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क्या हम त्वचा से सांस ले सकते हैं? |
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विज्ञान
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शनिवार , , 19 अप्रेल |
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तरकश ब्यूरो
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| इस शोध से पता चला है कि चूहे अपनी त्वचा से सांस लेते हैं. |
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यह एक वैज्ञानिक सच्चाई है कि मेंढक अपनी श्वसन क्रिया का कुछ हिस्सा अपनी त्वचा के जरिए पूरा करते हैं. और माहौल की विषमताओं के अनुसार अपनी इस क्षमता में उतार चढाव कर सकते हैं. लेकिन क्या हम इंसान भी अपने नाक के साथ साथ अपनी त्वचा से भी सांस (ऑक्सीजन) ग्रहण कर सकते हैं?
एक शोध के अनुसार यह कुछ हद तक सम्भव भी है. इस शोध से पता चला है कि चूहे अपनी त्वचा से सांस लेते हैं.
इस शोध से यह सिद्ध हुआ है कि जब ऑक्सीजन की मात्रा वातावरण मे घटने लगती है तो शरीर त्वचा के माध्यम से ऑक्सीजन ग्रहण कर गुर्दे में इरिथोपोटीन नामक हार्मोन बनाने लगता है.
इरिथोपोटीन हार्मोन रक्त में लाल कणों के निर्माण में सक्रिय योगदान देता है. लाल रक्त कण शरीर में ऑक्सीजन की आपुर्ति बनाए रखते हैं.
अभी तक यह शोध चूहों पर की गई है. लेकिन वैज्ञानिक आश्वस्त हैं कि इंसानों पर भी यह खोज की जा सकती है, और यह साबित भी हो सकता है कि हम भी कभी कभी त्वचा के माध्यम से सांस लेते हैं. यदि यह सच्चाई प्रमाणित हो जाए तो भविष्य मे एनिमीया (खून का कैंसर) जैसे रोगों के इलाज मे क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकते हैं.
जब हम किसी ऐसी जगह पर जाते हैं जहाँ ऑक्सीजन कम हो वहाँ त्वचा के माध्यम से ऑक्सीजन का शरीर तक पहुँचना शुरू हो जाता है और शरीर में लाल रक्त कणों का निर्माण तेज हो जाता है. एनिमीया रोग से ग्रसित व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कण नष्ट होते हैं. इस प्रकार से यदि यह शोध कारगर सिद्ध होती है तो एनिमीया से ग्रस्त रोगी का सही उपचार किया जा सकेगा.
चूहे पर किए गए प्रयोग की सफलता से यह साबित हुआ है हमारे पूर्वजों मे त्वचा के द्वारा श्वसन क्रिया करनी की क्षमता रही होगी.
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