| नरेन्द्र मोदी जिनका नाम आँख के सामने आते
ही कईयों की मुट्ठियाँ भिंच जाती है तो कईयों की बाँछे खिल जाती है। नमो
जिस दिन से मुख्यमंत्री बने उस दिन से विवादों ने कभी भी उनका पीछा नहीं
छोड़ा; और खुद भी कई बार जान बूझ कर विवादों को हवा देते रहे। एक क्रूर
मुख्यमंत्री, जिन्होने आतताईयों (हिन्दूओं) को मुस्लिमों की हत्या करने की
तीन दिन की खुली छूट देने के आरोप भी लगते रहे हैं।
पर आज हम नरेन्द्र मोदी के दूसरे रूप की चर्चा करेंगे और वह रूप है एक
साहित्यकार का। इन्दिरा गांधी द्वारा इमरजन्सी लगाये जाने पर भूगर्भवास के
दौरान नमो ने की कई कहानियाँ लिखी थी और उनमें से आठ कहानियों (गुजराती
में) का पहला संग्रह प्रेमतीर्थ के नाम से पिछले दिनों (27.10.2008)
प्रख्यात कथाकार रमेश भाई ओझा के हाथों विमोचन हुआ। प्रेमतीर्थ इन दिनों
गुजराती साहित्य में चर्चा में है।
इस पुस्तक में से एक कहानी रूम नंबर नव... ( कमरा नंबर नौ...) गुजराती चित्रलेखा दीपावली विशेषांक में प्रकाशित हुई है।
कहानी केन्सर ग्रस्त युवक राजन की है जिनकी मृत्यु निश्चित है और राजन को
इस बात का पता भी है, परन्तु राजन को मृत्यु का कोई डर नहीं। हर समय
खुशमिजाज रहना ही राजन का स्वभाव है।
राजन
को वहाँ मिलती है एक और खुश मिजाज युवती राभी, जिसकी दिनचर्या है रोज
केन्सर के रोगियों से मिलकर उनका हाल हाल पूछना और उन्हें एक गुलाब देना,
और इस काम की वजह से राभी ने विवाह ना करने का निर्णय किया है।
राजन की राभी गहरी से दोस्ती हो जाती है। राभी को भी पता है कि राजन को
असाध्य केन्सर हुआ है परन्तु राजन की जीवन जीने के प्रति फिलोसोफी वाली
बातों का राभी पर बहुत प्रभाव पड़ता है और राभी दिन रात राजन की सेवा करने
में मगन हो जाती है, जिससे रश्मि की भी मदद हो जाती है।
एक दिन राजन, राभी के साथ वार्ड में फूल बाँटने के लिये राभी के मना करने
पर भी जाता है। सब रोगियों से मिलकर हाल चाल पूछने और गुलाब बाँटने के बाद
एक खाली बेड (रूम नंबर 17) के पास आकर राभी रुक जाती है और उस बेड पर
गुलाब रखने के बाद राभी की आँख से आँसु निकल जाते हैं।
राजन को पता चलता है कि कुछ दिनों पहले तक एक किशोर रोगी इस बेड पर सोया
करता था और मरने से पहले उसने राभी से वचन लिया था कि उसके मरने के बाद भी
राभी रोज उस बेड पर एक गुलाब रखा करेगी।
दिन दिन राजन की तबियत बिगड़ने लगती है और दिन रात खून की उल्टियाँ होने
लगती है। आखिरकार वह दिन आ ही जाता है जिस दिन राजन की तबियत बहुत बिगड़
जाती है और मरने से पहले राजन- राभी से वचन लेता है कि उसे विवाह करना
होगा।
जब वह उस किशोर का वचन पूरा कर सकती है तो मेरा भी करना होगा। क्यों कि वह मरने के बाद राभी की कोख से जन्म लेना चाहेगा।
नौ पन्नों की कहानी की चर्चा को कुछ शब्दों में कर पाना नामुमकिन सा है।
इस कहानी में कुछ खास बातें यह थी कि नरेन्द्र मोदी का चिकित्सा विज्ञान
के प्रति ज्ञान!
मसलन एक जगह जब डॉ राव , राजन को फाइबर ओप्टिक गेस्ट्रोस्कोप टेस्ट के
लिये ओपरेशन थियेटर की तरफ ले जाते हैं तब राजन स्ट्रेचर की बजाय पैदल चल
कर ओपरेशन थियेटर की तरफ जाता है, तो डॉ राव उसे कहते हैं। ( मैं पैरा को
गुजराती में ही लिख रहा हूँ। आसान गुजराती है, आप समझ सकते हैं)
'राजन... तमारी तबियत नी स्थिती जोता तमारे आराम नी खूब जरूर छे, आ रीते चालवु...' डॉ रावे चिंता व्यक्त करी.
'डॉ
राव सर आपनी लागणी एक डॉक्टर करता विशेष छे हुं जाणु छूं, पण डॉक्टर
साहेब, मारा वर्तमान के भविष्य- बेमाथी ऐकेय वात तमारा थी छुपी नथी...सर,
हुं जाणुं छुं के मारा लीवर-फ्रंक्शन टेस्ट, हाडका ना टेस्ट अने चेस्ट
एक्स-रे मांना केननबोल एपीरियन्से आपने चिंतित कर्या छे, डॉक्टर हुं जाणु
छुं के मारो छेल्लो रिपोर्ट सेकन्ड्रीज इन लंग केन्सर छे.'
राजन साँस लेवा सहेज थोभ्यो:
हुं
जाणुं छुं के आप केन्सर नु मूळ शोधवानी मथामण छो अने आ मथामण मां आपना
ध्यान मां ए पण आव्यु छे के स्टमक ना ग्रेटर कर्वेचर पर अल्सर छे. आप आजे
ज नक्की करवाना छो के आ अल्सर छे के सारकोमा.'
यह पुस्तक प्रवीण प्रकाशन प्रा. लि. ने प्रकाशित किया है। 128 पृष्ठ की इस पुस्तक का मूल्य है 100/-
उपर दिया हुआ फोटो फोटो गुजराती संदेश से साभार
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गज़ब!!