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चीन के मुँह पर थप्पड
रोचक विज्ञापन
गुरुवार , , 27 सितम्बर

Amnesty International

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China is getting Ready.

In the name of ensuring stability and harmony in the country during the 2008 Olympic Games, the Chinese Government continues to detain and harass political activists, journalists, lawyers and human rights workers.

चीन तैयार हो रहा है.  

2008 ओलम्पिक खेलों के दौरान देश मे स्थिरता और भाईचारा बनाए रखने के नाम पर चीन सरकार राजनैतिक कार्यकरताओं, पत्रकारों, वकीलों और समाजसेवीयों को प्रताडित कर रही है. 

Advertising Agency: MUW Saatchi & Saatchi, Slovakia
Creative Director: Rasto Michalik
Art Director: Radim Blaho
Copywriters/Idea: Peter Izo, Matus Svirloch
Photographer: Miso Bak
Production Company: Hitchhiker
Published: September 2007
9
10 यह तो सब जानते हैं कि चीन के खाने के और दिखाने के दाँत अलग अलग होते हैं. चीन में मानवाधिकारों का हनन और लोगों को प्रताडित करने का सिलसिला लगातार जारी है. एमनेस्टी के प्रस्तुत विज्ञापन में चीन की चमक दमक के पीछे की भयावय सच्चाई को उजागर किया गया है. यह चीन की नितियों के उपर एक करारा प्रहार भी है. 
 

 


टिप्पणियाँ (7)add
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द्वारा प्रेषित प्रभात टान्डन , सितम्बर 27, 2007
दर्दनाक दृशय ! अपने देश के कम्नयूसटॊं को अवशय देखना चाहिये ।
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द्वारा प्रेषित pankaj bengani , सितम्बर 27, 2007
टिप्पणी देने के लिए धन्यवाद. हाँ जरूर देखना चाहिए पर शायद ही उनको अक्ल आए. smilies/sad.gif
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द्वारा प्रेषित सुरेश चिपलूनकर , सितम्बर 27, 2007
यहाँ के कम्युनिस्ट देख भी लें तो क्या, ये तो उनके लिये "फ़ेमिलियर" चित्र हैं, सिंगूर और नन्दीग्राम में इसकी एक झलक हम देख चुके हैं,
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द्वारा प्रेषित pankaj bengani , सितम्बर 27, 2007
यहाँ के कम्युनिस्ट देख भी लें तो क्या, ये तो उनके लिये "फ़ेमिलियर" चित्र हैं, सिंगूर और नन्दीग्राम में इसकी एक झलक हम देख चुके हैं,


smilies/grin.gif sahi farmaya
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द्वारा प्रेषित नीरज दीवान , सितम्बर 27, 2007
सही है. चीन का "लौह आवरण" अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोट चुका है. व्यवहारिक धरातल पर बिना डंडे के कम्युनिज़्म रहा ही नहीं है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के हवाले से चित्र छापे हो गुरू. इसी मानवाधिकार संगठन ने भारत पर कई कमेंट मारे हैं. ख़ासकर गुजरात के संदर्भ में. उन पर भी ध्यान दिया कीजिए. 'मीठा गप कड़वा थू' नहीं होना चाहिए.
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द्वारा प्रेषित pankaj bengani , सितम्बर 28, 2007
'मीठा गप कड़वा थू' नहीं होना चाहिए.


टिप्पणी के लिए धन्यवाद. ध्यान रखेंगे कि 'मीठा गप कड़वा थू' ना हो. आपके विचार प्रस्तुत करने का शुक्रिया. आशा है मार्ग दर्शन मिलता रहेगा.
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KAMUNIST SE KHATARA
द्वारा प्रेषित SUDHAKAR , मई 23, 2008
BHARAT CHARO TARAF SE KAMUNISTO SE GHIRA HAI BANGAL/NEPAL/BARAMA CHINA BAHUT KHTARA HAI
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