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हिन्दी दिवस पर मिले हिन्दी चिट्ठाकार.
संजय दृष्टि
शनिवार , , 15 सितम्बर
sanjay  संजय दृष्टि - संजय बेंगाणी द्वारा

हिन्दी के कुछ चिट्ठाकारों ने हिन्दी दिवस पर अहमदाबाद में मिलना तय किया और 14 सितम्बर को अफ्लातुनजी (सपत्नि), घुघूति-बासुतिजी, योगेश शर्माजी, मैं (संजय बेंगाणी), पंकज बेंगाणी, अभिजीत चक्रवर्ती, रवि कामदार इस प्रस्तावित चिट्ठाकर-मिलन में शामिल हुए. स्थान के रूप में पहले से ही हमारी ऑफिस तय थी और समय रखा सुबह के 10.30 बजे का.

मैं और पंकज अफ्लातुनजी को लेने सुबह 9.30 बजे वे जिन महाशय के यहाँ ठहरे थे, उनके घर की ओर चल दिये. अभिजीत ऑफिस पहुँच दुसरी तैयारियों में जुट गया. रास्ता पूछते व फोन पर दिशा-निर्देश पाते अंततः हम घर अफ्लातुनजी, सुरेशजी, योगेश्जी, संजय, पंकज, घुघूतीजी, स्वातीजी.खोजने में सफल रहे. मजुमदार साहब जो कि अफ्लातुनजी के पारिवारिक मित्र है, के घर पर हमारा अपनत्व भरा स्वागत हुआ. मौका ऐसा था की चाय का जुगाड़ तय लगा तो हम भी लगे बतियाने. वहीं नचीकेतजी जो अफ्लातुनजी के भाई है तथा उनके एक पत्रकार मित्र जो पटना से आये थे, उनसे भी मुलाकात हुई और आदिवासी इलाको में काम करने वाले अफ्लातुनजी के मित्र सुरेशजी से भी बतियाने का मौका मिला. अफ्लातुनजी की बहन व मौसी भी तो थे. चाय का स्वार्थ पुरा नहीं हुआ तब तक सबसे बतियाते रहे. नचिकेतजी से बहुत पहले ही इस मिलन में शामिल होने का अनुरोध कर चुके थे, और वह मंजूर भी हो गया था. आज उनके एक और मित्र आबिद-सुरती जो की मशहूर कार्टुनिस्ट है भी आ रहे थे, तो नचिकेतजी अपने मित्रो के साथ बादमें पहुँचने का वादा किया और हम अफ्लातुनजी, उनकी पत्नि स्वातिजी व मित्र सुरेशजी को लिये अपनी ऑफिस पहुँचे. मिलन का समय 10.30 का तय था और हम पन्द्रह मिनट देरी से पहुँचे थे. मगर अन्य लोग भी नहीं पहुँचे तो उनके उलाहना से बच गए.

जल्दी ही घुघूतीजी पहुँच भी पहुँच गई और योगेशजी भी. थोड़ी इधर-उधर की बाते कर जल्दी ही घेरा डाले हिन्दीmeet2 के चिट्ठाकार चर्चा में मगन हुए. मानो नियम ही है, शुरूआत हिन्दी एग्रीगेटरों से होती हुई बातचीत थू-थू करते चिट्ठो पर होते हुए जल्दी ही हवा हो गई और हम गम्भीर चर्चा में लीन हो गए. न किसी की टागँ खिंचाई न किसी की आलोचना.

चर्चा के मुख्य मुद्दे रहे: हिन्दी साहित्य अंग्रेजी साहित्य के मुकाबले कम क्यों लिखा/खरीदा जाता है.
नेट पर हिन्दी में लेखन बढ़ेगा, किस दिशा में जाएगा. जहाँ तक सुचना क्रांति नहीं पहुँची है वहाँ तक कम्युटर शिक्षा कैसे पहुँचाई जाए.

