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फिल्में किराये पर दिखाने को लेकर एपल और स्टूडियो मे मतभेद |
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तकनीक
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शुक्रवार , , 18 जनवरी |
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तरकश ब्यूरो
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एपल के फार्मूले के अनुसार यदि कोई ग्राहक फिल्म देखना चाहेगा तो वह फिल्म उसके सिस्टम मे स्टोर कर दी जाएगी
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एक बार फिल्म शुरू कर दी तो अगले 24 के भीतर उसे पुरी देख लेनी पडेगी क्योंकि उसके बाद वह फिल्म सिस्टम से मिटा दी जाएगी.
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एपल के सी.इ.ओ. स्टीवन जॉब्स और हॉलिवुड के कई प्रतिष्ठित स्टूडियो के बीच चल रही वार्ता अभी भी किसी नतीजे पर नही पहुँची है. एपल कम्पूटर्स अपने आई ट्यूंस अप्लिकेशन के माध्यम से किराये पर फिल्मे दिखाना चाहता है और इसके लिए यह कम्पनी विभिन्न स्टूडियो से अनुमति मांग रही है. लेकिन स्टूडियो संचालकों की राय इस बारे मे बँटी हुई है.
स्टीवन जोब्स ने इस बारे मे खुलासा करते हुए बताया कि, कम्पनी का इरादा अन्य कम्पनियों की ही तरह किराये पर फिल्मे दिखाने के व्यवसाय मे कदम बढाने का है. सिर्फ इनका मॉडल थोडा सा अलग होगा.
एपल के फार्मूले के अनुसार यदि कोई ग्राहक फिल्म देखना चाहेगा तो वह फिल्म उसके सिस्टम मे स्टोर कर दी जाएगी जो 30 दिनों तक कभी भी देखी जा सकेगी. एक बार फिल्म देखना शुरू करने के बाद अगले 24 घंटे तक उस फिल्म को खत्म किया जाना जरूरी होगा. यानि एक बार फिल्म शुरू कर दी तो अगले 24 के भीतर उसे पुरी देख लेनी पडेगी क्योंकि उसके बाद वह फिल्म सिस्टम से मिटा दी जाएगी.
स्टीवन जॉब्स इस फार्मूले के साथ स्टूडियो संचालकों से कई दौर की बातचीत कर चुके हैं. लेकिन अभी तक बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुँची है. लेकिन एपल इससे हताश नही है. उनके मुताबिक इस तरह के प्रोजेक्ट मे देरी तो होती है.
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