Tarakash.com, Hindi News, india news, entertainment, Hindi site, Hindi website, Hindi portal, तरकश - Hindi Information and Entertainment Portal

नारायणभाई को मूर्तिदेवी पुरस्कार
विशेष
शनिवार , , 15 सितम्बर

narayanabhai6

श्री नारायणभाई का सम्मान करते हुए
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री गोपालकृष्ण गांधी.
साथ में हैं गुजरात के राज्यपाल
श्री नवलकिशोर शर्मा और श्री चतुर्वेदी
 

प्रसिद्ध गाँधीवादी चिंतक, लेखक और गांधी कथाकार श्री नारायणभाई देसाई को कल अहमदाबाद में भारतीय ज्ञानपीठ के मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

 

श्री नारायणभाई को यह सम्मान उनकी रचना "मारु जीवन ए ज मारी वाणी" (मेरा जीवन वही मेरी वाणी) के लिए प्रदान किया गया. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल महामहीम गोपाल कृष्ण गांधी ने उनको इस पुरस्कार से सम्मानित किया.

 

इस विशेष मौके पर गुजरात के राज्यपाल श्री नवलकिशोर शर्मा, कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल और भारतीय ज्ञानपीठ के अध्यक्ष श्री चतुर्वेदीजी तथा अन्य कई गणमान्य व्यक्ति हाज़िर थे.


श्री नारायणभाई की रचना "मारु जीवन ए ज मारी वाणी" गाँधीजी की जीवन यात्रा को समर्पित है. गुजराती भाषा में लिखे इस महाग्रंथ में गाँधीजी के जीवन के हर पहलू की चर्चा की गई है.

इस रचना के विषय में बोलते हुए श्री नारायणभाई ने कहा कि," गांधी कथा जब पढ़ता हुं तो 24 घंटे भी कम पड़ते हैं. मेरे लिए यह जो पर्व है वह आनंद का पर्व उतना नही है जितना अहंकार को मिटाने की कोशिश का पर्व है. मुझे लगता है कि यहाँ गौरव मेरा नही बल्कि मेरे ग्रंथ औ उसके महानायक का है.

यह तो साफ है कि इस ग्रंथ को लिखने की स्थूल प्रेरणा इस बात से हुई कि इस महानायक का जीवन चरित्र उसकी मातृभाषा (गुजराती) में नही था. मेरे सामने मेरी मेज पर करीब बीसेक गांधी जीवनीयाँ पडी थी, लेकिन उनमें से एकाध अपवाद छोडकर बाकी सारी गांधी के केवल एक ही पहलू को उजागर करती थी.

मैं यह सोचता था कि क्या बिना अध्यात्म के गांधी का सत्याग्रह हो पाता? गांधी के जीवन की जड में अध्यात्म था. इसका प्रमाण उनके सामाजिक विचार और सत्याग्रह में मिलता है. इसलिए मैं चाहता था कि गांधी का अंखंडित रूप प्रकट हो. गाँधीजी के सत्य को असम्पादित रूप में देखना चाहिए.

इस ग्रंथ को लिखने में मुझे चार साल लगे. इस ग्रंथ को लिखना मूर्तिदेवी पुरस्कार के संदर्भ से नहीं था, बल्कि इसे लिखना ही सबसे बडा गौरव था. पुस्तक का शीर्षक भी मैने गाँधीजी से उधार ही लिया है."

राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी, जो कि गांधीजी के पौत्र भी हैं, ने अपने भाषण में बीते दिनों को याद किया कि कैसे श्री नारायणभाई गाँधीजी के गोद में ही खेला करते थे, और उनकी छत्रछाया में ही बडे हुए हैं. इस मौके पर नारायणभाई के पिता और गांधीजी के सचीव तथा दाहिने हाथ स्व. महादेव देसाई को भी याद किया गया तथा एक काल्पनिक दिवास्वप्न जिसमे स्वर्ग में अभी जब नारायण भी को पुरस्कृत किया जा रहा है गाँधीजी, बा बा ,महादेवभाई तथा हरिलाल काका, देवदास काका वगेरे क्या बाते कर रहें होंगे के बहाने आजके हालातों पर चुटकी भी ली. सभागार बार बार तालियों से गूँजता रहा.

