| फ्रॉड, फ्रॉड तेरे कितने रूप? |
| रवि-वार्ता | |||
| बुधवार , , 09 अप्रेल | |||
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किसी फ्रॉड के कितने रूप हो सकते हैं भला? और, आपसे सीरियसली पूछा जा रहा है. आपसे आशा की जाती है कि आप अपना जवाब सीरियसली ही दीजिएगा.
चलिए, अच्छा ये ही बता दीजिए कि कोई फ्रॉड कितना सीरियस हो सकता है? आई मीन कि फ्रॉड कम सीरियस, ज्यादा सीरियस कब होता है और वो नो, नॉन सीरियस किस्म का कब होता है? हो सकता है, हम में से बहुतेरे ये कहें - ए फ्रॉड इज ए फ्रॉड इज ए फ्रॉड. एक रूपए का किया गया हो या एक करोड़ रुपए का - फ्रॉड तो भई फ्रॉड ही होता है. पर, एक भारतीय सरकारी विभाग है. सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफ़िस. यानी कि वो ऑफ़िस सीरियस किस्म के फ्रॉडों की ही जांच पड़ताल करता है. नॉन सीरियस, माने कि सिर्फ हंसी मजाक के लिए, मौज मजे के लिए किए गए फ्रॉडों की जांच पड़ताल वो विभाग नहीं करता. उस ऑफ़िस के नियम तो पता नहीं हैं, और न ही आइंदा पता करने की इच्छा है, परंतु ये तो तयशुदा बात है कि किसी फ्रॉड के सीरियस होने में उसकी क्वांटिटी और क्वालिटी का बहुत बड़ा योगदान होगा. जैसे कि किसी बैंक से ऋण लेकर कोई दो-चार करोड़ का किया गया घोटाला इस ऑफ़िस की निगाह में सीरियस एनफ़ नहीं होगा और वो इसकी जांच दायरे में जाहिर है नहीं आएगा. तो, ऐसे नॉन सीरियस क़िस्म के घोटाले बखूबी किए जा सकते हैं. इसलिए भी कि ऐसा कोई सरकारी विभाग - नॉन सीरियस इनवेस्टिगेशन ऑफ़िस मेरी निगाह से अब तक नहीं गुजरा है. आपकी निगाह से गुजरा हो तो आप जानें और आपके कर्म! एक बात और चमत्कृत करती है. सरकारी विभागों में जाहिरा तौर पर काम सीरियसली नहीं होते. ऐसे में सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफ़िस कितना सीरियस काम कर पाती होगी? हो सकता है ये ऑफ़िस वाकई सीरियसली काम करती हो. तब तो सीरियसली, इसका नाम होना चाहिए था सीरियस फ्रॉड इनवेस्टीगेशन ऑफ़िस दैट वर्क सीरिसयली. शायद तब फ्रॉड करने वालों में थोड़ा भय पैदा होता और वे सीरियस फ्रॉड करना छोड़ कुछ नॉन सीरियस टाइप काम करते. मामला जरा ज्यादा ही सीरियस होने लगा है, और इससे पहले कि आप वाकई सीरियस हो जाएं, आइए, एक फ्रॉड करते हैं. व्यंज़ल पढ़ते हैं - व्यंज़ल जिंदगी क्या है, बस एक फ्रॉड ही तो है कुछ भी कह लो मुहब्बत फ्रॉड ही तो है धर्म और जाति के दैनिक युद्धों के बीच आराधना आरती अजान फ्रॉड ही तो है सुना लीजिए भले ही तमाम कहानियाँ वो मुसकुराहट महज एक फ्रॉड ही तो है हर बात में बात की बात में अकसर सीरियसपन दिखाना बस फ्रॉड ही तो है भले ही मानते रहो रवि को संत लोगों खुद की निगाह में वो खुद फ्रॉड ही तो है
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