हम गुटों में बंट कर नहीं सब आमने-सामने बात कर रहे थे बिना उत्तेजित हुए. आम आदमी तक भोजन व स्वास्थय जैसी सुविधाएं किस रास्ते पहुँचनी सम्भव है, इस पर साम्यवाद, समाजवाद और पूँजीवाद पर अपने अपने अपने तर्क रखे. इधर सुरेशजी गुजरात सरकार द्वारा गाँवो-गाँवो में पहुँचा दिये गये कमप्युटरों की क्या गत बन रही है इस पर प्रकाश डाला और बिजली की सरल उपलब्धता नहीं होने का अफसोस व्यक्त किया. गाँवो में शिक्षक-डॉक्टर काम नहीं करना चाहते से लेकर मुफ्त सेवा दे रही साइटो को गुगल द्वारा खरिदा जाना भी चर्चा का विषय रहे. योगेशजी कम समय ले कर आये थे, उन्हे सबसे मिलने और अपनी बाते रखने का मोह खिंच लाया था. तो पहले उन्हे अपनी बात कहने का मौका दिया गया. अब अपनी बाते वे ही ज्यादा प्रभावी रूप से लिख सकते है, ऐसे में मेरा अनुरोध है की वे भी इस मिलन पर अपनी प्रविष्टी लिखें. अफ्लातुनजी के अफ्लातुन तर्क भी उनके अलावा कौन लिख सकता है? हमें उनकी प्रविष्टी की भी प्रतिक्षा रहेगी. घुघूतीजी अपनी बेटी के घर की ओर आज रवाना हो चुकी है. आशा है जल्दी ही वे भी अपनी प्रविष्टी लिखेंगी. सुरेशजी को ब्लॉगर बनाने का जिम्मा हमारे कन्धो पर डाल अफ्लातुनजी निश्चींत हो गए है. अब सुरेशजी को धीरे धीरे इस मायजाल का नशेड़ी बनाना है.

स्वातीजी, अफ्लातुनजी व सुरेशजीसमय अपनी गति से आगे बड़ रहा था, मगर लग रहा था की घड़ी के काँटे दौड़ रहे है. तब तक निधिजी (हमारी धर्म-पत्नि भाई) भोजन लिये पहुँच गई. फिर सबने भोजन ग्रहण किया और इस दौरान नारी अत्याचार पर चुटकी भी लेते रहे. योगेशजी पहले ही रवाना हो चुके थे, तो आबिद-सुरतीजी की फ्लाइट देरी से थी तो नचिकेतजी आ नहीं सके. अफ्लातुनजी ने अपने पिताजी द्वारा लिखी पुस्तक "सोनार बांगला" हमें भेंट स्वरूप दी. हमने भी सप्रेम ग्रहण कर ली.

भोजन उपरांत हमें एक ऐतिहासीत घटना का हिस्सा बनने जाना था. एक समारोह में अफ्लातुनजी के पिताजी श्रीनारायण भाई देसाई को उनकी पुस्तक “मारूँ जिवन एज मारी वाणी” जो कि गाँधीजी की 2000 पन्नो से भी ज्यादा बड़ी जिवनी है के लिए ज्ञानपीठ के मुर्तिदेवी पुरस्कार के सम्मानित किया जाने वाला था. हम सब समारोह का हिस्सा बनने रवाना हुए. समारोह का विवरण आप यहाँ पढ़ सकते है.

चिट्ठाकार मिलन को गुजराती दैनिक दिव्य भाष्कर ने अपनी खबर बनाते हुए लिखा, " हिन्दी दिवस पर हिन्दी ब्लॉगर मिले"



 

टिप्पणियाँ (11)add
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द्वारा प्रेषित Amit , सितम्बर 15, 2007
वाह, विस्तृत विषयों पर चर्चा हुई, सही है। smilies/smiley.gif

