| राम की गंगा कितनी मैली! |
| पर्यावरण | |||
| गुरुवार , , 04 अक्टूबर | |||
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टिप्पणियाँ
(4)
द्वारा प्रेषित तानसेन् , अक्टूबर 04, 2007
बरबाद कर दी नदी, गंगा का दूषित पानी अमृत समझ कर पीलेगें लेकिन टंकी का पानी छ्न्नी लगा के पीएंगे! अरे भई पानी मे गंद मिलाओगे तो पानी गंदा नही होएगा तो फिर क्या होएगा। गंगा मे नहाने वालो को ,ऊसमे गंद मिलाने वालो को कोई फर्क नही पडता, ये लोग तो जानते भी नही होंगे की गंगा नदी प्रदूषित हो रही है। अगर भारत सरकार नदीयो की चिंता करती तो गंगा के तटों के किनारे बिजली के नंगे तार खडे कर देती। फिर कोई मलमूत्र, शव, थैलियां, कूडा करक़ट नही मिला पाता। अब ईन जनों का अन्ध विश्वास खत्म करें भी तो कैसे करे... ईंसान पूरा दम लगा के बरबाद कर रहा है प्राकृतिक धन। अगर हम प्रकृति की परवाह नही करेंगे तो प्रकृति हमारी परवाह नही करेगी।
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THESE DEROGATORY COMMENTS ON GANGA MAIYA HAVE HURT MY SENTIMENTS................ TO EXPRESS MY FEELINGS I WILL FILE PIL, BURN PUBLIC PROPERTY, ORGANIZE RALLIES, INCITE RIOTS, KILL PEOPLE, DEMOLISH OTHER COMMUNITY'S' ESTABLISHMENTS,................. NO ONE CAN STOP ME ...... OUR CULTURE HAS BEEN CHALLENGED, I HAVE RIGHT TO DO ANYTHING I WANT. YOU BATTER APOLOGIZE FOR YOUR INSULTING REMARKS ON OUR HERITAGE.
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द्वारा प्रेषित AVAJKXGFGM'j , जुलाई 10, 2008
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