जाएगा । G विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु report abuse
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द्वारा प्रेषित शशि सिंह , सितम्बर 11, 2007
अरे बाप रे, यहां तो आवेदनों की झड़ी लग गई। क्या नंबर भी लगेगा?
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रविजी, ये सब ससुरे बिना फोटु वाले क्वैचन मार्क हैं.
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इन लोगों का भरोसा ना किया जाए और एक फोटु वाले जिम्मेदार इंसान को स्टेपनी वाली जिम्मेदारी सौंपी जाए. जै हिन्द. report abuse
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द्वारा प्रेषित विकास , सितम्बर 26, 2007
आवेदकों में मेरा भी नाम जोड़ा जाये.
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द्वारा प्रेषित garam bheja fry , अक्टूबर 10, 2007
स्टेपनी का विज्ञापन कुछ यू दिया जाए तो श्रीमान रवि के घर के आगे आवेदकों की लम्बी कतार लग जायेगी...
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चाहिए एक होनहार स्टेपनी चिट्ठाकार , वाहवाही की कला मे हो माहिर बाकी चिट्ठों पर करे दे ये kalaa जगजाहिर, राजनीति, खेल, सिनेमा पर करते रहे चिट्ठाकारी, गूगल की एडसेंस नामक है जो कामुक नारी, उससे दूर रहे वो ब्रह्मचारी.. ऐसा अगर है कोई कुंजीपट का पुजारी तो फौरन बायो-डाटा भेजे, bahaali है जारी report abuse
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