वैसे लगता है कि तरकश वाले अधिकाधिक मीट-वीट कर दिल्ली वालों से कंपीटीशन करने के चक्कर में हैं!! smilies/wink.gif smilies/grin.gif
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द्वारा प्रेषित ATUL , सितम्बर 15, 2007
वाह बहुत अच्छा रहा. ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए. गुजरात मे हिन्दी पर चर्चा तो हिन्दी भाषी राज्यो मे अन्य भाषाओ पर भी चर्चा होनी चाहिए. और लोग नही करते तो ब्लागर ही करे
रपट के लिए धन्यवाद.
अतुल
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द्वारा प्रेषित श्रीश शर्मा , सितम्बर 16, 2007
बहुत सही तो दिल्ली के बाद अहमदाबाद भी चिट्ठाकार मिलन केंद्र के रुप में विकसित होता जा रहा है। वार्ता का विवरण देने के लिए धन्यवाद।
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द्वारा प्रेषित अफ़लातून , सितम्बर 16, 2007
निधिजी द्वारा अत्यन्त प्रेम से कराए गए दिव्य भोजन की रपट , हमारे जिम्मे ।
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द्वारा प्रेषित अभिजित , सितम्बर 16, 2007
संजयजी के इसी विशेश विवरण व टिप्पनी के इंतेज़ार में हम सब रहते हैं।

हिन्दी चिट्ठाकार के जगत में मेरा योगदान बहूत हि कम है, लेकिन खबरें आति रहति है।

मुझे नहि लगता के तरकश वाले किसि के साथ कंपिटीशन के किसि चक्कर में हैं, वे तो सिर्फ इतना चाहते हैं के ज्यादा से ज्यादा लोग हिन्दी चिट्ठाकार जगत के साथ जुदें व एक दूसरे के साथ चर्चा विमर्श करें। इसिलिये हर सम्भव मौके का लाभ उठाते हैं।

संजयजी जारी रखिए ...!
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द्वारा प्रेषित नीरज दीवान , सितम्बर 16, 2007
इधर सुरेशजी गुजरात सरकार द्वारा गाँवो-गाँवो में पहुँचा दिये गये कमप्युटरों की क्या गत बन रही है इस पर प्रकाश डाला और बिजली की सरल उपलब्धता नहीं होने का अफसोस व्यक्त किया. गाँवो में शिक्षक-डॉक्टर काम नहीं करना चाहते


सही दिशा.. यही होना चाहिए। इसे हल के सोपान तक पहुंचाने की दिशा में चर्चा भी होनी चाहिए।
अफलातून की रपट का इंतज़ार रहेगा.
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द्वारा प्रेषित समीर लाल , सितम्बर 16, 2007
संजय भाई

यह रिपोर्ट तो एकाएक दिख गई वरना कब छपी पता ही नहीं चला. बहुत बेहतरीन रहा यह मिलन भी. ऐसा ही होना चाहिये कि कुछ सार्थक चर्चा हो. मेल मिलाप, जान पहचान तो स्वभाविक परिणीति है.

जारी रखें इस तरह के मिलन समारोह. शुभकामनायें.
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द्वारा प्रेषित शशि सिंह , सितम्बर 17, 2007
दो दिन बाद यानी 16 सितम्बर को यहां मुम्बई में भी नौ चिट्ठाकारों ने मेल-मिलाप किया. सौभाग्य से इस मीटिंग के खास मेहमान कनपुरिया फुरतिया अनुप शुक्लजी का जन्मदिन भी 16 को ही था। इस मीटिंग में शामिल चिट्ठाकरों की सूची ये रही:
अनुप शुक्ल (फुरसतिया), आशीष श्रीवास्तव, अभय तिवारी, युनुस भाई, विमलजी, अनिल रघुराज, बोधिसत्व, चवन्नी चैप और मैं।

विवरण के लिए इनके चिट्ठों पर नजर रखी जाये।
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द्वारा प्रेषित ghughutibasuti , सितम्बर 17, 2007
विवरण तो होता रहेगा कम से कम केक का फ़ोटो तो दिखा दीजिये !
घुघूती बासूती
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द्वारा प्रेषित ira mallik , सितम्बर 13, 2008
HINDI DIVAS

kripya HINDI DIVAS ke ish paricharcha ke barein mein aur kuch jankari dijiai.
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द्वारा प्रेषित ira mallik , सितम्बर 13, 2008
HINDI DIVAS

kripya HINDI DIVAS ke ish paricharcha ke barein mein aur kuch jankari dijiai. smilies/smiley.gif smilies/kiss.gif
aapka dhanyavad.
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