इस समारोह में शिरकत करने श्री नारायणभाई देसाई का परिवार, जिसमें उनके पुत्र अफलातुन (हिन्दी चिट्ठाकार), नचिकेता, पुत्रवधु, पुत्री और अन्य लोग भी आए हुए थे.

अहमदाबाद के गांधी विद्यापीठ की पावन भूमि पर अत्यंत सादे और गरिमा पूर्ण वातावरण में यह समारोह सम्पन्न हुआ.


तस्वीरों में

 

narayanabhai1

श्री नारायणभाई के साथ श्री गोपालकृष्ण गांधी 

 

narayanabhai2

श्री नारायणभाई के साथ श्री गोपालकृष्ण गांधी, श्री नवलकिशोर शर्मा, 

श्री टी.एन. चतुर्वेदी, और श्री रविन्द्र कालिया 

 

 

narayanabhai4

श्री नारायणभाई के साथ चर्चा करते हुए तरकश के श्री संजय बेंगाणी 

और नारायणभाई के पुत्र श्री अफलातुन

 

 

narayanabhai5

नारायणभाई अपने परिवार के साथ

 

सभी फोटो: अभिजीत चक्रबर्ती 

टिप्पणियाँ (4)add
...
द्वारा प्रेषित ATUL , सितम्बर 15, 2007
विस्तार से रपट अच्छी लगी. ग्यानपीठ की पत्रिका नया ग्यानोदय मे भी इस पुस्तक का एक अध्याय प्रकाशित हुआ है, सितम्बर अक मे.

अतुल
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित शास्त्री जे सी फिलिप् , सितम्बर 15, 2007
यह बहुत ही खुशी की बात है. आदर के पात्र का आदर जरूर होना चाहिये -- शास्त्री जे सी फिलिप



आज का विचार: चाहे अंग्रेजी की पुस्तकें माँगकर या किसी पुस्तकालय से लो , किन्तु यथासंभव हिन्दी की पुस्तकें खरीद कर पढ़ो । यह बात उन लोगों पर विशेष रूप से लागू होनी चाहिये जो कमाते हैं व विद्यार्थी नहीं हैं । क्योंकि लेखक लेखन तभी करेगा जब उसकी पुस्तकें बिकेंगी । और जो भी पुस्तक विक्रेता हिन्दी पुस्तकें नहीं रखते उनसे भी पूछो कि हिन्दी की पुस्तकें हैं क्या । यह नुस्खा मैंने बहुत कारगार होते देखा है । अपने छोटे से कस्बे में जब हम बार बार एक ही चीज की माँग करते रहते हैं तो वह थक हारकर वह चीज रखने लगता है । (घुघूती बासूती)
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित and illuminating.and illuminating . the function was well attended and everybody felt happy for attending it , सितम्बर 16, 2007
shri narayanbhai's speech was quite to the point and illuminating. he felt it was his duty to write this book. the fulfillment of that duty was the reward he had received and he was fully satisfied with it.
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित ghughutibasuti , सितम्बर 17, 2007
नारायण देसाई जी को मूर्तीदेवी पुरुस्कार दिये जाने के विषय में आपने लिखा ,उसके लिये धन्यवाद। फ़ोटो व लेखन दोनों बढ़िया रहे ।
घुघूती बासूती
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
टिप्पणी लिखें
quote
bold
italicize
underline
strike
url
image
quote
quote
smile
wink
laugh
grin
angry
sad
shocked
cool
tongue
kiss
cry
smaller | bigger

busy
 


लोगिन करें






क्या आप अपना कूटशब्द भूल गये हैं?
क्या आप ने अभी तक खाता नहीं खोला? खाता खोलें

फ़ीड सबस्क्राइब करें


आपका Email ID: